{"_id":"5ffd3ed4dfdd8a3a5a7c221c","slug":"seema-pahwa-on-film-ram-prasad-ki-tehrvi-public-reaction-in-theatre","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"जियो स्टूडियोज की साल की पहली फिल्म रही सुपरफ्लॉप, निर्देशक ने कहा- ‘सलमान की फिल्म से न करें तुलना’","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
जियो स्टूडियोज की साल की पहली फिल्म रही सुपरफ्लॉप, निर्देशक ने कहा- ‘सलमान की फिल्म से न करें तुलना’
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: shrilata biswas
Updated Tue, 12 Jan 2021 11:56 AM IST
विज्ञापन
1 of 6
राम प्रसाद की तेरहवीं
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
मुकेश अंबानी की कंपनी जियो स्टूडियोज के बैनर तले रिलीज हुई साल की पहली फिल्म 'राम प्रसाद की तेरहवीं' के बॉक्स ऑफिस नतीजों ने कंपनी प्रबंधन की नींद उड़ा दी है। बिना किसी प्रचार प्रसार या मार्केटिंग के रिलीज हुई निर्देशक सीमा पाहवा की डेब्यू फिल्म 'राम प्रसाद की तेरहवीं' को बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप बताया जाना उन्हें अच्छा नहीं लगा है। सीमा का कहना है कि ऐसे कठिन समय में आखिर किसी छोटे बजट की फिल्म को पैसे के साथ कैसे तोला जा सकता है?
2 of 6
राम प्रसाद की तेरहवीं
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म 'राम प्रसाद की तेरहवीं' एक पारिवारिक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जिसमें नसीरुद्दीन शाह, सुप्रिया पाठक, मनोज पाहवा, कोंकणा सेन शर्मा, विक्रांत मेस्सी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार नहीं किया। रिलीज होने से लेकर अब तक इस फिल्म ने देशभर में करीब 25 लाख रुपये की ही कमाई की। बेशक फिल्म के मुख्य कलाकार नसीरुद्दीन शाह ने लोगों से इस खास फिल्म को देखने के लिए गुजारिश की लेकिन इसका असर लोगों पर नहीं हुआ।
3 of 6
सीमा पाहवा
- फोटो : फाइल
फिल्म 'राम प्रसाद की तेरहवीं' की निर्देशक सीमा पाहवा फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर बात करते हुए कहती हैं, 'एक फिल्म का इस समय सिनेमाघरों में रिलीज होना और समय काटना अपने आप में एक चुनौती है। ऐसे में सिनेमाघरों में सिर्फ 50 फीसदी लोगों को ही बैठने की इजाजत है। तो आखिर इस तरह की छोटे बजट की फिल्म को पैसे को आधार मानकर हिट या फ्लॉप करार कैसे दिया जा सकता है? यह समय का दोष है, मेरी फिल्म का नहीं।'
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 6
टेनेट
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
देश में कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के खत्म होने के बाद जब सिनेमाघरों को दोबारा खोला गया तो सरकार ने एक शो में मात्र 50 फीसदी लोगों को ही बैठने की इजाजत दी। हालांकि इस दौरान देश में रिलीज हुई 'वंडर वुमन 1984' और 'टेनेट' जैसी अंतरराष्ट्रीय बड़ी फिल्मों ने संतोषजनक कमाई कर ली थी। सीमा पाहवा की फिल्म 'रामप्रसाद की तेरहवीं' एक पारिवारिक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है, हालांकि इसमें थिएटर का पुट ज्यादा नजर आया। जिन लोगों ने ये फिल्म सिनेमाघरों में देखी उनको फिल्म तो अच्छी लगी, लेकिन ऐसी फिल्म के लिए सिनेमाघरों में आना उन्हें अच्छा नहीं लगा।
विज्ञापन
5 of 6
हम लोग
- फोटो : सीरियल
सीमा पाहवा कहती हैं, 'जब लोग पूछते हैं कि आजकल 'हम लोग' जैसे धारावाहिक आखिर क्यों नहीं बनते? तो मैं उन्हें बता सकती हूं कि इन दिनों फिल्मकार फिल्मों और टीवी शोज से होने वाली कमाई पर ज्यादा ध्यान देते हैं। उस चीज पर नहीं कि उनकी कहानी लोगों तक क्या संदेश पहुंचाएगी? ऐसा वातावरण देश में व्याप्त हो चुका है जहां निर्देशक और लेखक अपने विषय के साथ समझौता करते हैं और कोई सामग्री पर आधारित चीजें बनाने से डरते हैं।'
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।