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EXCLUSIVE: 47 साल चलेगा अभिनय करियर कभी सोचा न था, जया की डिप्लोमा फिल्म देख बनी अभिनेत्री: शबाना

Sat, 28 Aug 2021 10:38 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 28 Aug 2021 10:38 AM IST
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Shabana Azmi speaks to Pankaj Shukla on The Empire Halo What’s love go to do with it Jaya Bachchan
फिल्म 'ये नजदीकियां' की शूटिंग और शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला मुंबई

शबाना आजमी को निर्देशक सत्यजीत रे से अपने दौर की सबसे नाटकीय अभिनेत्री का तमगा हासिल है। अभिनय की दुनिया में आने की भी उनकी दिलचस्प कहानी है। उन्हें खुशी है कि अब सिनेमा के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और इसका असर आने वाले दिनों में इसकी कहानियों पर भी जरूर पड़ेगा। अपनी नई वेब सीरीज ‘द एम्पायर’ के अलावा शबाना अपनी अंग्रेजी फिल्म ‘‘व्हाट्स लव गॉट टू डू विद इट?’ में एमा टॉमसन के साथ काम करने को लेकर भी खासी उत्साहित हैं। स्टीवन स्पीलबर्ग की सीरीज ‘हेलो’ का जिक्र भी उन्होंने इस दौरान किया। शबाना ने अपने 47 साल के अभिनय सफर के तमाम किस्से और कहानियां सुनाईं हैं ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल को इस एक्सक्लूसिव बातचीत में।

Shabana Azmi speaks to Pankaj Shukla on The Empire Halo What’s love go to do with it Jaya Bachchan
द एम्पायर में शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला मुंबई

जब भी कोई नया निर्देशक कुछ नया बनाने का हौसला लेकर आता है तो उसकी पहली नज़र शबाना आजमी पर ही जाती है। फिर चाहे वह महेश भट्ट हों, सुधीर मिश्रा हों या फिर विनय शुक्ला से लेकर टेरी समुंद्रा और अब मिताक्षरा कुमार। नए निर्देशकों के प्रस्तावों में आप ऐसा क्या तलाशती हैं जो आपको हां कहने के लिए प्रेरित करता है?

मुझे लगता है उनका जो अपने काम को लेकर जो जुनून होता है वह मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। नए लोग जब शूटिंग करने आते हैं तो ऐसा लगता है कि अगर उनको वही शॉट जो उन्होंने अपने दिमाग में सोचा है, नहीं मिला तो उनकी दुनिया ही बदल जाएगी। हम ठहरे घाघ लोग लेकिन हमको ऐसे हालात में में उन पर थोड़ा सा प्यार भी आता है और थोड़ी सी हंसी भी। वेब सीरीज ‘द एम्पायर’ की निर्देशक मिताक्षरा के साथ तो मुझे बहत ही मजा आया। उनको जो चीज चाहिए भले ही वह फिर दृश्य की पृष्ठभूमि में ही क्यों न हो, वह न मिले तो वह बेहाल हो जाती थीं। डिजिटल दौर आने से भी निर्देशक बहुत कुछ शूट कर लेना चाहता है। इसमें कई बार उनका लालच भी बढ़ जाता है लेकिन मेरा मानना है कि अगर कोई नया माध्यम मिला है तो उसका फायदा उठाने में बुराई नहीं है।

Shabana Azmi speaks to Pankaj Shukla on The Empire Halo What’s love go to do with it Jaya Bachchan
द एम्पायर में शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला मुंबई

इतिहास में बहुत कम महिलाएं ऐसी हुई हैं जिनको ‘किंगमेकर’ कहा जा सके तो एसान दौलत का किरदार करने से पहले आपके जेहन में भी ‘मुगल ए आजम’ जैसी तमाम फिल्में तो जरूर घूमी होंगी?

आमतौर पर यही होता है क्योंकि हमारे पास संदर्भ बहुत कम होतें हैं। आमतौर पर हम यही करते हैं कि पहले जो फिल्में हमने देखी होती हैं उन्हीं के हिसाब से हम एक खाका बना लेते हैं। एक ऐतिहासिक किरदार करने की मेरी बहुत ख्वाहिश थी और खासतौर से इसलिए कि उसको कुछ दूसरे ढंग से कैसे पेश किया जाए ताकि वह ऐसा न लगे कि ‘मुगल ए आजम’ के डॉयलॉग बोले जा रहे हैं। मैंने एक फिल्म देखी थी शेखर कपूर की ‘एलिजाबेथ’। उसमें मैंने ये देखा था जो अभिनेत्री केट ब्लांशेट हैं, वह जब निजी जीवन में होती हैं तो अलग और जब सार्वजनिक जीवन में होती हैं तो उनकी संवाद अदायगी का लहजा अलग होता है। ‘द एम्पायर’ में का आधार एक किताब है। किताब में एसान दौलत को किंगमेकर तो बताया गया लेकिन उसकी पृष्ठभूमि का विस्तार उसमें नहीं है तो हमें बहुत सारा काम कल्पनाओं के सहारे करना पड़ा।

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Shabana Azmi speaks to Pankaj Shukla on The Empire Halo What’s love go to do with it Jaya Bachchan
द एम्पायर में शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला मुंबई

मैंने देखा है कि अपने किरदारों के प्रस्तुतीकरण में आप काफी शोध करती हैं और संवाद अदायगी के अलावा वेशभूषा से लेकर और भी तमाम प्रयोग करती हैं, इस बार अलग क्या किया आपने?

एसान दौलत के किरदार के लिए मैंने अपनी भौहें आधी कर दी हैं। ‘काली खुही’ में मैंने भोहें मिला दी थीं, इसमें आधी कर दी हैं। मेरा ये मानना है कि भाव प्रकटन में भौहों का बहुत बड़ा काम होता है। आधी भौंह जो है उससे भी बहुत कुछ उसका प्रभाव बदल देता है।

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Shabana Azmi speaks to Pankaj Shukla on The Empire Halo What’s love go to do with it Jaya Bachchan
द एम्पायर की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला मुंबई

सिनेमा में 47 साल हो चुके हैं आपको। कई महिला निर्देशकों के साथ आपने काम किया। अब कथानक कहने में महिला निर्देशकों की भागीदारी क्या कम होती दिख रही है?

नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। जोया अख्तर आज के दौर की कामयाब निर्देशक हैं। वह जिस किसी कलाकार के साथ काम करना चाहें तो कोई मना नहीं करेगा। मिताक्षरा के बारे में भी मेरा मानना है कि खूब कामयाब निर्देशक बनेंगी। पहले ये सोचा जाता था कि एक महिला निर्देशक सिर्फ औरतों के ही विषयों पर ही फिल्म बनाएंगी या ऐसे विषय चुनेगी जिनके विषय संकुचित हैं या जिनका कैनवस बड़ा नहीं है। लेकिन, अब ये बदल रहा है। ओटीटी से एक बात जो निकलकर आई है कि स्टार वार सब अपनी जगह पर है लेकिन कंटेट इज किंग। कंटेंट अच्छा होगा तो लोग देखेंगे। दूसरी बात ये भी है कि फिल्ममेकिंग के हर विभाग में लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। प्रोडक्शन में तो और भी बहुत ज्यादा लड़कियां काम कर रही हैं। मैं समझती हूं कि ये एक अच्छी स्वस्थ बदलाव है और इसकी वजह से कंटेंट में भी फर्क आएगा।

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