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गरीबी के चलते बनी थी वेश्या, अब भट्ट कैंप के लिए लिखती हैं फिल्मों की स्क्रिप्ट
amarujala.com- Written by: संगीता तोमर
Updated Sat, 11 Mar 2017 04:42 PM IST
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कभी इस लड़की की जिंदगी बेहद दर्दभरी और गुमनाम रही, लेकिन आज ये भट्ट कैंप का जाना-पहचाना चेहरा है। ये हैं शगुफ्ता रफीक, जो भट्ट कैंप के लिए 'वो लम्हे' से लेकर 'आवारापन', 'राज', 'मर्डर 2' और 'आशिकी 2' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की कहानी और डायलॉग्स लिख चुकी हैं।
शगुफ्ता रफीक की जिंदगी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। बचपन में ही एक ऐसा हादसा हुआ जिसने शगुफ्ता की जिंदगी ही पलट दी। शगुफ्ता अनाथ थीं और उन्हें अनवरी बेगम ने पाला। अनवरी बेगम ने शगुफ्ता को हर वो खुशी दी जिसकी वो हकदार थी लेकिन जल्द ही ऐसा वक्त आ गया जब गरीबी की चादर ने उन्हें ढक लिया। अनवरी को घर का गुजारा करने के लिए अपनी चूड़ियां तक बेचनी पड़ीं। घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी। जरूरत में अनवरी शुगफ्ता रफीक का सहारा बनीं थीं और अब शगुफ्ता की बारी थी को वो ये अहसान चुकाएं।
Shagufta Rafique
इसी के चलते 12 साल की शगुफ्ता ने प्राइवेट पार्टियों में नाचना शुरु कर दिया..ये पार्टियां कोई आम पार्टियां नहीं थीं बल्कि इनका वातावरण बिल्कुल एक कोठे जैसा होता था जहां बड़े बड़े-बड़े लोग अपनी प्रेमिकाओं और वेश्याओं के साथ आते थे...शगुफ्ता नाचतीं और वो लोग पैसे फेंकते..पैसे देख शगुफ्ता रफीक ऐसे खुश होतीं जैसे पूरी कायनात ही मिल गई हो। जिस परिवार ने शगुफ्ता को पाला, सहारा दिया उसका अहसान चुकाने के चक्कर में शगुफ्ता उन पार्टियों में नाचती रहीं और पैसों की बारिश होती रही।
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ये सिलसिला 17 साल की उम्र तक चला और फिर वो भयावह दौर आया जिसका अहसास खुद शगुफ्ता रफीक को भी नहीं था। शगुफ्ता अब वेश्यावृति की तरफ बढ़ चुकीं थीं। सालों तक ये सिलसिला चलता रहा।
शगुफ्ता की मां को पता था कि वो वेश्यावृति कर रही हैं लेकिन शगुफ्ता मन ही मन इस बात को लेकर खुश थीं कि कम से कम वो अपने परिवार का पेट तो भर पा रही हैं, उन्हें वो सब तो दे पा रही हैं जिसके हकदार उनके परिवारवाले हैं। शगुफ्ता को तसल्ली थी कि अब उनकी मां को बस में धक्के नहीं खाने पड़ते थे।
शगुफ्ता की मां को पता था कि वो वेश्यावृति कर रही हैं लेकिन शगुफ्ता मन ही मन इस बात को लेकर खुश थीं कि कम से कम वो अपने परिवार का पेट तो भर पा रही हैं, उन्हें वो सब तो दे पा रही हैं जिसके हकदार उनके परिवारवाले हैं। शगुफ्ता को तसल्ली थी कि अब उनकी मां को बस में धक्के नहीं खाने पड़ते थे।
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ज्यादा पैसे कमाने की ललक में शगुफ्ता रफीक दुबई तक पहुंच गईं और वहां बार डांसर के तौर पर काम किया। लेकिन मां की बीमारी के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा। कैंसर से उनकी मां की मौत हो गई और लगा जैसे मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा। लेकिन शगुफ्ता रफीक घबराई नहीं।