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बाइस्कोप: अमिताभ, रेखा और जया की 'सिलसिला' को हुए 39 साल, देखिए शूटिंग लोकेशन की दिलचस्प तस्वीरें

Sat, 15 Aug 2020 02:13 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 15 Aug 2020 02:13 AM IST
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Silsila This Day That Year by Pankaj Shukla 14 August 1981 Bioscope Amitabh Rekha Jaya Yash Chopra
सिलसिला - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

बाइस्कोप में आज की जो फिल्म है, उसे लिखने की शुरूआत करने को मेरे पास कम से कम 10 ऐसी बातें हैं जिनमें से हर बात उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि दूसरी बात। लेकिन मैं आज के बाइस्कोप की शुरुआत करता हूं इस फिल्म के सिनेमैटोग्राफर के जी यानी कोरेगांवकर के किस्से से। केजी ने अपना पहला नाम सिनेमा में कम ही इस्तेमाल किया, वह इसी नाम से जाने जाते थे। बी आर फिल्म्स से अलग होकर जब यश चोपड़ा ने अपना अलग बैनर 1970 में शुरू किया और जिसके इस साल 50 साल पूरे हो रहे हैं, तो वह अपने साथ अपने कुछ भरोसेमंद भी यशराज फिल्म्स में ले गए। केजी के बेटे राजू केजी ने मेरे साथ काम किया है तो मैं समझ सकता हूं कि उनके पिता कितने अनुशासनप्रिय और सज्जन व्यक्ति रहे होंगे। आज के बाइस्कोप की फिल्म है 'सिलसिला'। फिल्म 'इत्तेफाक' से शुरू हुए एक निर्देशक और एक सिनेमैटोग्राफर की दोस्ती के सिलसिले की ये आखिरी फिल्म है। यश चोपड़ा के सिनेमा में कुदरती नजारे इसके बाद भी लोगों ने देखे लेकिन परदे पर जिंदगी उतार देने वाले केजी जैसे सिनेमैटोग्राफर कम ही हुए।



Silsila This Day That Year by Pankaj Shukla 14 August 1981 Bioscope Amitabh Rekha Jaya Yash Chopra
सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अमिताभ और यश चोपड़ा का 'सिलसिला'
बात दोस्ती की ही चल रही है तो लगे हाथ इसी एहसास का दूसरा पहलू भी समझ ही लेते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं। हिंदी सिनेमा के शौकीन ये तो जानते ही हैं कि यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन का बहुत गहरा दोस्ताना फिल्मों में रहा है। राजेश खन्ना के साथ 'इत्तेफाक' और 'दाग' बनाने के बाद यश चोपड़ा ने देव आनंद के साथ 'जोशीला' बनाई थी। और, उसके बाद उन्होंने जो फिल्म 'दीवार' बनाई, उसने अमिताभ बच्चन को फिल्म 'जंजीर' में मिले एंग्री यंगमैन के तमगे पर सुनहरा वर्क चढ़ा दिया। सन 75 से शुरू हुआ ये सिलसिला फिल्म 'कभी कभी', 'त्रिशूल', 'काला पत्थर' से होता हुआ 'सिलसिला' पर आकर ही टूटा। यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन का नाम इसके बाद एक साथ फिल्म 'मोहब्बतें' में परदे पर दिखा, जिसके यश चोपड़ा निर्माता थे। और, दिखा फिल्म 'वीर जारा' में जहां यश चोपड़ा ने उनको शाहरुख खान के सामने हाशिये पर खड़ा कर दिया। तो आखिर ऐसा क्या हुआ 'सिलसिला' की मेकिंग के दौरान, कि यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन में मनभेद हो गए और इसके बावजूद दोनों इस फिल्म में पार्टनर भी थे।

Silsila This Day That Year by Pankaj Shukla 14 August 1981 Bioscope Amitabh Rekha Jaya Yash Chopra
सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कास्टिंग में फेरबदल से आया भूचाल
अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा की मोहब्बत के किस्से बहुत हैं, लेकिन दोनों की अदावत का पहला किस्सा वहां से शुरू होता है जब यश चोपड़ा को फिल्म 'सिलसिला' की दोनों हीरोइनों स्मिता पाटिल और परवीन बाबी को श्रीनगर से फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाने के बाद वापस भेजना पड़ा था। अपने आखिरी जन्मदिन पर मुंबई में तमाम लोगों के सामने यश चोपड़ा ने ये किस्सा सुनाया था कि कैसे इस फिल्म में स्मिता की जगह जया बच्चन और परवीन बाबी की जगह रेखा ने ले ली थी। परवीन बाबी ने तो खैर इस बात के लिए उफ भी नहीं की क्योंकि दिल टूटने की उनको आदत हो चुकी थी। स्मिता पाटिल इस बात को लेकर अरसे तक अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा दोनों से नाराज रहीं कि दोनों ने ये बात उनसे खुद क्यों नहीं की। बताते हैं कि ये फैसला स्मिता पाटिल तक पहुंचाने के लिए यश चोपड़ा ने शशि कपूर की मदद ली थी। कास्टिंग में इस फेरबदल का ठीकरा यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन के सिर फोड़ा था।

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Silsila This Day That Year by Pankaj Shukla 14 August 1981 Bioscope Amitabh Rekha Jaya Yash Chopra
सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

होने वाली भाभी बनी बीवी
फिल्म 'सिलसिला' की कहानी तो आपको याद ही होगी। ये इकलौती फिल्म है जिसमें शशि कपूर ने अमिताभ बच्चन के बड़े भाई का रोल किया है, नहीं तो उम्र में बड़े होने के बावजूद शशि कपूर फिल्मों में उनके छोटे भाई ही बनते रहे। तो फिल्म में दो भाई हैं, दोनों अपने अपने क्षेत्र में दिग्गज बन चुके हैं। एक का साहित्य की जमीन पर नाम उग चुका है। दूसरा आसमान में अपना नाम लिख चुका है। दोनों की शादियां नजदीक हैं और फिर हो जाता है एक हादसा...! छोटा भाई अपनी प्रेमिका को भूल बड़े भाई की पसंद से शादी कर लेता है। दोनों का परिवार चल निकलता है और फिर एक दिन छोटे के जीवन में लौट आती है उसकी प्रेमिका। दोनों फिर मिलते हैं। फिर दिल खिलते हैं। रातें गुलजार होती हैं। सबेरे शानदार होते हैं। लेकिन, कब तक? प्यार पूरा ही हो जाए तो फिर प्यार कैसा? तमाम अंधेरी संकरी सुरंगों से गुजरती हुई ये प्रेम कहानी जिस सामाजिक मुहाने पर आकर निकलती है, उसमें इसके राइटर सागर सरहदी भी कुछ अलग करते तो सन 1981 में भला क्या करते।

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Silsila This Day That Year by Pankaj Shukla 14 August 1981 Bioscope Amitabh Rekha Jaya Yash Chopra
सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रेखा का सिंगल टेक और जया के आंसू
सुनते तो यही हैं कि फिल्म बनने के दौरान तमाम कारनामे हुए। अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन का एक साथ होना ही तापमान बढ़ा देने के लिए काफी होता था। यश चोपड़ा मन ही मन हनुमान चालीसा पढ़ रहे होते और रेखा फिल्म के सिनेमैटोग्राफर केजी के कान में बोल देतीं, 'फर्स्ट टेक ही फाइनल टेक होगा, मैं बोल देती हूं। शॉट मिले तो ठीक, न मिले तो ठीक। मैं कट होते ही सीधे निकल जाऊंगी।' लेकिन केजी कभी ये बात न यश चोपड़ा से बोल पाते और न ही अमिताभ बच्चन से। अमिताभ को लगता कि जया ने कुछ किया होगा तभी रेखा का मूड उखड़ गया और जया के पास सिवाय आंसू भर भर के अपनी आंखों का नंबर बढ़ा लेने के कोई दूसरा रास्ता होता नहीं था। 'सिलसिला' की मेकिंग के दौरान यश चोपड़ा जिस तनाव से गुजरे वह इसकी रिलीज के दिन और इसके बाद तक जारी रहा।

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