भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में से एक सुनील दत्त का निधन 25 मई 2005 को हुआ था। सुनील दत्त के निधन को 15 साल बीत चुके हैं। लेकिन आज भी हिंदी सिनेमा और राजनीति के मैदान में उनके दिए योगदान को कोई भुला नहीं पाया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक सफल अभिनेता बन जाने के बाद भी उनका जीवन संघर्ष से भरा रहा। वहीं जब उन्हें कुछ सुख की प्राप्ती हुई तो उनकी जीवनलीला समाप्त हो गई।
'कैंसर' और 'ड्रग्स' ने बना दिया था सुनील दत्त को लाचार, सफल अभिनेता होने के बावजूद जीवनभर किया संघर्ष
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सुनील दत्त का फिल्मी करियर सफल रहा। फिल्मों के साथ ही उन्होंने राजनीतिक जगत में भी अपनी अलग ही पहचान बना ली थी। लेकिन इतना सब करने के बाद भी सुनील दत्त बेहद लाचार थे। उनकी लाचारी की वजह थी बेटे की ड्रग्स की लत और पत्नी का कैंसर। यूं तो वो अपने जीवन में बेहद खुश थे। बस इन्हीं दोनों चीजों ने उन्हें दुखी कर दिया था। फिर पत्नी की मृत्यु से तो वो टूट से गए थे।
सुनील दत्त के एक मित्र ने अपने इंटरव्यू के दौरान बताया था कि सुनील दत्त पूरे जीवनभर असंभव लड़ाइयां लड़ते रहे। अपने बेटे को लगी ड्रग्स की लत छुड़ाने के लिए वो अमेरिका गए। इसके बाद पत्नी नरगिस का इलाज कराने के लिए भी उन्हें दोबारा अमेरिका जाना पड़ा। इन सबके दौरान वो बहुत परेशान रहे। देखा जाए तो उनका जीवन संघर्षपूर्ण ही रहा है।
सुनील दत्त की मुसीबतें कभी कम ही नहीं हुईं। कैंसर और ड्रग्स ने उन्हें बेहद लाचार और दुखी कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने इन दोनों ही बीमारियों के प्रति लोगों को सजग करने की ठानी। वो लोगों को इसके प्रति जागरुक करना चाहते थे। जिसके लिए उन्होंने दो बार मुंबई से चंडीगढ़ तक पदयात्रा भी की।
सुनील दत्त एक बहुत अच्छे अभिनेता, बहुत अच्छे राजनेता और उससे भी कहीं बेहतर इंसान थे। वो हमेशा लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते थे। उनके जीवन में कितनी भी परेशानियां आईं लेकिन उन्होंने सबका सामना हंसते हुए ही किया। वो जब भी किसी से मिलते कभी भी उनके माथे पर शिकन नहीं रहती थी। सुनील दत्त के निधन के समय भी हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे।
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