अभिनेता सनी देओल 19 अक्तूबर को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। बॉलीवुड फिल्में हो या असल जिंदगी हो, सनी देओल अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं। वो अपने दमदार अभिनय के लिए तो जाने ही जाते हैं साथ ही उनके डायलॉग्स पर भी खूब तालियां बजती हैं। आज भी उनकी फिल्मों के डायलॉग सिनेप्रेमियों को याद है। तो चलिए इसी कड़ी में ऐसे ही दमदार डायलॉग्स से फिर से रूबरू करवाते हैं।
सनी देओल के वो 10 दमदार डायलॉग्स, जिन पर सिनेमाघरों में खूब बजी थीं तालियां
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दामिनी
चड्ढा, समझाओ, इसे समझाओ। ऐसे खिलौने बाजार में बहुत बिकते हैं, मगर इसे खेलने के लिए जो जिगर चाहिए न, वो दुनिया के किसी बाजार में नहीं बिकता, मर्द उसे लेकर पैदा होता है और जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पर पड़ता है न तो आदमी उठता नहीं, उठ जाता है।
घातक
ये मजदूर का हाथ है कात्या, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है। ये ताकत खून-पसीने से कमाई हुई रोटी की है। मुझे किसी के टुकड़ों पर पलने की जरूरत नहीं।
गदर: एक प्रेम कथा
अशरफ अली, आपका पाकिस्तान जिंदाबाद है, इससे हमें कोई एतराज नहीं लेकिन हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद है, जिंदाबाद था और जिंदाबाद रहेगा।
जिद्दी
चिल्लाओ मत इंस्पेक्टर, ये देवा की अदालत है, और मेरी अदालत में अपराधियों को ऊंचा बोलने की इजाजत नहीं।

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