फिल्म ’तानाजी द अनसंग वॉरियर’ के निर्देशक ओम राउत कहते हैं कि ये फिल्म उनकी एक ऐसी परिकल्पना रही है, जिसमें असल रंग भरने का काम इसमें लीड रोल निभाने वाले अभिनेता अजय देवगन ने ही किया। ओम राउत पिछले कई दिनों से अमेरिका में थे, अपनी अगली फिल्म ’आदिपुरुष’ के आईमैक्स संस्करण पर काम करने के सिलसिले में। वापस अपने वतन लौटे तो फिल्म ’तानाजी द अनसंग वॉरियर’ को तीन नेशनल अवार्ड मिलने की खुशखबरी आई। वह कहते हैं कि राष्ट्रवाद और सिनेमा का ये फिल्म बेहतरीन संगम रही। एक ऐसे किरदार के बारे में दुनिया भर को बताना उनके लिए किसी मिशन की तरह रहा और ओम के मुताबिक इन तीन नेशनल अवार्ड्स ने इस मिशन को अब जाकर पूरा किया है।
EXCLUSIVE: ओम राउत ने पूरी टीम को दिया तीनों नेशनल अवार्ड्स का श्रेय, बोले, ‘अब मेरा मिशन तानाजी पूरा हुआ’
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भारतीय संस्कृति और इसके नायकों की कहानियों को बचपन से सुनते आए ओम राउत जब फिल्म निर्देशक बने तो अपनी पहली ही फिल्म ‘लोकमान्य: एक युगपुरुष’ बाल गंगाधर तिलक की जीवनी की घर घर पहुंचाने के लिए बनी। ये फिल्म मराठी में थी। हिंदी में अपनी पहली फिल्म भी उन्होंने एक वीर मराठा पर ही सोची। ओम बताते हैं, ‘फिल्म ’तानाजी द अनसंग वॉरियर’ की कहानी लेकर जब मैं पहली बार अजय (देवगन) सर के पास पहुंचा तो उन्होंने पूरी कहानी सुनने के बाद सबसे पहले यही कहा कि ये फिल्म मैं बना रहा हूं। फिल्म में लीड रोल करने के अलावा उनका फिल्म का निर्माता भी बनना मेरे लिए मेरी सोच को परदे तक पहुंचाने में बहुत सहायक रहा।’
ओम राउत कहते हैं, ‘छत्रपति शिवाजी को महाराष्ट्र में देवपुरुष की तरह पूजा जाता है। उनके सबसे वफादार क्षत्रप तानाजी मालुसरे की कहानी बहुत कम लोगों ने सुनी थी। इस कहानी को मुझे भारतवर्ष से प्रेम करने वाले हर दर्शक तक पहुंचानी थी। ये फिल्म मेरे लिए एक फिल्म नहीं बल्कि मिशन रही है। फिल्म का नाम भले ’तानाजी द अनसंग वॉरियर’ रहा हो लेकिन अब वह ‘वेल संग वॉरियर’ (लोकप्रिय योद्धा) बन चुके हैं। उनकी कहानी घर घर तक पहुंची, यही मेरा सम्मान रहा है। और, अब फिल्म को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना सोने पर सुहागा है। अब मैं कह सकता हूं कि मेरा मिशन पूरा हुआ।’
‘अमर उजाला’ से इस खास बातचीत में ओम राउत फिल्म के लीड कलाकार अजय देवगन के अलावा अपनी पूरी टीम के सहयोग को इस फिल्म की सफलता का श्रेय देते हैं। वह कहते हैं, ‘अजय सर ने फिल्म में तानाजी का किरदार जिस जोश, जुनून और जांबाजी से निभाया है, उसकी मिसाल कम मिलती है। वह परदे पर तानाजी ही लगते हैं। ये उनके सहयोग से ही संभव हो पाया कि हमने फिल्म जैसी सोची, वैसी ही बनाई। अजय सर इस फिल्म के निर्माता बने भी इसी वजह से। फिल्म की कहानी सुनने के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया यही थी, ‘ओम, इस फिल्म को मैं बनाऊंगा। दूसरा कोई पता नहीं इसे इसी रूप में बनाने दे या ना बनाने दे।’
फिल्म ’तानाजी द अनसंग वॉरियर’ की लोकप्रियता में इसके कलाकारों की वेशभूषा ने बहुत बड़ा योगदान किया। नचिकेत बर्वे और महेश शेरला को फिल्म की वेशभूषा बनाने के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। ओम कहते हैं, ‘फिल्म ’तानाजी द अनसंग वॉरियर’ की वेशभूषा हमने कलाकारों के भावों के अनुसार तैयार की। अजय सर की वेशभूषा रचते समय हमने उनकी वीरता, साहस और बलिदान को ध्यान में रखा और उसी तरह के रंगों की वेशभूषा उनके लिए बनाई। सैफ अली खान का किरदार उनके स्याह रंगों से निखरता है तो छत्रपति शिवाजी महाराज की दैवीय आभा निखारने में भी उनकी वेशभूषा का स्पष्ट योगदान रहा।’