फिल्म देखते वक्त हमारे जहन में केवल फिल्म के लीड स्टार्स ही होते हैं, लेकिन उसे पर्दे पर सींचने वाला डायरेक्टर हमे कभी याद नहीं रहता है। एक डायरेक्टर ही होता है जो फिल्म के सभी सीन्स को तेैयार करता है।तो ऐसे में बात करेंगे भारतीय सिनेमा के ऐसे 10 डायरेक्टर की जिनकी फिल्में सिनेमा में आने के बाद हिट होनी तय थी...
सत्यजीत रे (1921-1992)
इस कड़ी में पहला नाम लेना चाहेंगे सत्यजीत रे का।सत्यजीत रे के बारे में अगर कहा जाए कि उन्होंने घुटनों पर चल रहे भारतीय सिनेमा को चलना सिखाया तो गलत नहीं होगा। सत्यजीत रे कलकत्ता में 1921 में पैदा हुए थे। उन्होने ज्यादा बंगाली सिनेमा में ही हाथ आजमाया। उनकी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' ने कई अवार्ड जीते। हिन्दी में उन्होने 'शतरंज के खिलाडी' जैसी फिल्म बनाई जो हिन्दी सिनेमा की यादगार फिल्म है। भारत रत्न सत्यजीत रे को भारतीय सिनेमा का सबसे बेहतर डायरेक्टर कहा जाता है।सत्यजीत रे को 1992 में भारत रत्न दिया गया था।
गुरुदत्त (1925-1964)
गुरुदत्त की फिल्म 'प्यासा' भारतीय सिनेमा का शानदार नगीना है। जिन्होंने उनकी ये अकेली फिल्म भी देखी है वो ये जानता है कि गुरुदत्त कितने बड़े कलाकार थे। गुरुदत्त महज 39 साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए। लेकिन छोटी सी जिंदगी में उन्होंने कई बड़े काम किए जिसका गवाह उनकी फिल्में हैं। उनकी फिल्मों में प्यासा, कागज के फूल, चौदहवी का चांद और साहिब बीवी और गुलाम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में शामिल हैं।
बिमल रॉय (1909-1965)
बिमल रॉय भारतीय सिनेमा के महान निर्देशकों में शुमार हैं। उन्होंने दो बीघा जमीन, मधुमति, सुजाता और बंदिनी जैसी फिल्में बनाई। ना सिर्फ उन्होंने हमें ये कालजयी फिल्में दीं बल्कि गीतकार गुलजार को तराश कर हीरा बनाने का श्रेय भी बिमल दा को ही जाता है। उन्होंने ही गुलजार को एक गैराज से निकाल कर फिल्मों से जोड़ा।
महबूब खान (1907-1964)
पहली बार भारत की जिस फिल्म को ऑस्कर के लिए चुना गया वो थी 'मदर इंडिया'। मदर इंडिया को बनाया महान निर्देशक महबूब खान ने। महबूब खान के नाम पर कई शानदार फिल्में हैं। लेकिन मदर इंडिया अकेले ही महबूब खान को सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में शामिल करने को काफी है।