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जितेंद्र भी होते सुपरस्टार अगर ना करते ये फिल्में
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 02 Feb 2017 10:54 PM IST
अपने डांसिंग स्टाइल की वजह से अलग ही पहचान बनाने वाले बॉलीवुड एक्टर जितेंद्र फिल्म इंडस्ट्री में पांच दशकों से हैं और इस दौरान लीड हीरो के तौर पर उन्होंने करीब 200 फिल्में कीं जिनमें कई हिट रहीं तो कई ब्लॉकबस्टर। हालांकि उनकी कुछ फिल्में ऐसी भी रहीं जो दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाईं और बुरी तरह पिट गईं। और तो और इन फिल्मों के नाम भी बड़े अजीब थे।
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1967 में एक फिल्म आई 'गुनाहों का देवता'। इस फिल्म में जितेंद्र के साथ जयश्री लीड रोल में थीं और ये फिल्म कुछ खास नहीं चली। इसी साल आई उनकी दूसरी फिल्म 'बूंद जो बन गए मोती' भी कुछ खास नहीं चली। आमतौर पर शांताराम की ज्यादातर फिल्में सफल रहीं लेकिन उनकी ये फिल्म दर्शकों को कुछ खास पसंद नहीं आई। हालांकि इसमें जितेंद्र और मुमताज की जोड़ी को बेहद पसंद किया गया।
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1968 में एक फिल्म आई 'सुहाग रात'। इस फिल्म में जितेंद्र ने एक ऐसे फ्लाइट लेफ्टिनेंट का किरदार निभाया जो लड़ाई छिड़ने के बाद ही शादी की पहली रात ही जंग लड़ने पहुंच जाता है। शादी की पहली रात के इर्द-गिर्द बनाई गई इस फिल्म में जितेंद्र के साथ एक्ट्रेस राजश्री मुख्य किरदार में थीं।
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1960 से 70 के दौर में जितेंद्र ने तकरीबन 25 फिल्में कीं जिनमें कई सफल रहीं, लेकिन कुछ बुरी तरह फ्लॉप भी रहीं। इनमें 'औलाद', 'दो भाई', 'बड़ी दीदी', 'अनमोल मोती' और 'हिम्मत' जैसी फिल्में शामिल हैं।
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अपने करियर में जितेंद्र ने हर तरह के किरदार निभाए, रोमांटिक हीरो से लेकर गंभीर यहां तक कि बुजुर्ग का किरदार भी निभाया और हर किरदार में उन्हें पसंद भी किया गया। लेकिन फिल्मों के चुनाव में वो कई बार गच्चा खा गए। यही वजह रही कि 1971 से 75 के दौरान भी उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरीं। 'बिखरे मोती', 'कठपुतली', 'अनोखी अदा', 'गरम मसाला', 'आखिरी दांव' और 'रानी और लालपरी' जीतेंद्र की ऐसी फिल्में रहीं जो दर्शकों को रास नहीं आईं।
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