एक ही परिवार की तीन स्त्रियों और तीनों तीन अलग अलग पीढ़ियों की प्रतिनिधि। एक ही छत के नीचे रहते रहते समय भी बदलता है, विचार भी बदलते हैं और साथ ही बदलता है जिंदगी को सोचने समझने का ढंग। यही है त्रिभंग। पौराणिक रूप से त्रिभंग कृष्ण को कहा जाता है क्योंकि उनके खड़े होने की मुद्रा में वह शरीर को तीन जगहों से अलग अलग कोणों पर झुकाए रहते हैं, लेकिन जिंदगी अलग अलग कोणों पर झुके तो? यही दिखाने जा रही है काजोल की नई फिल्म, ‘त्रिभंग’।
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त्रिभंग
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तीन बिलकुल अलग तरह की महिलाओं को लेकर बने तीन पीढ़ियों के फैमिली ड्रामा का ट्रेलर सोमवार को रिलीज किया गया। ट्रेलर देखकर समझ आता है कि फिल्म में काफी दम हो सकता है, खासतौर से काजोल ने जिस तरह से एक आजाद ख्यालों वाली महिला का किरदार पेश करने की कोशिश की है, उससे उनके प्रशंसक जरूर फिल्म की तरफ आकर्षित होंगे। उनकी मां के किरदार में यहां हैं, तन्वी आजमी और बेटी के किरदार में मिथिला पालकर।
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रेणुका शहाणे लिखित और निर्देशित फिल्म ‘त्रिभंग’ एक असंगत परिवार और उसकी मुखिया नयन के जीवन से जुड़ी कहानी है। वह एक जानी-मानी मराठी साहित्यकार हैं और इस किरदार को निभाया है तन्वी आजमी ने। उसकी बेटी अनु एक ख्यातिलब्ध क्लासिकल डांसर और अभिनेत्री है, इस किरदार को काजोल ने निभाया है और नातिन माशा के किरदार में हैं मिथिला पालकर। इंसान की हार और कमियों की यह जटिल कहानी ओटीटी पर रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में कुणाल रॉय कपूर, कंवलजीत सिंह, मानव गोहिल और वैभव आदि कलाकार भी रोचक भूमिकाओं में हैं।
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फिल्म की लेखिका और निर्देशक रेणुका शहाणे कहती हैं, ‘त्रिभंग ओडिशी डांस की एक मुद्रा है, जिसमें तालमेल ना होने के बावजूद यह खूबसूरत है। इस फिल्म में महिलाओं को अभिव्यक्त करने के लिए इस शब्द को एक उपमा के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। उन महिलाओं की अपनी-अपनी धुन और सनक है। इसके बावजूद वे आकर्षक, खूबसूरत और जोश से भरी हुई हैं।'
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फिल्म में अभिनेत्री अनुराधा आप्टे की भूमिका निभा रहीं काजोल कहती हैं, “अपने नाम की तरह ही यह फिल्म सभी महिलाओं और उनकी खूबसूरत विषमताओं की बात करती है। हमें उन कमियों को स्वीकार करने और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की जरूरत है, जैसे कि नयन, अनु और माशा ने इस फिल्म में किया है। मेरा किरदार मुखर और अपने विचार रखने वाला है, जैसा कि दर्शक मुझे जानते हैं। फिर भी यह काफी अलग है। एक मां होने के नाते मैं इस बात को समझ सकती हूं कि महिलाओं को हर रोज किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।”