भारतीय टेलीविजन का इतिहास बहुत ही उन्नत रहा है। भले यह अमेरिकी टीवी धारावाहिकों या ब्रिटेन की टीवी धारावाहिकों की तुलना में एकदम अलग हो। पर इसका बिल्कुल यह मतलब नहीं कि भारत के टीवी सीरियल कमतर रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में भले इन दिनों टीवी धारावाहिकों के देखने वाले उतने जोशीले न रह गए हों, जितने पहले थे। पर इसी देश में ऐसे दौर रहे हैं जब धारावाहिक के समय लोग जरूरी कामों को छोड़ आते थे। सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था, कम से कम रामायण और महाभारत के साथ तो कुछ ऐसा ही था। उस दौर में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले पांच भारतीय टीवी धारावाहिक ऐसे हैं, जिनके बारे में हमें विस्तार से जानना ही चाहिए। फिर वह यूट्यूब, सीडी कैसेट्स, या किसी अन्य माध्यम से उपलब्ध हो तो देखना भी चाहिए। क्या था इनका जादू, और किस कदर लोगों के सिर चढ़कर बोलता था, चलिए आपको बताते हैं।
ये हैं भारतीय टीवी इतिहास के मशहूर धारावाहिक, दोबारा देखकर ताजा हो जाएंगी यादें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाभारत
80 के और 90 के दशक में भारत में महाभारत सबसे अधिक उत्साह के साथ देखा जाने वाला टीवी सीरियल माना जाता है। इस टीवी सीरियल ने भारतीय कलाकार समाज को फिरोज खान, गजेन्द्र सिंह चौहान, मुकेश खन्ना, पुनीत इस्सर, पंकज धीर, सुरेंद्र पाल, नितीश भारद्वाज, चेतन हंसराज, गुफी पेंटल, उमाशंकर, आर्यन वैद्य, किरण करमरकर, हर्षद चोपड़ा जैसे नये प्रतिभाशाली चेहरे दिए, जो बाद में खूब टीवी तो टीवी सिनेमा में भी खूब मशहूर हुए।
रामायण
रामानंद सागर की प्रस्तुति रामायण देश का पहला टीवी धारावाहिक था, जिसने आमजन की टीवी में आस्था जगा दी। रामायण के कुछ-कुछ एपिसोड इतने मार्मिक हैं कि लोग देखने के घंटे-घंटे भर बाद तक आंसू बहाते रहे। भारत के लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों के बारे में जब कभी लिखा-पढ़ा जाएगा तुलसीदास लिखित रामचरित मानस का टीवी रूपांतर प्रस्तुतिकरण 'रामायण' नाम पहली पंक्ति में आएगा। इसका प्रभाव इतना गहरा था कि इस टीवी सीरियल के पोस्टर को लोग अपने घरों में लगाकर पूजा करने लगे थे। इस धार्मिक सीरियल ने टीवी को अरुण गोविल (राम), दीपिका (सीता), दारासिंह (हनुमान), सुनील लाहिरी (लक्ष्मण), ललिता पवार (मंथरा), अरविंद त्रिवेदी (रावण) जैसे कलाकार दिए।
चंद्रकांता
भारत के दोनों धार्मिक ग्रंथों के टीवी सीरियलों के बाद लेखक देवकी नंदन खत्री की काल्पनिक कहानी ने लोगों को खूब खींचा। नौगढ़-विजयगढ़ की टकरार और एक राजकुमार व मुख्य किरदार चंद्रकाता के प्यार को देखकर लोगों को कहानी अपने बीच की लगी। लगभग 133 एपिसोड वाला यह टीवी सीरियल 1994 में शुरू हुआ और 1996 तक चला। इस सीरियल में क्रूर सिंह का अभिनय करने वाले अखिलेश मिश्र को तो बाद में बॉलीवुड ने हाथों-हाथ लिया। उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों का काम किया प्रकाश झा कि फिल्मों अपहरण, राजनीति आदि में उनके किरदार बहुत सराहा भी गया। एक और सितारा इस सीरियल में था, जो अब लोगों का चहेता बना हुआ है, उसका नाम है इरफान खान। लोगों को सीरियल देखने के लिए बड़ी बेसब्री से रविवार की सुबह का इंतजार रहता था।
शक्तिमान उस दौर का ऐसा शो था जिसने खासकर बच्चों को दीवाना बनाया। अभिनेता मुकेश खन्ना के जीवंत अभिनय ने इस किरदार को अमर कर दिया। सीरियल ने 400 एपिसोड सफलतापूर्वक पूरे किए और टीवी की दुनिया में छा गया। शो के खत्म होने के बाद छोटी-छोटी मगर मोटी बातें खूब पसंद किया जाता था। महाभारत में भीष्म का किरदार करते हुए मुकेश खन्ना को उतनी लोकप्रियता नहीं मिली थी, जितनी शक्तिमान ने दिलाई। इन्हीं के साथ गुरु द्रोणाचार्य बनकर जितना सुरेंद्र पाल लोगों को नहीं रिझा पाए उससे ज्यादा उनका खौंफ तमराज किलविश के रूप में लोगों तक पहुंचा। शक्तिमान को भारत का पहला सुपरहीरो भी कहा जाता था। यह एक खास तरह से हाथ घुमाकर आसमान में उड़ जाया करता था।