जानी-मानी अभिनेत्री उषा जाधव को अपनी फिल्म 'माई घाट- क्राइम नंबर 103/2005 के लिए इंडो जर्मन फिल्म वीक में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सुशोभित किया गया है। इस खबर की जानकारी खुद उषा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करके दी है। यह पुरस्कार मिलने पर उषा ने फिल्म के निर्देशक अनंत नारायण महादेवन, निर्माता मोहिनी गुप्ता और फिल्म की पूरी टीम को धन्यवाद और शुभकामनाएं भी दी हैं।
'माई घाट' में दमदार अदाकारी से उषा ने ऊंचा किया देश का नाम, विदेश में जीता सिनेमा का बड़ा पुरस्कार
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उषा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, 'इंडो जर्मन फिल्म फेस्टिवल, बर्लिन में बीती रात अपनी फिल्म 'माई घाट- क्राइम नंबर 103/2005' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिलने पर मैं बहुत खुश हूं। इसके लिए मैं मोहिनी गुप्ता, अनंत महादेवन और इस फिल्म की पूरी टीम का धन्यवाद और उन्हें बधाई देना चाहती हूं।'
वैसे इस फिल्म के लिए उषा का यह पहला पुरस्कार नहीं है। इससे पहले वह साउथ एशियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और पिछले साल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में भी इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।
Happy to receive Best Actor Female Award for
Mai Ghat:Crime no 103/2005 at the #IndoGermanFilmWeek @IndoGermanFilm in Berlin last night.
Thanks & congratulations MohiniGupta @ananthmahadevan & the team!!! 🙏 pic.twitter.com/XyO0OVDdrX
फिल्म की कहानी प्रभावती अम्मा की है जिनके बेटे को दो पुलिसकर्मियों ने झूठे इल्जाम में जेल में डाल दिया था। उनके बेटे का नाम उदय कुमार था। प्रभावती घरों में बर्तन मांजने का काम करती थी और उनका बेटा कूड़ा उठाने का। ओणम का त्योहार मनाने के लिए अम्मा ने अपने बेटे को कुछ पैसे दिए। जब यह पैसे पुलिस ने उदय के पास देखे तो उन्हें शक हुआ और चोर समझकर पुलिस ने उदय को अपनी गिरफ्त में ले लिया। हवालात में उदय को खूब पीटा गया और बाद में जब उसकी उसकी मौत हो गई तो उसे लावारिस हालत में फेंक दिया गया। इस दर्दनाक कहानी पर आधारित फिल्म में प्रभावती अम्मा का किरदार उषा जाधव ने निभाया है।
कुछ ही समय पहले उषा ने एक स्पेनिश फिल्म की शूटिंग शुरू की है। जुलाई के महीने की शुरुआत में ही उषा स्पेन चली गई थीं और वहां उन्होंने अपनी अगली फिल्म 'ला नुएवा नॉर्मलिदाद (La Nueva Normalidad)' की शूटिंग शुरू की। हिंदी में इस फिल्म के शीर्षक का मतलब 'नया सामान्य' है। इससे अंदाजा लगा सकता है कि इस फिल्म का मुद्दा कोरोना वायरस के बाद की अवस्था के संबंध में ही हो सकता है। स्पेनिश फिल्मों के जाने माने निर्देशक एलेजांद्रो कोर्तेस इस फिल्म को बना रहे हैं।

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