अभिनेत्री विद्या बालन ने अवास्तविक सौंदर्य मानकों के खिलाफ स्टैंड लिया है। वह जैसी हैं, तस्वीरों में भी वैसा ही दिखना चाहती हैं। उन्होंने शूट्स के दौरान 'नो फोटोशॉप' पॉलिसी की घोषणा की है। इसकी जानकारी जाने-माने फोटोग्राफर डब्बू रतनानी ने दी है। उनका कहना है कि विद्या बालन ने अपनी तस्वीरों का उपयोग कैसा किया जाना चाहिए, इस पर नियम जारी करके अवास्तविक सौंदर्य मानकों के खिलाफ स्टैंड लिया है। वह जैसी हैं, उसकी तुलना में स्लिमर नहीं दिखना चाहती हैं। डब्बू रतनानी ने कहा कि विद्या बालन अपनी स्किन से सहज हैं। वह अपनी तस्वीरों की री-टचिंग नहीं चाहती हैं। डब्बू रतनानी ने यह बात अपने एक नए इंटरव्यू में कही है।
उन्होंने कहा कि विद्या बालन अपनी तस्वीरों का किसी भी तरह का री-टचिंग नहीं चाहती हैं। वह अपनी तस्वीरों में पतला नहीं दिखना चाहती हैं। इसकी वजह है कि वह अपनी त्वचा में सहज है। विद्या बालन भी यह बात कह चुकी हैं कि वह जैसा दिखती हैं, उन्होंने खुद को उसी रूप में स्वीकार कर लिया है।
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विद्या बालन
- फोटो : Instagram
डब्बू रतनानी ने कहा, मैं सेट पर ही सर्वश्रेष्ठ प्रकाश व्यवस्था करने की कोशिश करता हूं, ताकि फोटोग्राफ के पोस्ट-ट्रीटमेंट की संभावना बेहद कम की जा सके। लेकिन विद्या बालन के साथ है कि वह अपनी तस्वीरों का री-टच पसंद नहीं करती हैं। वह अपनी स्किन के साथ कंफर्ट हैं और पिक्चर्स में स्लिम नहीं दिखना चाहती हैं।
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विद्या बालन
- फोटो : Instagram
उन्होंने कहा कि पत्रिका के शूटिंग के दौरान वह संपादकीय टीम टीम से कहती हैं कि उनकी तस्वीरों में सिर्फ रंग सुधार किया जाए, लेकिन री-टचिंग न दी जाए। विद्या अक्सर बॉडी शेम की बात कहती रहती हैं। इस साल की शुरुआत में अपनी फिल्म शेरनी के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि उनके शरीर का वजन एक 'राष्ट्रीय मुद्दा' बन गया था।
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विद्या बालन
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
उनका कहना था कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में हार्मोनल मुद्दों का सामना किया है। सबसे लंबे समय तक वह अपने शरीर से नफरत करती थीं। उन्हें लगता था कि उनके शरीर ने उनको धोखा दिया है। उन दिनों मैं सर्वश्रेष्ठ दिखने के दबाव में थी। इसकी वजह से निराश रहती थी।
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विद्या बालन
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
उन्होंने कहा था कि समय के साथ मैंने खुद को स्वीकार किया है। मैंने हर दिन खुद को थोड़ा और प्यार करना और स्वीकार करना शुरू कर दिया था। ऐसे में मैं लोगों को अधिक स्वीकार्य हो गई। उन्होंने मुझे प्यार और प्रशंसा देना शुरू कर दिया।