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विनोद खन्ना: स्टारडम छोड़ ओशो के आश्रम में माली बन गए थे अभिनेता, टॉयलेट तक किया था साफ
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: स्वाति सिंह
Updated Tue, 27 Apr 2021 11:13 AM IST
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विनोद खन्ना
- फोटो : विनोद खन्ना
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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना की गिनती सदाबहार कलाकारों में होती थी। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी हैं। आज भले ही वो हमारे बीच नहीं लेकिन अपनी फिल्मों के जरिए वो दर्शकों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। विनोद खन्ना का जन्म छह अक्तूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर (तब ब्रिटिश इंडिया में) में हुआ था। 27 अप्रैल को विनोद खन्ना की पुण्यतिथि होती है। आज उनकी पुण्यतिथि पर जानिए उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।
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विनोद खन्ना
- फोटो : instagram/vk_and_sk_fanclub
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1969 में फिल्म 'मन का मीत' से की थी। इस फिल्म में विनोद खन्ना ने विलेन का किरदार निभाया। सुनील दत्त से ऑफर मिलने के बाद जब ये बात विनोद खन्ना ने घर पहुंचकर अपने पिता को बताई तो वे बहुत गुस्सा हुए। यहां तक कि उनके पिता ने उन पर पिस्तौल भी तान दी और कहा कि यदि तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा। कहा जाता है कि विनोद खन्ना के पिता उन्हें बिजनेसमैन बनाना चाहते थे।
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विनोद खन्ना
- फोटो : instagram/akshayekhanna.ak
अपनी पहली ही फिल्म में विनोद खन्ना ने विलेन की भूमिका अदा की थी, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था। इसके बाद उन्होंने 'पूरब और पश्चिम', 'सच्चा झूठा', 'आन मिलो सजना', 'मस्ताना' और 'मेरा गांव, मेरा देश' सहित कई फिल्मों में विलेन का किरदार कर खूब सुर्खियां बटोरीं।
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Vinod Khanna
- फोटो : Social Media
विनोद खन्ना ने अपने करियर में 150 से ज्यादा फिल्में कीं। 70-80 के दौर में अमिताभ बच्चन अपनी करियर की ऊंचाईयों पर थे। उस वक्त उनकी स्टारडम को केवल एक ही अभिनेता टक्कर देने वाला माना जाता था वो थे विनोद खन्ना। शशि कपूर के बाद वो दूसरे अभिनेता थे जो रविवार को काम नहीं करते थे लेकिन उन्हें अपनी जिंदगी में एक खालीपन सा लगता था।
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विनोद खन्ना
- फोटो : सोशल मीडिया
विनोद बॉलीवुड के इकलौते ऐसे एक्टर कहे जाते हैं जिन्होंने अपने करियर की चोटी पर आकर रिटायरमेंट ले लिया और आश्रम चले गए। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि भले ही उनके पास दौलत-शोहरत है लेकिन एक कमी सी लगती है। इसी वजह से संन्यास का फैसला किया और अमेरिका में आध्यात्मिक गुरु ओशो के आश्रम चले गए।
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