फिल्म जगत एक ऐसी जगह है जहां पर कोई रातों-रात चमकता सितारा बन जाता है, तो वही एक फिल्म की असफलता भी बड़े से बड़े सितारे का करियर डुबा देती है। इंडस्ट्री में कई कलाकार ऐसे भी हैं जिन्होंने बहुत लोकप्रियता पाई, लेकिन हमेशा दुसरे अभिनेता या अभिनेत्री के तौर अधिकतर फिल्मों में काम किया। इन्हीं कलाकारों में शुमार है अभिनेता विनोद मेहरा का नाम जिन्होंने हिंदी फिल्म जगत में अधिकतर फिल्मों में 'सेकेंड लीड एक्टर’ के रूप में काम किया। दूसरे नंबर ने विनोद मेहरा का पीछा कभी नहीं छोड़ा। बॉलीवुड के सुपरस्टार रहें राजेश खन्ना के साथ एक प्रतियोगिता में भी वो दूसरे नंबर पर आएं। दूसरी बार दिल का दौरा पड़ने के बाद विनोद मेहरा इस दुनिया को अलविदा कह गए।
किस्सागोई: सुपरस्टार राजेश खन्ना से सिर्फ एक नंबर से हार गए थे विनोद मेहरा, दूसरे नंबर ने कभी नहीं छोड़ा पीछा
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राजेश खन्ना से एक पॉइंट से हार गए
इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कलाकारों में सुभाष घई, धीरज कुमार, राजेश खन्ना और विनोद मेहरा जैसे लोग थें। जिन्होंने आगे जाकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। जब इस प्रतियोगिता का अंतिम परिणाम सामने आया तो पता चला कि विनोद मेहरा राजेश खन्ना से सिर्फ एक पॉइंट से हार गए थे। डार्क स्टार- द लोनलीनेस ऑफ बीइंग राजेश खन्ना के लेखक गौतम चिंतामणि ने अपनी किताब में विनोद मेहरा के बारे में लिखते हुए कहा था, 'ब केवल अनुमान ही लगाए जा सकते हैं कि दो एक्स्ट्रा पॉइंट्स इस आकर्षक सौम्य एक्टर के भाग्य को कैसे बदल सकते थे। ऐसा कलाकार जिनके व्यक्तित्व में शूं शां नहीं थी, जैसी राजेश खन्ना ने अपने व्यक्तित्व में आ गई थी।
11 साल तक विनोद मेहरा परदे से रहें गायब
विनोद मेहरा ने बाल-कलाकार के रूप में कई फिल्मों में काम किया। उन्होंने फिल्म रागिनी में किशोर कुमार के बचपन का रोल निभाया था। इसके अलावा आई.एस.जौहर की फिल्म बेवकूफ और विजय भट्ट की फिल्म अंगुलिमाल में भी काम किया था।। लेकिन इसके बाद विनोद मेहरा ने फिल्मी परदे से दूरी बना ली। 11 साल तक वो फिल्मों से दूर रहे। इस दौरान उन्होंने एक कंपनी में मार्केटिंग एक्जिक्यूटिव के रूप में काम भी किया। अभिनय की दुनिया में वापिस लौटने का विनोद मेहरा का कोई विचार नहीं था। लेकिन एक दिन अचानक निर्माता शौरी ने उन्हें ‘गेलॉर्डस’ नामक एक रेस्टोरेंट में देखा और फिल्म जगत में उन्हें वापस लेकर आए और उन्हें अपनी फिल्म के लिए साइन किया। अगर विनोद मेहरा की निर्माता शौरी से मुलाकात नहीं होती तो शायद वो फिल्म जगत का बड़ा नाम नहीं होतें।
विनोद मेहरा ने 'एक थी रीता' से खेली दूसरी पारी
निर्माता शौरी की फिल्म 'एक थी रीता' से विनोद मेहरा ने दूसरी बार अभिनेता के रूप में अपनी पारी की शुरुआत की। यह फिल्म लोगों को कुछ खास पसंद नहीं आई। इस फिल्म में उनके साथ तनुजा मुख्य भूमिका में थी। हालांकि इस फिल्म का असर विनोद मेहरा के करियर पर नहीं पड़ा और उन्हें फिल्में मिलना जारी रहीं। उसी साल विनोद मेहरा ने लाल पत्थर फिल्म में काम किया। ये फिल्म तो हिट हुई लेकिन इस फिल्म ने विनोद मेहरा के करियर को टाइपकास्ट सा कर दिया था। उन्होंने सेकेंड लीड अभिनेता के रूप में इस फिल्म में काम किया। 'लाल पत्थर' में राजकुमार, हेमा मालिनी और राखी मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म के बाद उन्हें अधिकतर फिल्मों में सेकेंड लीड एक्टर की भूमिकाएं मिलने लगी। कहते हैं कि विनोद मेहरा के करियर को आगे बढ़ाने में अभिनेत्री मौसमी चटर्जी का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने ही विनोद मेहरा को टैलेंट सर्च प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए कहा था। फिल्म अनुराग में ये दोनों पहली बार साथ आए नजर आएं थें।
निर्देशक के रूप में 'गुरुदेव' को अधूरा ही छोड़ गए थे विनोद मेहरा
विनोद मेहरा ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन में भी अपना हाथ आजमाया। लेकिन शायद उस वक्त किसी को ये खबर नहीं थी बतौर निर्देशक विनोद मेहरा की ये पहली और आखिरी फिल्म है। कहा जाता है कि इस फिल्म ने ही विनोद मेहरा की जान ली। दरअसल इस फिल्म में विनोद मेहरा ने उस समय के सुपरस्टार्स ऋषि कपूर, अनिल कपूर, श्रीदेवी, कादर खान और डैनी डेन्जोंगपा को कास्ट किया था। निर्देशक होने के साथ-साथ विनोद मेहरा गुरुदेव के निर्माता भी थें। ऐसा कहा जाता है कि विनोद मेहरा के निधन के 3 साल बाद 1993 में रिलीज हुई ‘गुरुदेव’, दूसरे हार्ट अटैक का कारण बनी।

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