वीएफएक्स यानी सरल भाषा में वीडियो स्पेशल इफेक्ट्स बॉलीवुड का नया ट्रेंड है। हर बड़ी फिल्म में इसकी खास जगह बन गई है और इन दिनों यह खूब सुनने में आता है कि स्पेशल इफेक्ट्स के काम की वजह से फिल्म में देरी हो रही है। बाहुबली सीरीज की दोनों फिल्में ही संभव नहीं हो पातीं अगर वीएफएक्स न होते। इन फिल्मों ने भारतीय सिनेमा में इतिहास रच दिया। परंतु इधर तेजी से ऐसी फिल्मों की संख्या बढ़ी है, जिनमें इन इफेक्ट्स के बगैर काम बनता नहीं दिखता। दृश्यों को खूबसूरत, चमकदार और जादुई बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ये इफेक्ट्स पिछले दिनों ठग्स ऑफ हिंदुस्तान और 2.0 में देखे गए।
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Thugs Of Hindostan
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ठग्स भले ही कथानक के स्तर पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी परंतु इसके दृश्यों की भव्यता से किसी ने इंकार नहीं किया। इसी तरह रजनीकांत और अक्षय कुमार स्टारर 2.0 में हवा में उड़ते मोबाइल फोन और रोबोटों के बगैर कोई दृश्य नहीं रचा गया। हरेक फ्रेम को स्पेशल इफेक्ट्स से सजाया गया। पांच सौ करोड़ रुपये बजट की इस फिल्म में 100 करोड़ रुपये केवल वीएफएक्स पर खर्च कर दिए गए। वीएफएक्स के बढ़ते महत्व को यूं भी समझा जा सकता है कि आज फिल्मों में 20 फीसदी बजट ऐसे दृश्यों के लिए रखा जाता है जो कंप्यूटर पर गढ़े-रचे या सजाए-चमकाए जाते हैं।
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kedarnath
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पिछले हफ्ते रिलीज हुई सुशांत सिंह राजपूत, सारा अली खान स्टारर निर्देशक अभिषेक कपूर की केदारनाथ में जहां भीषण बाढ़ के दृश्यों को इसी तरह रचा गया, वहीं अगले हफ्ते आने वाली शाहरुख खान स्टारर जीरो में तो हीरो को कंप्यूटर से रचे चमत्कार से ही बौना दिखाया जा रहा है। जिस-जिस दृश्य में शाहरुख नजर आएंगे, वहां तय मानिए कि वीएफएक्स का इस्तेमाल हुआ। जनवरी 2019 में रिलीज होने वाली रानी लक्ष्मीबाई की बायोपिक मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी में युद्ध के तमाम दृश्यों को खूबसूरत बनाने के लिए कंप्यूटर, वीडियो तकनीक का ही इस्तेमाल हो रहा है।
वीएफएक्स के बढ़ते चलन से सिनेमा भले ही खूबसूरत दिखता हो परंतु कहीं-कहीं इसे कहानी से ज्यादा तवज्जो दी जाने लगी है। ऐसे में ठग्स ऑफ हिंदुस्तान के जैसे नतीजे का खतरा भी सामने दिख रहा है। वीएफएक्स अगर कहानी को सुंदर बनाता है तो उसके बेसिर-पैर होने का खतरे भी होता है।निर्माता-निर्देशक आनंद एल राय फिल्म जीरो में इस तकनीक की मदद से शाहरुख खान को बौना बनाकर पर्दे पर ला रहे हैं।
अमर उजाला से बात करते हुए आनंद एल राय ने बताया कि 'जीरो से पहले मैंने जो फिल्में बनाई तनु वेड्स मनु, रांझणा, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स वो सारी रियल लोकेशनों पर शूट की थीं। कानपुर, बनारस, लखनऊ, हरियाणा, लेकिन जीरो में वीएफएक्स मेरी जरूरत बन गए थे। मेरे आस-पास पहले भी यह तकनीक थी। परंतु अपनी फिल्म में मैंने इसका अलग ढंग से इस्तेमाल किया। मुझे लगा कि मैं वीएफएक्स को लाऊं और उसे इमोशन की तरह इस्तेमाल करूं। वीएफएक्स से लोगों को चौंकाने या चीजें बड़ी दिखाने के बजाय इसका उपयोग भावनाओं को जगाने के लिए करूं।'