हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बीते कुछ सालों में काफी बदलाव आया है। नाटकीय कहानियों की अपेक्षा अब असल जिंदगी से जुड़ी कहानियों पर जोर दिया जा रहा है। इसकी एक बड़ी वजह है अब दर्शकों की पसंद भी बदलती जा रही है। छोटे बजट की बगैर नाच गाने वाली फिल्में भी सिनेमाघरों में कमाल कर रही हैं। इसी तरह से हॉरर फिल्मों का दायरा भी पिछले कुछ समय में बढ़ा है। जल्द ही राजकुमार राव और जान्हवी कपूर हॉरर फिल्म लेकर आ रहे हैं। उससे पहले राजकुमार फिल्म स्त्री में दिखे थे। वहीं अक्षय कुमार की लक्ष्मी भी डरावनी फिल्मों की श्रेणी में आती है। विक्की कौशल की भूत और अनुष्का शर्मा की परी भी इसी लिस्ट में है।
हॉरर फिल्मों का लेखा जोखा, दमदार कहानी के बावजूद क्यों बड़े सितारे बनाकर रखते हैं दूरी?
हिंदी में कब से बन रहीं हॉरर फिल्में
डर के जरिए मनोरंजन का यह दौर मूक फिल्मों से चल रहा है। हालांकि उस वक्त लोग परिवार के साथ ऐसी फिल्में देखना नहीं पसंद करते थे ऐसे में जिन फिल्मों को हॉरर कहा जाता था, उनमें वह हॉरर तो नहीं बल्कि थ्रिलर फिल्में होती थीं। 1920 में जब मूक फिल्में बनती थी तब धार्मिक फिल्में ही हॉरर फिल्मों की गिनती में आती थीं जिनमें नकारात्मक किरदारों के जरिए डर पैदा होता था। 1917 में रिलीज हुई दादा साहेब फाल्के की फिल्म लंका दहन और 1924 में आई काला नाग नामक फिल्म को हॉरर फिल्मों की श्रेणी में रखा जा सकता है।
रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्में
हॉरर फिल्मों की बात हो और रामसे ब्रदर्स का जिक्र ना हो तो ऐसा कैसे हो सकता है। 70 के दशक में जब कई अभिनेता अपने एक्शन से नाम कमा रहे थे वहीं रामसे ब्रदर्स की भूतिया फिल्में दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पीछे नहीं थीं। उन्होंने दो गज जमीन के नीचे, दरवाजा, पुराना मंदिर, तहखाना, बंद दरवाजा, वीराना और पुरानी हवेली सहित कई डरावनी फिल्में बनाईं। उस दौर में लोग रामसे ब्रदर्स के नाम पर सिनेमाघरों मे जाते थे। फिल्म की कहानी उन्हें सीट से बांधे रखती थी।
जाहिर है एक वक्त के बाद दर्शक भी हॉरर से उबने वाले थे यह बात रामसे ब्रदर्स को समझ आ गई थी ऐसे में उन्होंने हॉरर फिल्मों में कामुकता को मिला दिया जो कि आने वाले कई सालों के लिए हिट देने का फॉर्मूला साबित हुआ। रामसे ब्रदर्स को देखकर बोहरा ब्रदर्स और अन्य निर्माताओं ने ऐसी फिल्में बनाईं तो जरूर लेकिन वह इस कदर सफल नहीं हो सके।
90 के दशक में हुआ बदलाव
इस दौर की फिल्में अपने मेलोडियस गानों के लिए जानी जाती हैं। सिनेमा में कई बदलाव देखने को मिले और हॉरर फिल्में बनना कम हो गई थीं। जो हॉरर फिल्में बनती भी थीं वह ब्री ग्रेड दर्जे की होती थीं। हालांकि कुछ एक अच्छे प्रयास भी देखने को मिले। 1992 में राम गोपाल वर्मा ने अभिनेत्री रेवती के साथ फिल्म रात बनाई। इसकी कहानी हॉरर के इर्द गिर्द रही और रामू अपनी कहानी से भटके नहीं। फिल्म रात को राम गोपाल वर्मा ने थ्रिलर के रूप में प्रचार किया और उनकी यह कोशिश कामयाब भी हुई।