यश चोपड़ा ने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा के अंदर रोमांस की एक नई परिभाषा को गढ़ा। वक्त के साथ उन्होंने दर्शकों की नब्ज को समझा और फिर एक के बाद एक ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जो बॉलीवुड के सुनहरे इतिहास में दर्ज होती चली गईं। 21 अक्तूबर 2012 को यश चोपड़ा का निधन हो गया था। उनकी पुण्यतिथि पर आपको बताते हैं उनकी बनाई कुछ बेहतरीन फिल्मों के बारे में।
यश चोपड़ा ने दिखाया रोमांस का नया अंदाज, इन 10 फिल्मों से जीता सबका दिल
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वक्त (1965)
60 के दशक में जब फिल्मों में अमूमन एक हीरो और एक हीरोइन होती थी। इस दौर में वो एक ऐसी फिल्म लेकर आए जिसमें एक, दो नहीं बल्कि कई सितारे थे। कहा जाता है कि 'वक्त' हिंदी सिनेमा की पहली मल्टी स्टारर फिल्म थी, जो लॉस्ट एंड फाउंड फॉर्मूले पर आधारित थी। ये फॉर्मूला कुछ ऐसा हिट हुआ कि अगले तीस सालों तक बॉलीवुड में ऐसी फिल्मों की भरमार हो गई।
'वक्त' की कामयाबी के बाद ऐसा नहीं हुआ कि यश चोपड़ा ने इसी तर्ज पर फिल्में बनानी शुरू कर दीं। 'इत्तेफाक' बिलकुल अलग तरह की फिल्म थी, जिसे बनाकर यश चोपड़ा ने दर्शकों को चौंका दिया था। ये फिल्म सिर्फ एक रात की कहानी थी, जिसमें एक भी गाना नहीं था।
दाग (1972)
ये फिल्म यशराज बैनर तले बनने वाली पहली फिल्म थी। इससे पहले यश चोपड़ा अपने बड़े भाई बी आर चोपड़ा के बैनर तले फिल्में निर्देशित करते थे। दाग, हालांकि अंग्रेजी फिल्म 'सनफ्लॉवर' से प्रेरित थी लेकिन उसे समकालीन बनाने के लिए उन्होंने इसकी कहानी को गुलशन नंदा से लिखवाया। समय से आगे की ये फिल्म थी, जिसमें एक शख्स की पत्नी गायब हो जाती है, तो वो बिना शादी किए एक दूसरी महिला के साथ रहने लगता है।
दीवार (1975)
ये फिल्म अमिताभ बच्चन के करियर को एक नए मुकाम पर ले गई। दो भाइयों की कहानी, एक कानून का रखवाला और दूसरा कानून का मुजरिम, इस कहानी को यश चोपड़ा ने बेहतरीन तरीके से परदे पर पेश किया। सलीम जावेद की स्क्रिप्ट और संवाद, जैसे- मेरे पास मां है, तो भारतीय सिनेमा के इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं।

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