फिल्म ‘कृष्णावतारम- पार्ट 1’ में सत्यभामा का किरदार निभाकर अभिनेत्री संस्कृति जयना इन दिनों चर्चा में हैं। यह संस्कृति का डेब्यू है, लेकिन पहली ही फिल्म में उन्हें इतना बड़ा पौराणिक किरदार निभाने का मौका मिला। खास बात यह है कि संस्कृति गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नातिन भी हैं।
Exclusive: ‘बड़ी जिम्मेदारी महसूस होती थी’, ‘कृष्णावतारम’ मिलने पर संस्कृति जयना को नहीं हुआ यकीन; बताया अनुभव
Sanskruti Jayana Exclusive Interview: फिल्म ‘कृष्णावतारम पार्ट 1’ से इंडस्ट्री में अपने कदम रखने वाली अभिनेत्री संस्कृति जयना ने अपने किरदार को लेकर बात की। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा…
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मुझे लग ही नहीं रहा था कि यह फिल्म सच में मुझे मिल गई है
संस्कृति बताती हैं कि जब उन्हें कृष्णावतारम ऑफर हुई, तब वह खुद इस बात पर भरोसा नहीं कर पा रही थीं। अभिनेत्री कहती हैं, ‘सच कहूं तो शुरुआत में मैं डिनायल में थी। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि हमारे जैसे न्यूकमर्स को इतनी बड़ी फिल्म मिल रही है। यह बहुत बड़ी फिल्म थी और उसके साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी थी। आज भी कई बार लगता है कि क्या यह सच में हुआ है?’
रिलीज करीब आई तो डर शुरू हो गया
फिल्म की रिलीज करीब आते ही बढ़ते डर को बयां करते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि जब हम शूट कर रहे थे, तब हम अपनी ही एक दुनिया में थे। हम पूरी तरह उस प्रोसेस में डूबे हुए थे। लेकिन जैसे ही फिल्म रिलीज के लिए तैयार हुई, असली घबराहट वहीं से शुरू हुई। हमने इस फिल्म में दिल और जान लगा दी थी। मेरे पेरेंट्स तक परेशान हो गए थे क्योंकि मैं सत्यभामा और भगवान कृष्ण की दुनिया में बहुत ज्यादा खो गई थी। बस यही उम्मीद थी कि हमारी मेहनत और भावनाएं लोगों तक पहुंचें।
लोग राधा और रुक्मिणी को जानते हैं, लेकिन सत्यभामा को नहीं
सत्यभामा के किरदार को लेकर को लेकर संस्कृति ने कहा कि मुझे लगता है सत्यभामा का प्यार हमेशा मेरे साथ रहेगा। आज भी जब मैं उनके बारे में बात करती हूं तो इमोशनल हो जाती हूं। लोग राधा और रुक्मिणी की कहानी जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग सत्यभामा के बारे में जानते हैं। इस फिल्म के जरिए पहली बार उनकी कहानी लोगों तक पहुंच रही है। इसलिए मुझे बहुत बड़ी जिम्मेदारी महसूस होती थी।
द्वारका जाकर किया ये काम
संस्कृति बताती हैं कि इस किरदार की तैयारी के दौरान वह द्वारका के सत्यभामा मंदिर भी गई थीं। उन्होंने बताया कि मैं द्वारका के सत्यभामा मंदिर गई थी और वहां मेरे मन में सिर्फ शुक्रिया था। मुझे याद है मैंने वहां लिखा था, ‘थैंक यू फॉर चूजिंग मी।’ सच में ऐसा लगता था जैसे मुझे इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।
मेरे परिवार ने कभी मुझे रोका नहीं
एक बड़े राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद संस्कृति पर कभी परिवार ने कोई बंदिशें नहीं लगाईं। एक्ट्रेस ने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो मेरे परिवार ने हमेशा मुझे बहुत आजादी दी। मैंने बहुत छोटी उम्र से अपने दम पर काम करना शुरू कर दिया था।
करीब 16 साल की उम्र में मैंने बिजनेस भी शुरू किए थे। उन्होंने कभी मुझे मेरे सपनों को पूरा करने से नहीं रोका। हां, एक जिम्मेदारी जरूर महसूस होती है। प्रेशर नहीं है, लेकिन यह जरूर लगता है कि आपको समाज और संस्कृति के लिए कुछ अच्छा करना चाहिए।
समाज में बदलाव लाने के सवाल पर संस्कृति ने एनिमल वेलफेयर की बात की। वह कहती हैं, ‘मैं जानवरों को लेकर बहुत ज्यादा महसूस करती हूं। मुझे लगता है कि हमारे देश में जानवरों की सुरक्षा से जुड़े कानून और मजबूत होने चाहिए।
लेकिन मैं हमेशा खुद से शुरुआत करने में विश्वास रखती हूं। अभी मैं अपनी जिंदगी के उस दौर में हूं जहां खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हूं और जितना कर सकती हूं, उतना करने की कोशिश कर रही हूं।’