एक बहुत नामचीन अभिनेत्री का चार दिन पहले फोन आया और फोन उठाते ही सवाल था, ‘ये अभिषेक मिश्रा को आप जानते हैं?’ उनके पास जो पत्र आया था उसके मुताबिक अभिषेक मिश्रा ने खुद को भारत सरकार के खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्रालय और उपभोक्ता मामले मंत्रालय की सलाहकार समितियों का सदस्य बताया था, और अपना पता मुंबई के उपनगर मलाड के एक वीवर्क दफ्तर का दिया। इस पत्र में पुरस्कार की सूचना थी। दादा साहब फाल्के के नाम पर पूरे देश में एक ही पुरस्कार है, जिसे हर साल भारत सरकार भारतीय सिनेमा में अपना अमिट योगदान देने वाली किसी शख्सियत को देती है, बीते साल ये पुरस्कार अभिनेत्री वहीदा रहमान को मिला। अब जरा गूगल पर dada saheb Phalke awards 2024 सर्च करके देखिए। बड़े बड़े मीडिया घरानों से लेकर तमाम नामचीन शख्सियतें सब यही हैशटैग लिखकर बीती रात यहां मुंबई में जुटे तमाशे की तस्वीरों और पुरस्कारों से सोशल मीडिया रंग चुके हैं।
DPIFF Awards 2024: ये दादा साहेब फाल्के अवार्ड्स नहीं हैं, सुनते ही भड़क गए पुरस्कार लेने के इच्छुक निर्माता
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मुंबई में बीती रात रेवड़ियों की तरह बंटे दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (डीपीआईएफएफ) अवार्ड्स 2024 में शाहरुख खान से लेकर करीना कपूर, रानी मुखर्जी और तमाम दूसरे सितारे भर भरकर पहुंचे। जिन अभिनेत्री का चार दिन पहले फोन आया था, उन्होंने अपनी कंपनी के भागीदार को इस पुरस्कार के लिए न जाने की बात ये कहते हुए समझा दी थी, कि ये दादा साहब फाल्के पुरस्कार नहीं है। ये डीपीआईएफएफ पुरस्कार हैं और वह इसमें जाना उचित नहीं समझतीं। लेकिन मंगलवार की रात जब पुरस्कारों के लिए इस आयोजन में सितारों की लाइन लगी तो हीरोइन और उनके जोड़ीदार इस बात पर लड़ बैठे कि अगर शाहरुख खान ये पुरस्कार लेने पहुंच गए हैं तो फिर ये दादा साहब फाल्के पुरस्कार कैसे नहीं हैं?
खैर, दोनों के झगड़े का हासिल जो भी हो लेकिन पूरी एक पीढ़ी इस बात से लगातार भ्रमित हो रही है कि आखिर हर साल इन पुरस्कारों को लेकर dada saheb Phalke awards 2024 जैसे कीवर्ड्स, हैशटैग और दूसरे डिजिटल टूल्स कौन ईजाद कर रहा है। बताते हैं कि इन पुरस्कारों को दादा साहब फाल्के अवार्ड्स के नाम पर ही प्रचारित करने के लिए बाकायदा एक टूल किट तैयार की जाती है और सोशल मीडिया की एक नामी डिजिटल कंपनी इसे इन्हीं नाम से प्रचारित करने और सोशल मीडिया पर वायरल करने का मोटी रकम में ठेका भी लेती है। आईटी एक्ट के जानकार बताते हैं कि ये छद्म नामकरण के मामले में अपराध बनता है।
अब लौटकर आते हैं अभिषेक मिश्रा की कार्यप्रणाली की तरफ। अभिषेक मिश्रा ने डीपीआईएफएफ पुरस्कारों के लिए जो पत्र फिल्मी सितारों को भेजे हैं, उनमें सबसे पहले यही लिखा होता है कि हमारी जूरी ने आपको इस पुरस्कारों के लिए चयनित किया है। लेकिन जूरी के पास न तो किसी भी पुरस्कार के संभावितों या नामांकन की कोई सूची होने की जानकारी इस समारोह के आयोजकों ने सार्वजनिक की और न ही कभी अपनी जूरी में शामिल लोगों के नाम ही उजागर किए। इस साल के आयोजन को लेकर हुई प्रेस कांफ्रेंस में पूछे जाने पर भी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई थी।
डीपीआईएफएफ पुरस्कार 2024 लेने वाली एक नामचीन शख्सियत बताती हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय का कोई पत्र भी इस समारोह के आयोजकों के पास है और उस पत्र से लोगों को ये भ्रम भी होता है कि ये पुरस्कार सरकारी, अर्धसरकारी या सरकारी मान्यता प्राप्त हैं। केंद्र सरकार के पास दादा साहब फाल्के पुरस्कार से मिलते जुलते पुरस्कारों पर रोक लगाने की बाबत अनुरोध पहले भी पहुंचते रहे हैं, लेकिन चूंकि अब तक ये पुरस्कार रुके नहीं हैं, लिहाजा अब मुंबई में पद्मश्री पुरस्कारों और कान फिल्म फेस्टिवल से मिलते जुलते पुरस्कारों के आयोजन भी शुरू हो चुके हैं। और, दिलचस्प बात ये है कि इन पुरस्कारों में शाहरुख खान जैसी शख्सियतें भी किसी के भी हाथों पुरस्कार ले रही हैं।
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