'मिशन इंपॉसिबल' फिल्म सीरीज की कल्पना टॉम क्रूज के बिना संभव नहीं है। फिल्म के छठे हिस्से यानि 'मिशन इंपॉसिबल फॉलआउट' में तो उन्होंने ऐसे रोंगटे खड़े कर देने वाले स्टंट्स किए हैं जो उन्होंने पहले कभी नहीं किए। फिल्म के एक सीक्वेंस में वह खुद हेलीकॉप्टर उड़ाते और उसमें सवार होकर स्टंट करते भी दिखेंगे।
टॉम क्रूज, जिसे अमेरिकी सेना कर चुकी है हथियार के रूप में यूज, 'सीक्रेट मिशन' का रह चुके हैं हिस्सा
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फिल्म 'टॉप गन' 1983 में कैलिफोर्निया की एक पत्रिका में इसी नाम से छपे एक लेख पर आधारित है। यह लेख अमेरिकी नौसेना के ट्रेनिंग प्रोग्राम 'स्ट्राइक फाइटर टैक्टिस इंस्ट्रक्टर प्रोग्राम' (SFTI) के बारे में था। एसएफटीआई को टॉप गन भी कहा जाता है। इस कार्यक्रम के तहत नौसेना से जुड़े पायलट्स को फाइटर जेट उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है।
कहा जाता है कि युवाओं के बीच नौसेना से जुड़ने, फाइटर प्लेन उड़ाने को लेकर क्रेज पैदा करने के मकसद से ही अमेरिकी सरकार और फिल्म के निर्माताओं के बीच एक 'डील' हुई थी। इस बात का दावा फिल्म की तमाम समीक्षाओं में भी किया गया।
ऐसे पूरा हुआ सेना का मिशन
फिल्म में टॉम क्रूज ने नेवल फाइटर पीट मेवरिक मिशेल का किरदार निभाया था। फिल्म में वह फाइटर जेट एफ-14 ए टॉमकैट उड़ाते देखे जा सकते हैं। हवा में जेट से किए गए उनके हैरतअंगेज करतब देख उस वक्त युवा इतने प्रभावित हुए, उनके अंदर देश प्रेम का जज्बा ऐसा जगा कि देखते ही देखते अमेरिकी सेना में सैनिकों की तादाद सालभर में 20,000 ज्यादा बढ़ गई। इनमें से सबसे ज्यादा भर्तियां, करीब 16,000 नौसेना में हुईं। इस बात की जानकारी अमेरिकी नौसेना की पत्रिका 'प्रोसीडिंग्स' में दी गई थी।
उस वक्त टॉम क्रूज की फिल्म 'टॉप गन' देखकर लोगों के बीच सेना में भर्ती होने की ऐसी सनक जगी कि उनकी भर्ती के लिए सिनेमा हॉल के बाहर काउंटर तक खोले गए। टाइम पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म 'टॉप गन' की सफलता को भुनाने के लिए नौसेना ने बड़े सिनेमाघरों में रिक्रूटमेंट बूथ तक स्थापित कर दिए। उस साल सेना के पास सबसे ज्यादा आवेदन आए। एक रिपोर्ट के मुताबिक उस दौरान नेवल एविएटर्स की तादाद में करीब 500 फीसदी का इजाफा हुआ था।
इस लिहाज से टॉम क्रूज ने अमेरिकी सेना की ताकत 500 फीसदी तक बढ़ाने में अहम योगदान दिया!
फिल्म 'टॉप गन' में असली फाइटर जेट का इस्तेमाल किया गया था। नैसेना के एयर स्टेशन, असली एयरक्राफ्ट कैरियर, प्लेन और असली पायलट्स का इस्तेमाल किया गया था। इन सबके बदले फिल्म के निर्माताओं ने सेना को 1.8 मिलियन डॉलर चुकाए। औसतन हर घंटे के हिसाब से मेकर्स ने करीब पांच लाख रुपये दिए।