मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक इम्तियाज अली आज 16 जून को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इम्तियाज अली को 'जब वी मेट', 'लव आजकल', 'हाइवे', 'रॉकस्टार' जैसी शानदार फिल्मों के लिए जाना जाता है। अब इसमें इस साल रिलीज हुई और उनके निर्देशन में बनी 'अमर सिंह चमकीला' भी जुड़ चुकी है। इम्तियाज अली हीरो बनने का ख्वाब लेकर इंडस्ट्री में आए थे। लेकिन, उनका जादू बतौर निर्देशक दर्शकों पर ज्यादा चला है। आइए जानते हैं उनके बारे में...
Imtiaz Ali Birthday: अभिनेता बनने का सपना लेकर बॉलीवुड आए थे इम्तियाज अली, निर्देशन में चल पड़ा जादू
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इम्तियाज अली की जिंदगी भी कुछ-कुछ फिल्मी है। वे बिहार के दरभंगा से ताल्लुक रखते हैं, जिन्होंने वाया दिल्ली अपने लिए मुंबई में मुकाम बनाया। इनकी जिंदगी का काफी हिस्सा जमशेदपुर में बीता है और आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसकी दिशा भी वहीं से तय हुई। इम्तियाज अली का जन्म 16 जून 1971 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ। इन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट जेवियर्स से की। फिर आगे की पढ़ाई के लिए यह जमशेदपुर आ गए। यहां इम्तियाज अपनी चाची के पास रहते थे। घर के पास में ही थिएटर था, जहां वह अक्सर फिल्में देखने जाते। यहीं से सिनेमा और थिएटर में उनकी दिलचस्पी बढ़ी।
जमशेदपुर में रहते हुए ही इम्तियाज खुद भी थिएटर करने लगे और बचे वक्त में स्क्रिप्ट लिखने लगे। फिर आगे की पढ़ाई के लिए वह दिल्ली चले आए और दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की। यहां वह थिएटर में भी हिस्सा लेते थे। इसके बाद आगे का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया। मुंबई में रहकर इम्तियाज ने जेवियर्स इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन में डिप्लोमा कोर्स किया। इम्तियाज अली ने निर्देशन की शुरुआत टीवी से की। उन्होंने जीटीवी के शो 'कुरुक्षेत्र' और दूरदर्शन के शो 'महाभारत' का निर्देशन किया।
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टीवी के बाद उन्होंने फिल्मों का रुख किया। वर्ष 2005 में बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म 'सोचा न था' सिल्वर स्क्रीन पर रिलीज हुई। इस फिल्म में अभय देओल और आयशा टाकिया मुख्य किरदार में नजर आए। एक बातचीत में उन्होंने बताया कि इसे बनाने में चार साल का समय लगा था। हालांकि, फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाई थी। मगर इसे बनाते हुए उन्होंने फिल्म बनाने की कई बारीकियां सीखीं। इसके बाद साल 2006 में आई इम्तियाज की अगली फिल्म 'आहिस्ता आहिस्ता' को भी खास प्रतिक्रिया नहीं मिली। लेकिन 2007 में आई 'जब वी मेट' ने इम्तियाज अली की किस्मत बदल दी। कई सालों के संघर्ष के बाद इस फिल्म ने उन्हें सफल निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई, जिसके बाद इम्तियाज अली की गाड़ी चल पड़ी। फिर उन्होंने 'रॉकस्टार','हैरी मेट सेजल', 'हाइवे' और 'लव आज कल' जैसी फिल्में बनाईं।
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इम्तियाज अली बॉलीवुड इंडस्ट्री में अभिनेता बनने का सपना लेकर आए थे, मगर वह अधूरा रह गया। हालांकि, अनुराग कश्यप की फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' में इन्होंने याकूब मेनन का किरदार किया था, लेकिन एक्टिंग पर उनकी पकड़ नहीं जमी। बतौर निर्देशक इन्हें अच्छी पहचान मिली है। निर्देशन के बाद इम्तियाज ने अपना प्रोडक्शन हाउस खोला, जिसका नाम विंडो सीट फिल्म्स है। इसकी पहली फिल्म 'हाइवे' थी, जिसमें आलिया भट्ट और रणदीप हुड्डा मुख्य भूमिका में नजर आए। कई जबरदस्त फिल्में देने वाले निर्देशक इम्तियाज अली ओटीटी की दुनिया में सक्रिय हैं। मगर ओटीटी पर वे जिस तरह का कंटेंट लेकर आए उस पर कई सवाल भी उठे। खासकर 'शी' जैसी सीरीज पर कम ही पसंद आई। इस साल उनके निर्देशन में बनी फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' आई। इसकी तारीफ तो खूब हुई, लेकिन कंट्रोवर्सी भी बराबर रही।
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