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Bioscope S2: शैलेंद्र सिंह ने बताए ‘बॉबी’ के अनसुने किस्से, राज कपूर की कंगाली ने बनाया ऋषि को हीरो

Tue, 28 Sep 2021 03:00 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 28 Sep 2021 03:00 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Bobby Raj Kapoor Rishi Kapoor Dimple Kapadia Shailendra Singh
बॉबी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘बॉबी’ 28 सितंबर 1973 को रिलीज हुई। ये वह दौर था जब सलीम जावेद ने हिंदी सिनेमा में राजेश खन्ना की रूमानी ट्रेंड वाली फिल्मों के दौर में एंग्री यंगमैन को शोहरत दिलाई। सलीम जावेद और राजेश खन्ना की अदावत के किस्से पुराने हैं। ‘बाइस्कोप’ में इन्हें मैं पहले भी साझा कर चुका हूं। लेकिन, क्या आपको पता है कि अगर राज कपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ न फ्लॉप हुई होती और राज कपूर करीब करीब कंगाल न हो गए होते तो फिल्म ‘बॉबी’ के हीरो राजेश खन्ना ही होते। राज कपूक के पास इतना पैसा नहीं था कि वह राजेश खन्ना को उनकी उस समय की फीस दे पाते। लिहाजा तय हुआ कि हीरो ऐसा लिया जाए जो कम से कम पैसे में आ जाए। और इस तरह राज कपूर की नजर पड़ी अपने ही बेटे ऋषि कपूर पर। ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की बतौर लीड कलाकार डेब्यू फिल्म ‘बॉबी’ ने ही एंग्री यंगमैन के दौर में रूमानी सिनेमा का परचम लहराए रखा।

Bioscope with Pankaj Shukla Bobby Raj Kapoor Rishi Kapoor Dimple Kapadia Shailendra Singh
बॉबी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

शैलेंद्र सिंह की भी डेब्यू फिल्म
फिल्म ‘बॉबी’ से सिर्फ इसके हीरो और हीरोइन ही नहीं बल्कि साथ ही लॉन्च हुए नए सिंगर शैलेंद्र सिंह। पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में एक्टिंग की पढ़ाई करते करते वह फिल्म ‘बॉबी’ में ऋषि कपूर की आवाज बन गए थे। उनको खुद इस बात का एहसास नहीं था कि उनके साथ क्या हो रहा है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने उनका ऑडीशन लिया तो गाना उन्होंने सुनाया था आर डी बर्मन का संगीतबद्ध अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ का गाना, ‘देखा ना हाय रे सोचा ना हाय रे, रख दी निशाने पे जां....।’ राज कपूर ने आवाज सुनी तो मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश सब एक तरफ और शैलेंद्र सिंह की आवाज एक तरफ। शैलेंद्र सिंह और ऋषि कपूर की पहली मुलाकात फिल्म के गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान ही हुई। शैलेंद्र सिंह बताते हैं, ‘मैं उस दिन ‘मैं शायर तो नहीं’ रिकॉर्ड कर रह था और वहां एक गोरा चिट्टा सा लड़का खड़ा होकर मेरी रिकॉर्डिंग ध्यान से सुन रहा था। गाना खत्म हुआ। मैं बाहर निकला तो उसने हाथ आगे करते हुए कहा। मेरा नाम ऋषि कपूर है और मैं इस फिल्म का हीरो हूं।’

Bioscope with Pankaj Shukla Bobby Raj Kapoor Rishi Kapoor Dimple Kapadia Shailendra Singh
बॉबी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ऋषि कपूर ने ऐसे ‘जीता’ बेस्ट एक्टर अवार्ड
लेकिन, शैलेंद्र सिंह अपनी पहली फिल्म ‘बॉबी’ या ऋषि कपूर का जिक्र चलने पर वैसे ही बहुत खुश नहीं होते हैं, जैसे अमिताभ बच्चन का जिक्र चलने पर ऋषि कपूर को अकेले में बहुत उत्साहित होते कम ही देखा गया। ऋषि कपूर मानते थे कि जितनी भी फिल्में अमिताभ बच्चन ने विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर या उनके साथ की हैं, सब में फिल्म की कामयाबी के हकदार ये सितारे भी रहे लेकिन अपनी फिल्मों की कामयाबी में अमिताभ बच्चन ने कभी इनको श्रेय नहीं दिया। जिस साल ऋषि कपूर ने अपने खुद के इकबालिया बयान के अनुससार फिल्म ‘बॉबी’ के लिए 30 हजार रुपये देकर अपने लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार खरीदा, उसी साल अमिताभ बच्चन को ‘नमक हराम’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर पुरस्कार मिला था। जो भाव ऋषि कपूर का अमिताभ के लिए रहा, वही ख्याल शैलेंद्र सिंह का ऋषि कपूर को लेकर रहा है। वह कहते भी हैं, ‘मेरे साथ वही हुआ जो हर बाहरी शख्स के साथ यहां होता आया है। मेरा करियर खराब इसीलिए हुआ क्योंकि मेरा कोई गॉडफादर नहीं था। मेरे लिए तैयार हुए गाने ऐन मौके पर किसी दूसरे गायक के पास चले जाते थे। ऋषि कपूर के करियर का चर्चित गाना ‘ओ हंसिनी..’ तैयार मैंने किया, फिल्म में ये आया किशोर कुमार की आवाज में। रमेश सिप्पी की फिल्म ‘सागर’ के सारे गाने मुझसे गवाने की बात तय हुई थी लेकिन फिल्म के मुहूर्त में तो मेरा जो गाना ‘पास आओ ना..’ बजा तो वही फिल्म में मेरा इकलौता गाना बन गया।’ यहां गौरतलब ये भी कि फिल्म ‘बॉबी’ के लिए शैलेंद्र सिंह का गाना ‘मैं शायर तो नहीं..’ फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामित तो हुआ लेकिन ये पुरस्कार दिया गया नरेंद्र चंचल को इस फिल्म के गाने, ‘बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो...’ के लिए।

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Bioscope with Pankaj Shukla Bobby Raj Kapoor Rishi Kapoor Dimple Kapadia Shailendra Singh
बॉबी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

शैलेंद्र सिंह के निधन की उड़ गई अफवाह
शैलेंद्र सिंह की आवाज ने हिंदी सिनेमा में जो करिश्मा ‘बॉबी’ फिल्म में ऋषि कपूर के लिए, वही करिश्मा उनकी आवाज ने आगे चलकर मिथुन चक्रवर्ती के लिए ‘तराना’ जैसी फिल्मों में किया। शैलेंद्र के बारे में 20 साल पहले तक तो लोगों को पता भी नहीं था कि वे हैं कहां? तमाम संगीतकारों से उनके बारे में नए निर्माताओं और निर्देशकों ने पूछा भी लेकिन फिल्म इंडस्ट्री की बहुत ही गहराई से आपस में जुड़ी वादक बिरादरी में किसी ने ये खबर फैला दी कि वह तो दुनिया में ही नहीं हैं। ये किस्सा तब खुला जब मैं और मिथुन चक्रवर्ती उनके बंगले पर बैठकर शैलेंद्र सिंह के बारे में बातें कर रहे थे। मिथुन पर फिल्म ‘भोले शंकर’ एक गाना फिल्माया जाना था। फिल्म मैं निर्देशित कर रहा था तो मैंने कहा कि क्यों न ये गाना शैलेंद्र सिंह से गवाया जाए। मिथुन तुरंत तैयार हो गए। फिर शैलेंद्र सिंह को खोजना किसी मिशन से कम नहीं था। करीब दो हफ्ते तक यहां वहां से पूछते पूछते मैंने शैलेंद्र सिंह को खोज निकाला। फोन पर मिथुन से उनकी बात कराई। दोनों बहुत खुश हुए। शैलेंद्र सिंह तब तक गाने से तौबा कर चुके थे, लेकिन कुछ मेरी मनुहार और कुछ मिथुन के लिए गाने का उनका आकर्षण, दोनों काम कर ही गए। वह कहते भी हैं, ‘ऋषि कपूर और मिथुन के लिए गाए मेरे गानों को सबसे ज्यादा तारीफ भी मिली है।’ फिल्म ‘भोले शंकर’ में शैलेंद्र सिंह का मिथुन के लिए गाया गाना उनके करियर का अब तक का आखिरी गाना भी है।

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Bioscope with Pankaj Shukla Bobby Raj Kapoor Rishi Kapoor Dimple Kapadia Shailendra Singh
bobby - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ऐन मौके पर बदला गया ‘बॉबी’ का क्लाइमेक्स
फिल्म ‘बॉबी’ का संगीत इस फिल्म का पहला बड़ा सितारा है। ऋषि कपूर और बॉबी इसके बाद में हैं। ऋषि कपूर तो आखिर तक यही कहते रहे कि बॉबी उनके लिए बनाई गई फिल्म ही नहीं है। ये तो उनके पिता राज कपूर के पास राजेश खन्ना को देने के लिए पैसे नहीं थे, तो वह सीन में आ गए। राज कपूर और ऋषि कपूर के रिश्ते वैसे ही रहे जैसे बाद में ऋषि कपूर और रणबीर कपूर के रहे। ‘बॉबी’ की कहानी वही अमीरी और गरीबी के प्रेम के रास्ते में आ जाने की कहानी है। प्रेम की ताकत के समाज और कानून से भिड़ जाने की इस कहानी का पहले जो क्लाइमेक्स राज कपूर ने रचा था, उसके हिसाब से हीरो और हीरोइन दोनों आखिर में डूबकर मर जाते हैं। लेकिन, फिल्म के वितरकों ने इस पर हंगामा किया तो राज कपूर को भी समझ आया कि कहीं ऐसा न हो कि ये फिल्म एक और ‘मेरा नाम जोकर’ बन जाए। इसके बाद फिल्म का क्लाइमेक्स बदला गया। ख्वाजा अहमद अब्बास की राज कपूर के लिए लिखी कहानियों में ये सातवीं फिल्म रही। ‘बॉबी’ से पहले ख्वाजा अहमद अब्बास ने राज कपूर के लिए ‘मेरा नाम जोकर’, ‘चार दिल चार राहें’, ‘जागते रहो’, ‘श्री 420’,  ‘अनहोनी’ और ‘आवारा’ थीं। ‘मेरा नाम जोकर’ के सुपरफ्लॉप होने के बाद भी राज कपूर ने उनसे ही अपने प्रोडक्शन हाउस की अगली फिल्म ‘बॉबी’ लिखवाई।

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