आज के बाइस्कोप की शुरुआत करते हैं आज ही के दिन 16 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘धूम’ के दो रिव्यूज से। तब इंडिया एफएम के लिए फिल्म रिव्यू करने वाले तरण आदर्श ने फिल्म को डेढ़ स्टार दिया और लिखा, “धूम में स्टाइल तो है लेकिन सत्व (substance) नहीं है। धूम में चमक है लेकिन पटकथा नहीं है। धूम में रोमांच तो भर भरके है लेकिन इसका नतीजा रोमांचित नहीं करता। संक्षेप में कहें तो यशराज की सबसे कमजोर फिल्मों में से है धूम।” लेकिन, फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। देश की ये पहली बाइकर फिल्म बनी। विदेशी बाइक्स का देश में नया बाजार खुला और उस समय के टीन एजर्स ने फिल्म जी भर भरकर देखी। तब इंडिया टुडे के लिए फिल्म समीक्षाएं करने वाली अनुपमा चोपड़ा लिखती हैं, ‘धूम किशोरवय की आसमानी रफ्तार वाली बाइक्स, हॉट बेब्स, बिना किसी मतलब का टनों के भाव तौला सा सकने वाला खतरनाक एक्शन है। फिल्म में रबर जलातीं चमकदार बाइक्स के तमाम ट्रेंडी स्प्लिट स्क्रीन शॉट्स हैं और साथ ही तमाम तेज रफ्तार स्टंट्स जिनमें नावें और ट्रक भी शामिल हैं। पानी के पाइप के साथ दिखने वाले सेक्सी गाने नहीं भूले जा सकते। अभिनय यहां प्राथमिकता नहीं है। अदाकारी यहां विशुद्ध मुद्राएं हैं।’
बाइस्कोप: जब जॉन की हेयरस्टाइल का जमाना हुआ दीवाना और अभिषेक ने रिमी सेन के साथ की ‘डर्टी डांसिंग’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जॉन अब्राहम के फैन हुए धोनी
ये किस्से यहां इसलिए कि इस फिल्म के तीन हीरो में से एक अभिषेक बच्चन के करियर ने फिल्म ‘धूम’ से ही रफ्तार पकड़ी। निर्देशक संजय गढवी की इस फिल्म ने ही जॉन अब्राहम को ऐसे यूथ आइकन के तौर पर पेश किया जिसने आगे चलकर देश के सबसे बड़े ब्रांड बने महेंद्र सिंह धोनी तक को प्रभावित किया। धोनी ने अपने करियर की शुरुआत में जो लंबे बाल रखे, वे जॉन अब्राहम की इसी फिल्म की हेयर स्टाइल से प्रभावित रहे। धोनी को बाइक्स का शौक भी यहीं से लगा औऱ सिर्फ धोनी ही नहीं पूरे देश में विदेशी बाइक्स की एक लहर सी इस फिल्म ने चला दी। वैसे कम लोग ही जानते होंगे कि फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा तो इसे एक कार चेसिंग फिल्म ही बनाना चाहते थे, फिल्म को बाइक्स के आसपास रखने का आइडिया संजय गढवी का था जो खुद बाइक्स के दीवाने रहे हैं। संजय का ये दांव काम आया और इसके पीछे बड़ी वजह रही बाइक्स के लिए भारतीय शहरों की सड़कों पर अब भी थोड़ी बहुत जगह निकल आना।
पढ़ें: बाइस्कोप: मोहम्मद रफी को इस फिल्म के लिए मिला इकलौता नेशनल अवार्ड, ऋषि और जीनत की फिर नहीं बनी जोड़ी
बाइक्स का बना दिया बाजार
फिल्म ‘धूम’ को हिंदी सिनेमा में कल्ट सिनेमा का दर्जा मिल चुका है। ये एक ट्रेंडसेटर फिल्म रही जिसने भारतीय सिनेमा में तेज रफ्तार बाइक्स को कहानियों में चतुराई से शामिल किया और एक पूरी पीढ़ी के रहन सहन को प्रभावित करने में सफल रही। साठ किमी प्रति घंटे की रफ्तार को भी ओवरस्पीड मानने वाली भारतीय पुलिस के सामने जल्द सौ-डेढ़ सौ किमी की रफ्तार से भागने वाली मोटरसाइकिलें दिखने लगीं। हां, अलग अलग मौकों पर रात में देश भर के शहरों में बाइकर्स के हुड़दंग की खबरें भी इसी फिल्म के बाद आनी शुरू हुईं। मुंबई का वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे ऐसे बाइकर्स का खेलगाह बना और बाइक पर स्टंट करने वाले तमाम युवाओं की मौतें भी हुईं।
पढ़ें: बाइस्कोप: अमिताभ को इस फिल्म में लगा शत्रुघ्न सिन्हा की शोहरत से डर, लता मंगेशकर को देनी पड़ी धमकी
अभिषेक को मिला जीवनदान
फिल्म में जय दीक्षित का रोल करन वाले अभिषेक बच्चन के लिए फिल्म ‘धूम’ मुंहमांगी मुराद बनकर आई। अभिषेक इस फिल्म को कुछ इस तरह याद करते हैं, ‘एक फिल्म जिसने सबकुछ बदल दिया। खासतौर से मेरे लिए। आदि (आदित्य चोपड़ा) और संजय गढवी ने जय दीक्षित के किरदार को लेकर मुझ पर जो भरोसा किया, उसके लिए मैं कभी चाहकर भी इन दोनों से उऋण नहीं हो पाऊंगा। इनका भरोसा, इनका विश्वास और समर्थन मेरे तब काम आया, जब मुझे अपने करियर में इनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। जॉन अब्राहम, उदय चोपड़ा, एशा देओल और रिमी सेन के साथ फिल्म की मेकिंग के दौरान हमने जो यादें संजोईं और जो दोस्ती बनाई, वह आज तक कायम है और जीवन भर रहेगी। अलान अमीन, अनाइता श्रॉफ, मयूर पुरी, नीरव और वैभवी मर्चेंट ने हमारे लुक्स, हमारे अंदाज और हमारी चाल पर मेहनत की और हमें परदे पर आकर्षक तरीके से पेश किया। और, साथ ही शुक्रिया उन सभी दर्शकों का जिन्होंने हमें स्वीकार किया और इतना सारा प्यार दिया।’ अभिषेक और रिमी सेन के बेहद इंटीमेट सीन्स संजय ने इस फिल्म के लिए फिल्माए थे। फिल्म का ये गाना अपने समय का चर्चित गाना रहा। गाने में इस्तेमाल किए गए शब्द, शिकदूम का मतलब होता है, डर्टी डांसिंग।
पढ़ें: संडे बाइस्कोप: इन फिल्मों से समझिए जीवन का असली फलसफा, हैपी एंडिंग के लिए मेहनत पर भरोसा जरूरी
संजय गढवी ने मनाई सालगिरह
फिल्म ‘धूम’ की मेकिंग की सबकी अपनी अपनी यादे हैं। संजय गढवी ने फिल्म की रिलीज हे 16 साल पूरे होने पर इसे इस तरह याद किया, ’16 साल पहले 26 अगस्त के दिन मैं रोमांचित भी था। नर्वस भी था और भरोसे से भरा हुआ भी था। और फिर अगले दिन धूम रिली हुई। इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है।’ ‘धूम’ हिंदी सिनेमा की सफलतम फ्रेंचाइजी में से एक है। ‘धूम 2’ को भी संजय गढवी ने ही निर्देशित किया जबकि ‘धूम 3’ का निर्देशन आदित्य चोपड़ा ने इस सीरीज के लेखक रहे विजय कृष्ण आचार्य उर्फ विक्टर को सौंपा। इस सीरीज में जहां कहानी के मुख्य पात्र अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा ही करते रहे हैं, हर फिल्म को शोहरत इसके विलेन की वजह से खासतौर से मिली। पहली ‘धूम’ में विलेन जॉन अब्राहम थे, दूसरी में ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय, ‘धूम 3’ में ये काम आमिर खान ने किया वह भी डबल रोल में। सीरीज के लेखक विक्टर इस दिन को याद करते हुए कहते हैं, “मुझे लगता है कि सभी फिल्में पहले रचनात्मक उद्यम होती हैं और कारोबार इसका एक बाइप्रोडक्ट है। लेकिन मेरा मानना है कि ‘धूम’ को मिले रिस्पॉन्स से हम सभी को सुखद आश्चर्य हुआ था।“
पढ़ें: बाइस्कोप: मलाइका अरोड़ा आज भी नहीं भूलीं कमर में बंधी रस्सी के ये निशान, गाने की ऐसे की थी शूटिंग