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Movie Review: ‘तू है मेरा संडे’, इसे कहते हैं छोटा पैकेट बड़ा धमाका

रवि बुले Updated Fri, 06 Oct 2017 11:23 AM IST
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film review of varun sobti film tu hai mera sunday
बरुण सोबती
-निर्माताः वरुण शाह

-निर्देशकः मिलिंद दहीमाडे
-सितारेः बरुण सोबती, शाहना गोस्वामी, विशाल मल्होत्रा, रसिका दुग्गल
रेटिंग ***1/2

इसे कह सकते हैं छोटा पैकेट बड़ा धमाका। पहली बार फिल्म डायरेक्ट करने वाले मिलिंद दहीमाडे ने मुंबई के मध्य और उच्च मध्यवर्ग की नब्ज को बड़ी सादगी से पकड़ा है। उनकी फिल्म अलग-अलग किरदारों की कहानियां होते हुए भी माला में पिरोए मोतियों सरीखी है। तू है मेरा संडे विशुद्ध मुंबइया फिल्म है, जो बिना ओवर ऐक्टिंग या हाई वोल्जेट ड्रामा के यहां की जिंदगी और लोगों की तस्वीर सामने लाती है। इस भीड़ में सब एक-दूसरे को धक्का देते, धक्के खाते बढ़ रहे हैं।
 
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बरुण सोबती

इन्हीं में कुछ ऐसे हैं जिन्हें अपने लिए छोटी-सी जगह चाहिए। फुटबॉल के मैदान जितनी! जहां वे कम से कम रविवार को कुछ घंटे खेल सकें। रफ्तार से भरी जिंदगी में पता नहीं चलता कि कब छह दिन गुजर जाते हैं और सामने आ खड़ा होता है, संडे!! अर्जुन (बरुण सोबती) के नेतृत्व में जयेश, राशिद, मेहरनोश समेत आधा दर्जन से ज्यादा उत्साही युवाओं का ग्रुप है, जिसे एक दिन अचानक रेलवे ब्रिज पर खोया हुआ बूढ़ा (शिव सुब्रमण्यम) मिलता है।

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बरुण सोबती

बूढ़े को कुछ याद नहीं, सिवा एक फोन नंबर के। अर्जुन उसे घर पहुंचाता है जहां उसकी बेटी कवि (शाहाना गोस्वामी) से मुलाकात होती है। अर्जुन-कवि की कहानी के साथ सारे दोस्तों की फुटबॉल के मैदान की तलाश और अपनी-अपनी जिंदगी में संघर्ष के रंग तू है मेरा संडे के दृश्यों में बिखरे हैं। यह मैट्रो शहर और उसकी संवेदना का सिनेमा है। जिसकी भाषा कुछ-कुछ हिंदी और ज्यादा अंग्रेजी है। फिल्म दो भाइयों और उनकी मां के साथ ऐसे युवक की कहानी भी कहती है, जो नितांत अकेला है।

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बरुण सोबती

यहां ऐसी युवा मां भी है जिसे पति छोड़ कर दुबई चला गया और दूसरा निकाह कर लिया क्योंकि उसके दो गूंगे-बहरे बच्चे हुए! फिल्म में जिंदगी को महसूस करने और शिद्दत से जीने का संघर्ष है। आप या तो यहां कभी न हार मानने की जिद के साथ संघर्ष करते हुए जी सकते हैं या इसे छोड़ कर कहीं भी जा सकते हैं। फिल्म के किरदार अंततः जीतते हैं। लेकिन कितने भावनात्मक ज्वार-भाटे के बाद, यह देखना रोमांचक है।

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बरुण सोबती
सारे पात्र रोचक हैं और अभिनेताओं का काम बढ़िया है। ऐसा ही सिनेमा हिंदी फिल्मों को समृद्ध बना रहा है। इसकी संख्या बढ़ रही है। सिनेमा की दुनिया और उसे चाहने वाले हिप हिप हुर्रे कह सकते हैं। जरूरी बस यही है कि ऐसी फिल्में सही ढंग से रिलीज हो सकें। बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचें। बरुण सोबती, शाहाना गोस्वामी, विशाल मल्होत्रा, अविनाश तिवारी, रसिका दुग्गल, नकुल भल्ला, शिव सुब्रमण्यम अभिनय की छाप छोड़ते हैं। मिलिंद दहीमाडे की प्रतिभा की चमक इस फिल्म में दिखी है और आगे उन पर नजर रहेगी।

 

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