निर्माताः गौरी खान
निर्देशकः इम्तियाज अली
सितारेः शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा
रेटिंग: **
क्या दो घिसे हुए सिक्के मिलकर एक खनकता कॉइन बन सकते हैं? शाहरुख खान और इम्तियाज अली के मेल-मिलाप से बनी 'जब हैरी मैट सेजल' देखें तो सीधा जवाब है, नहीं। कहने को दोनों दिग्गज हैं मगर चमक खो चुके हैं। इस फिल्म में दोनों ने एक-दूसरे को सहारा देने की कोशिश की परंतु बुरी तरह लड़खड़ाए हैं।
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'जब हैरी मेट सेजल' रिव्यू
- फोटो : Twitter/Red Chillies Entertainment
कभी लवस्टोरी के माहिर रहे इम्तियाज की यह कहानी बेदम है और शाहरुख के स्टबल उगे चेहरे में रूमानियत सूख चुकी है। अपनी जवानी खोकर वह पर्दे पर भी बढ़ती उम्र के बच्चों के पिता ही नजर आते हैं। होना यह चाहिए कि दमदार डायरेक्टर-ऐक्टर अपनी प्रतिभा से कोई नई खोज करें लेकिन दोनों सफलता का बोझ अपने सिर पर ढो रहे हैं। ऐसे में कुछ नया कैसे सोचें?
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'जब हैरी मेट सेजल' रिव्यू
मूल कहानी इतनी है कि हैरी पंजाब से यूरोप पहुंच कर ट्रेवल गाइड बन गया और गुजराती सेजल रिश्तेदारों संग घूमने आई है। सेजल के मंगेतर ने उसे पुश्तैनी अंगूठी पहना कर प्रपोज किया। थोड़े समय में पता चलता है कि अंगूठी सुंदरी के अंगुलियों से फिसल गई। सब लौट गए और सेजल हैरी के साथ यूरोप में अंगूठी ढूंढ रही है।
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'जब हैरी मेट सेजल' रिव्यू
खोदा पहाड़ निकली चुहिया की तर्ज पर आखिर रिंग सेजल के पर्स में निकलती है। आश्चर्य कि पूरी कहानी का ढांचा जिस जिज्ञासा पर खड़ा है, उस रिंग के मिलने के दृश्य को इतने ठंडे ढंग से रचा गया है कि मानों कुछ हुआ ही नहीं! सेजल घर लौट जाती है। तब हैरी को अहसास होता है कि वह अपना दिल छोड़ गई और उसका दिल ले गई।
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'जब हैरी मेट सेजल' रिव्यू
बॉलीवुड की हर दूसरी-तीसरी फिल्म में यह हादसा होता है। कहानी की बड़ी कमी यह है कि हैरी के अतीत से जुड़े सवाल अनसुलझे हैं। हैरी बीच-बीच में एकदम सैड हो जाता है और फिल्म अचानक खत्म हो जाती है। हैरान दर्शक पाते हैं कि इस सफर में उनकी जेब कट गई!!