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Movie Review: एक जोखिम भरे दौर की कहानी कहती है 'इंदु सरकार'

Sun, 30 Jul 2017 08:29 AM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Sun, 30 Jul 2017 08:29 AM IST
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Madhur Bhandarkar Film Indu Sarkar Review Featuring Kirti Kulhari Neil Nitin Mukesh Anupam Kher
फिल्म रिव्यू
निर्माताः भरत शाह


निर्देशकः मधुर भंडारकर

सितारेः कृति कुल्हरी, तोता रॉय चौधरी, नील नितिन मुकेश, अनुपम खेर, सुप्रिया विनोद

रेटिंग: **1/2

मधुर भंडारकर फिल्मों में हमेशा जोखिम वाले विषय चुनते आए हैं। इस लिहाज से 'इंदु सरकार' उनका अब तक का सबसे बड़ा जोखिम है क्योंकि देश में राजनीतिक सिनेमा बनाना आसान नहीं है। इस मामले में हर पार्टी, हर नेता एक मंच पर आ जाते हैं। नतीजा फिल्म पूरा सच नहीं दिखा सकती। नाम नहीं ले सकती।
Madhur Bhandarkar Film Indu Sarkar Review Featuring Kirti Kulhari Neil Nitin Mukesh Anupam Kher
फिल्म रिव्यू
यही कुछ मधुर की 'इंदु सरकार' के साथ हुआ। आप देश के इमरजेंसी काल (1975-77) में प्रधानमंत्री को जानते हैं, पर्दे के पीछे असली संचालक बने हुए ‘चीफ’ और उनके सहायकों को जानते हैं परंतु अंगुली नहीं उठा सकते। इंदु की खूबसूरती इसकी नायिका का नाम है जिसमें आप आपातकाल की ध्वनि लगातार सुनते रहते हैं। गरीबों की झुग्गियों पर चले बुलडोजर, जबरा-नसबंदी के सीन और जेल में ठूंस दिया गया राजनीतिक विपक्ष फिल्म में दिखाई देता है। परंतु मुख्य कहानी यह नहीं है।
Madhur Bhandarkar Film Indu Sarkar Review Featuring Kirti Kulhari Neil Nitin Mukesh Anupam Kher
फिल्म रिव्यू
अनाथ इंदु (कृति कुल्हरी) हकलाती है और मन की बात नहीं कह पाती है। वह कवयित्री बन जाती है। उसके जीवन में नवीन सरकार (तोता रॉय चौधरी) आता है, विवाह करता है। उसे एक स्वस्थ-समृद्ध जीवन देता है। सब ठीक चल रहा है कि तभी आम जनता की आजादी छिन जाती है। आपातकाल लग जाता है।
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Madhur Bhandarkar Film Indu Sarkar Review Featuring Kirti Kulhari Neil Nitin Mukesh Anupam Kher
फिल्म रिव्यू
सरकारी अधिकारी नवीन सरकार तन-मन से सत्ता की सेवा में लगा है और इंदु भी आस-पास के जीवन से अधिक मतलब नहीं रखती। परंतु तभी झुग्गियों पर चले बुलडोजर में मां-बाप के मरने से अनाथ हो गए दो बच्चे इंदु को अपने अतीत से जोड़ देते हैं। वह उन्हें अधिकार दिलाना चाहती है, उनके हक के लिए खड़ी होती है और यहीं पति से टकराव शुरू होता है। जो बढ़ते हुए इंदु को आपातकाल के विरोध की राह पर डाल देता है। नानाजी (अनुपम खेर) यहां अंडरग्राउंड विपक्ष के प्रतिनिधि हैं। लीडर हैं।
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Madhur Bhandarkar Film Indu Sarkar Review Featuring Kirti Kulhari Neil Nitin Mukesh Anupam Kher
फिल्म रिव्यू
फिल्म उस दौर की याद दिलाते हुए जनता के मौलिक अधिकारों को लेकर आज भी प्रासंगिक सवाल उठाती है परंतु पूरी तरह से राजनीतिक नहीं होती। मधुर कम समय में उस दौर को स्थापित करने में कामयाब हैं और कहानी इंदु के जीवन-संघर्ष पर फोकस हो जाती है। उसकी व्यक्तिगत लड़ाई में बदल जाती है।
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