Mardaani 2 Movie Review, Rating in Hindi: पांच साल हुए शिवानी शिवाजी रॉय को मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड किए हुए। अब वह इंस्पेक्टर से पुलिस अधीक्षक बन चुकी है। पांच साल के इस अंतराल के बीच रानी मुखर्जी एक और जबर्दस्त फिल्म हिचकी भी दे चुकी हैं। रानी मुखर्जी का करियर राजा की आएगी बारात से लेकर अब तक तमाम उतार चढ़ाव देख चुका है। हिंदी सिनेमा में उन्होंने एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर अपनी पहचान बनाई है जिनका कद भले छोटा हो लेकिन परवाज उनकी हमेशा ऊंची रही। 41 साल की उम्र में जिस मेहनत, समर्पण और जीवट का परिचय रानी ने फिल्म मर्दानी 2 में दिया है, वह दूसरी अभिनेत्रियों के लिए एक मिसाल है।
Mardaani 2 Review: क्रूर अपराधियों का सफाया करने लौटी शिवानी, दमदार अभिनय से रानी बनीं असल मर्दानी
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Mardaani 2 Movie Review, Rating in Hindi: पांच साल हुए शिवानी शिवाजी रॉय को मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड किए हुए। अब वह इंस्पेक्टर से पुलिस अधीक्षक बन चुकी है। पांच साल के इस अंतराल के बीच रानी मुखर्जी एक और जबर्दस्त फिल्म हिचकी भी दे चुकी हैं। रानी मुखर्जी का करियर राजा की आएगी बारात से लेकर अब तक तमाम उतार चढ़ाव देख चुका है। हिंदी सिनेमा में उन्होंने एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर अपनी पहचान बनाई है जिनका कद भले छोटा हो लेकिन परवाज उनकी हमेशा ऊंची रही। 41 साल की उम्र में जिस मेहनत, समर्पण और जीवट का परिचय रानी ने फिल्म मर्दानी 2 में दिया है, वह दूसरी अभिनेत्रियों के लिए एक मिसाल है।
शिवानी शिवाजी रॉय एक मिथ है हिंदी सिनेमा में दमदार महिला किरदारों की तरक्की का। इस साल वैसे भी बॉक्स ऑफिस ने हर उस फिल्म को सलाम किया है जिसमें अभिनेत्रियों ने अपने ग्लैमर से ज्यादा अपने अभिनय का लोगों के सामने रखा और ऐसे किरदार किए जिन्हें लोगों ने अपने आसपास का ही समझा। असमान्य परिस्थितियों में जिंदगी का ऐसा संघर्ष अभिनेत्रियों ने हिंदी सिनेमा में किसी एक ही साल में कम ही दिखाया है। शिवानी शिवाजी रॉय का मुकाबला इस बार एक ऐसे अनदेखे अपराधी से है जो सिहरा देने वाले अपराध में संलग्न है और निशाने पर हैं उसके वे युवतियां जो दिन ढले उसका निशाना बनती हैं। सनी नाम का ये अपराधी सिर्फ खूंखार ही नहीं बल्कि वह अपने अपराधों को योजनाएं बनाकर अंजाम देता है।
फिल्म मर्दानी 2 को गोपी पुथरन ने लिखा भी है और निर्देशित भी किया है। फिल्म के पूरे प्रचार के दौरान वह मीडिया से दूर रहे। कोटा विवाद के अलावा वह कभी कुछ नहीं बोले। अब उनका काम बोल रहा है। गोपी ने पहली मर्दानी सिर्फ लिखी थी। इस बार उन्होंने शिवानी शिवाजी रॉय को एक निर्देशक के नजरिए से दर्शकों के सामने पहले से ज्यादा दमदार तरीके से रखा है। रानी को तैराकी सीखने पर विवश किया है और अपने कलाकार के लिए चुनौती पेश कर सकने वाले निर्देशक के तौर पर अपनी पहली ही फिल्म से एक अलग साख कायम करने में कामयाबी पाई है।
शिवानी शिवाजी रॉय के तौर पर रानी मुखर्जी का अभिनय उनकी शख्सीयत को एक नए आयाम के साथ पेश करने में कामयाब रहा। पूरी फिल्म में उन्होंने खुद को एक ऐसी महिला के तौर पर पेश किया जिसके बदन पर तो खाकी है लेकिन दिल में इंसानियत अभी बाकी है। वह खुद को संयम में रखती हैं। कहीं मुंबइया फिल्मों जैसी पुलिस वाली वह नहीं दिखतीं, उनका अभिनय उनके किरदार को असलियत के करीब रखता है। रानी ने जिस तरह पहले मर्दानी फिर हिचकी और अब मर्दानी 2 में खुद को कैमरे के सामने पेश किया, उससे ये भी साबित होता है कि हिंदी सिनेमा में अभिनेत्रियों का करियर भी लंबा चल सकता है बशर्ते कहानियों के चयन और अपने अभिनय में वे तरक्की करती रहें। फिल्म के विलेन के तौर पर विशाल जेठवा ने भी काबिले तारीफ काम किया है। पहली ही फिल्म में ऐसा काम उनको मीलों आगे ले जा सकता है। वह अपने किरदार की परतें समझने में कामयाब रहे और स्थान के हिसाब से अपने संवादों की भाषा गढ़ने में भी कामयाब दिखे।
गोपी पुथरन ने फिल्म मर्दानी की रफ्तार पहले सीन से ही तय कर दी है। कहीं कोई गाना नहीं। कहीं कोई अनावश्यक भागदौड़ नहीं है। फिल्म परत दर परत खुलती है औऱ दर्शकों को आखिर तक बांधे रखती है। जॉन स्टुवर्ट इदुरी का बैकग्राउंड म्यूजिक इसमें फिल्म की काफी अच्छी मदद करता है। फिल्म महिला सशक्तीकरण की घूंटी बार बार पिलाती रहती है लेकिन मौजूदा माहौल में ये ज्यादा खटकती नहीं है। फिल्म के हर कलाकार का अपने किरदार में भरोसा है और फिर चाहे ये कलाकार आपस में बात करें या दर्शकों से, एक प्रवाह फिल्म का बना रहता है।