फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

The White Tiger Review: दुनिया को भारतीय नौकरों का काइयांपन दिखाती विदेशी फिल्म, आदर्श की बड़ी छलांग

Sat, 23 Jan 2021 04:07 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 23 Jan 2021 04:07 PM IST
विज्ञापन
The White Tiger Review by Pankaj Shukla Adarsh Gaurav Priyanka Chopra Rajkummar rao Ramin bahrani
द व्हाइट टाइगर रिव्यू - फोटो : अमर उजाला

Movie Review: द व्हाइट टाइगर


कलाकार: आदर्श गौरव, राजकुमार राव, प्रियंका चोपड़ा, महेश मांजरेकर आदि।
पटकथा, निर्देशन: रमीन बहरानी
लेखक: अरविंद अडिगा (उपन्यास ‘द व्हाइट टाइगर’ पर आधारित)
रेटिंग: ***


यह संयोग ही हो सकता है कि एक ही दिन रिलीज हुई दो फिल्मों में से एक खालिस हिंदुस्तानी निर्देशक ने बनाई और दूसरी ईरानी अमेरिकी निर्देशक ने और दोनों की आत्मा एक। दोनों सामाजिक क्रांति की बातें करती फिल्म हैं, लेकिन दोनों शीर्ष पर पहुंचने का कोई सही तार्किक रास्ता दर्शकों को सुझा नहीं पातीं। दोनों अपराध बोध से ग्रसित मानसिकता वाला सिनेमा है। और, दोनों का निष्कर्ष एक है कि गरीबी इस देश में किसी ठाकुर की खींची लक्ष्मण रेखा है जिसे पार करने का रास्ता अपराध की गली से ही होकर जाता है। सिनेमा बदल रहा है। वह सच कह रहा है। सपने सच होते दिखाने वाला सिनेमा हाशिये पर पहुंच रहा है। यही पाताललोक से धरती पर आया नया तांडव है।

The White Tiger Review by Pankaj Shukla Adarsh Gaurav Priyanka Chopra Rajkummar rao Ramin bahrani
द व्हाइट टाइगर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अरविंद अडिगा का उपन्यास ‘द व्हाइट टाइगर’ भारतीय सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संक्रमण काल की कहानी कहकर बुकर प्राइज जीत चुका है। नई सदी की शुरूआत की कहानी कहते इस उपन्यास पर रमीन रहमानी ने तमाम देसी विदेशी सिनेमा देखकर एक पटकथा रची है। रमीन का भारत को देखने का एक तयशुदा फॉर्मूला है। प्रियंका चोपड़ा उनके लिए ‘देसी’ हैं। गांव के प्राइमरी स्कूल में टकाटक अंग्रेजी पढ़ने वाला बच्चा बलराम ‘व्हाइट टाइगर’ कहलाता है और गरीबों का खून चूसने वाले जमींदार के घर में पैदा होकर भी आईटी को अपना करियर बनाने वाला अशोक अमीरी और गरीबी के बीच के पुल से ज्यादा कुछ नहीं। कहने को कह सकते हैं कि ये भारत और इंडिया को दो अलग अलग खांचों में बांटने की कहानी है लेकिन, नहीं। ये नए भारत की कहानी है जिसने खुद इंडिया जैसा बनने की ठान ली है। रास्ता कैसा भी क्यों न हो।

The White Tiger Review by Pankaj Shukla Adarsh Gaurav Priyanka Chopra Rajkummar rao Ramin bahrani
द व्हाइट टाइगर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘द व्हाइट टाइगर’ का कोई हीरो नहीं है। हीरो जैसा दिखने वाला पूरी कहानी में कोई इंसान दिखता भी नहीं है। यह नए नायक गढ़ती एक फिल्म है जिसका मूल बिहार के उस गांव में है, जहां अब भी जमींदार खुद पजेरो गाड़ी लेकर वसूली करने आता है। जहां अच्छा होना भी एक भ्रम है। जैसा कि बलराम को शहर का ड्राइवर समझाता है, ‘वह अमीर है।’ इस भारत में मुसलमान को नाम और पहचान छुपाकर ही नौकरी मिलती है। और, नेताओं की गालियों से ही रईसों का खोखलापन दरकता है। ये तब और बिखरता है जब इनके ड्रॉइंगरूम में वही नेता पान थूक देता है। फिल्म देखते समय वितृष्णा और घिन जैसे भाव बार बार आते हैं। एकबारगी तो ये भी लगने लगता है कि कहीं रमीन बहरानी जानबूझकर तो नहीं ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ का रिवर्स वर्जन बनाने निकल पड़े हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
The White Tiger Review by Pankaj Shukla Adarsh Gaurav Priyanka Chopra Rajkummar rao Ramin bahrani
द व्हाइट टाइगर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रमीन बहरानी ने भारतीय पृष्ठभूमि के एक ऐसे उपन्यास पर फिल्म बनाने की ठानी जिसकी अंतर्धारा शायद ही वह महसूस कर सके हों। ठीक वैसे ही जैसा प्रियंका चोपड़ा का किरदार है। बिहार के किसी कोल माफिया के घर की बहू अपने जेठ से ऐसे जुबान लड़ाने की सोच भी पाती होगी भला? लेकिन, सनद यहां यह रहे कि ये फिल्म मूल रूप से अंग्रेजी में बनी है। वैश्विक दर्शकों के आगे एक भारतीय नौकर का काइयांपन बेचने निकली फिल्म। इस कहानी का नौकर अमिताभ बच्चन वाला ‘नमक हलाल’ नहीं है। ये दूसरों के दुख में मजा लेकर सुख पाने वाला नौकर है। मालिक उसको अपना जमूरा बनाकर रखता है। मालकिन के बर्थडे में वह जोकर बनकर पहुंचता है और फिर जब जेल जाने की बारी आती है तो...! लेकिन, यहीं से फिल्म और बलराम दोनों की आत्मा बदलती है।

विज्ञापन
The White Tiger Review by Pankaj Shukla Adarsh Gaurav Priyanka Chopra Rajkummar rao Ramin bahrani
द व्हाइट टाइगर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘द व्हाइट टाइगर’ में राजकुमार राव और प्रियंका चोपड़ा सहायक कलाकारों की भूमिका में हैं। महेश मांजरेकर की तरह। असल कहानी आदर्श गौरव की परिक्रमा करते हुए आगे बढ़ती है। अगर आपको अमोल पालेकर की ‘गोलमाल’ याद हो तो शुरू में आदर्श गौरव का काइयांपन कुछ कुछ वैसी ही झलक दिखाता है। अभिनय के सारे रसों से आदर्श ने इस किरदार को पाग दिया है। बस समस्या यहां यही है कि हिंदी सिनेमा में आयुष्मान खुराना  पहले से राजकुमार राव वाली जगह कब्जाने में लगे हैं, दूसरे किसी की गुंजाइश वहां बनने में अभी देर है। आदर्श की कलाकारी पहले भी लोगों ने देखी है और वेब सीरीज से वेब फिल्म तक आने में उन्हें समय भी ठीक ठाक लगा। अब बड़े परदे पर इस ‘व्हाइट टाइगर’ की छलांग का इंतजार रहेगा।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed