पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा का सफर शुरू से ही काफी दिलचस्प रहा है। साजन फिल्म से की थी अपने करियर की शुरुआत। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार, तृणमूल के शत्रुघ्न सिन्हा पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट पर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार एस एस अहलूवालिया से कई हजार वोटों से आगे चल रहे हैं। लेकिन बिना नतीजो के आने से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता है। इस बार आसनसोल सीट पर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के शत्रुध्न सिन्हा सांसद हैं। जानिए बॉलीवुड के गलियारों से लेकर टीएमसी नेता बनने तक का सफर।
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शत्रुघ्न सिन्हा
- फोटो : इंस्टाग्राम@shatrughansinhaofficial
शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा का जन्म 15 जुलाई 1946 को बिहार में हुआ था। शत्रुघ्न सिन्हा एक भारतीय अभिनेता और राजनीतिज्ञ हैं। वह अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सदस्य के रूप में आसनसोल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के सांसद हैं। इससे पहले वे पटना साहिब से लोकसभा के सांसद चुने गए थे । 1996-2002 और 2002-2008 के दौरान राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं।
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शत्रुघ्न सिन्हा
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शत्रुघ्न के पिता का नाम भुवनेश्वरी प्रसाद सिन्हा और माता का नाम श्यामा देवी सिन्हा है। शत्रुघ्न के तीन भाई हैं राम, लक्ष्मण और भरत। शत्रुघ्न सबसे छोटे हैं। उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से विज्ञान स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। इसके बाद शत्रुघ्न ने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे से अभिनय में डिप्लोमा किया था। पढाई के बाद शत्रुघ्न मुंबई चले गए थे, जहां उन्होंने फिल्म जगत में अपना करियर शुरू किया था। शत्रुघ्न सिन्हा ने पूर्व मिस इंडिया पूनम सिन्हा से शादी की है। उनकी बेटी सोनाक्षी सिन्हा आज के समय में टॉप की एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शुमार हैं। उनके दो बेटों का नाम लव और कुश है।
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शत्रुघ्न सिन्हा
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शत्रुघ्न को अपना पहला अभिनय अवसर बॉलीवुड अभिनेता देव आनंद की फिल्म 'प्रेम पुजारी' में मिला था, लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से यह फिल्म देर से रिलीज हुई थी। इस बीच शत्रुघ्न को 1969 में मोहन सहगल की फिल्म 'साजन' में एक पुलिस इंस्पेक्टर की छोटी सी भूमिका मिली थी। उस हिसाब से शत्रुघ्न की पहली फिल्म 'प्रेम पुजारी' नहीं बल्कि 'साजन' कहलाएगी। इसके बाद शत्रुघ्न ने 'प्यार ही प्यार', 'बनफूल', मनमोहन देसाई की 'रामपुर का लक्ष्मण', 'भाई हो तो ऐसा', सुल्तान अहमद की 'हीरा' और विजय आनंद की 'ब्लैकमेल' में खलनायक की भूमिका निभाई। शत्रुघ्न ने कई फिल्मों में स्पोर्टिंग रोल्स भी किए। इसके साथ ही फिल्म 'कालीचरण' में लीड रोल निभाया। यह फिल्म सुपर-डुपर हिट हुई। इस फिल्म के बाद उन्होंने कई फिल्मों में लीड रोल निभाया, जो दर्शकों को बेहद पसंद आया। कोयला खदान मजदूरों के जीवन पर आधारित 1983 में प्रदर्शित फिल्म 'कालका' का निर्माण और अभिनय भी किया।
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'दिल ए नादान', 'आज का एमएलए राम अवतार' जैसी तमाम फिल्मों में राजेश खन्ना के साथ मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। अस्सी के दशक में शत्रुघ्न ने कई हिट फिल्में दी, जिनमें 'जीने नहीं दूंगा', 'भवानी जंक्शन', और 'आंधी-तूफान' के अलावा कई फिल्में शामिल थीं। इसके बाद उन्होंने जीतेन्द्र के साथ 'होशियार', 'खुदगर्ज', 'रणभूमि' और 'मुल्जिम' में अभिनय किया। उन्होंने धर्मेन्द्र के साथ 'इंसानियत के दुश्मन', 'लोहा', 'आग ही आग' में सह-अभिनय किया था। सिन्हा ने फिल्म 'कालीचरण' पाने और 1980 के दशक में मुख्य नायक के रूप में अपने करियर का श्रेय राजेश खन्ना को दिया। हालांकि, उनकी दोस्ती तब प्रभावित हुई जब शत्रुघ्न सिन्हा 1992 के चुनाव में राजेश खन्ना के खिलाफ भाजपा उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए थे।