लॉकडाउन के चलते टीवी पर कई पुराने कार्यक्रमों की वापसी हुई है। ऐसे में दूरदर्शन पर रामायण, महाभारत, चाणक्य, शक्तिमान, सर्कस आदि जैसे कई कार्यक्रमों का दोबारा प्रसारण किया जा रहा है। इन सभी पुराने टीवी शोज में रामानंद सागर की रामायण को एक बार फिर से दर्शकों का असीम प्यार मिल रहा है। ऐसे में रामायण में राम बने अरुण गोविल ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम के किस्से साझा किए हैं।
Ramayan: 'राम' बनने के लिए अरुण गोविल ने ऐसे की थी तैयारी, कहा- 'मैंने कोई फिल्म नहीं देखी..'
सोशल मीडिया पर अरुण गोविल से एक सवाल पूछा गया कि जब श्रीराम के किरदार को जीवंत बनाने के लिए किस तरह की तैयारी आपको करनी पड़ी थी? इस सवाल के जवाब में अरुण गोविल ने ट्विटर पर लिखा, 'मैंने कोई फिल्म नहीं देखी, अपने घरों में उनकी जो तस्वीरें हैं, वही देखी थीं।'
अरुण ने अपने इस ट्वीट में आगे लिखा, 'उनके तमाम गुणों के आधार पर उनकी कल्पना की थी। शूटिंग से पूर्व हमने राम के लुक में फोटो निकाली, यह देखने के लिए कि हम कैसे दिखते हैं। हम इंसान दिख रहे थे, भगवान नहीं। राम का यह एक गुण था।'
मैंने कोई फिल्म नहीं देखी. अपने घरों में उनकी जो तस्वीरें हैं, वही देखी थीं. उनके तमाम गुणों के आधार पर उनकी कल्पना की थी. शूटिंग से पूर्व हमने राम के लुक में फोटो निकाली यह देखने के लिए कि हम कैसे दिखते हैं।#रामायण 1/2 https://t.co/5njRaSEqCV
अपनी बात आगे रखते हुए अरुण ने कहा, 'लेकिन भगवान की सौम्यता और निर्मलता नहीं दिख रही थी। मुझे राजकुमार बड़जात्या जी की एक बात याद आ गई थी कि आपकी मुस्कुराहट बहुत अच्छी है, इसे किसी दिन यूज़ कीजियेगा। मैंने अपनी मुस्कान का यहाँ इस्तेमाल किया और उसने मेरा सारा काम कर दिया।'
हम इंसान दिख रहे थे, भगवान नहीं. राम का यह एक गुण था. लेकिन भगवान की सौम्यता और निर्मलता नहीं दिख रही थी. मुझे राजकुमार बरजात्या जी की एक बात याद आ गयी थी कि आपकी मुस्कुराहट बहुत अच्छी है, इसे किसी दिन यूज़ कीजियेगा. मैंने अपनी मुस्कान यहाँ यूज़ की और उसने मेरा सारा काम कर दिया.
80 के दशक में जब रामायण धारावाहिक टीवी पर आया तो इसके साथ ही कई स्पेशल इफेक्ट्स भी देखने को मिले थे, जैसे हनुमान का संजीवनी बूटी लाना, पुष्पक विमान का उड़ना आदि। प्रेम सागर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब रामायण के दौरान बहुत सारे जूनियर कलाकारों की जरूरत पड़ती थी तो गाँव-गाँव जाकर ढोल नगाड़ो के साथ घोषणा की जाती थी और कलाकार भर्ती किए जाते थे। वहीं कहा जाता है कि उस दौर में रामायण के प्रसारण के दौरान अफसर से लेकर नेता तक किसी से मिलना तो क्या किसी का फोन भी उठाना पसंद नहीं करते थे।