बीआर चोपड़ा की महाभारत का दूरदर्शन पर फिर से प्रसारण किया जा रहा है। ऐसे में एक बार फिर इस कार्यक्रम को दर्शकों का ढेर सारा प्यार मिल रहा है। महाभारत के साथ ही एक बार फिर से 'मैं समय हूं' भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर 'समय' का ये विचार महाभारत के लिए कैसे आया? इसका जवाब महाभारत में धर्मराज युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में दिया।
Exclusive: 'महाभारत' के 'मैं समय हूं' के पीछे है ये मजेदार किस्सा, 'युधिष्ठिर' ने किया बड़ा खुलासा
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गजेंद्र चौहान ने अमर उजाला के साथ बात करते हुए 'समय' की उत्पत्ति का किस्सा बताते हुए कहा,"जो महाभारत के शुरु होने के वक्त 'समय' आता है, इसको बाद में कई धारावाहिकों में कॉपी किया गया। कभी मैं पृथ्वी हूं, कभी मैं आसमान हूं.. मैं ये हूं... मैं वो हूं लेकिन मैं समय हूं ये कैसे आया इसकी कहानी जुड़ी है टीवी शो 'हम लोग' से। उस वक्त उस टीवी शो में दादा मुनि यानी अशोक कुमार जी नरेशन किया करते थे।"
गजेंद्र ने आगे कहा, "चोपड़ा साहब ने महाभारत में नरेशन करने के लिए पहले साउथ के एनटीआर साहब को चुना। क्योंकि उन्होंने कई सारी भक्ति भाव वाली फिल्में की थीं। लेकिन किसी ने कहा कि वो नॉर्थ में ज्यादा पसंद नहीं किए जाएंगे। तो चोपड़ा जी ने वो विचार छोड़ दिया। उसके बाद किसी ने कहा कि दिलीप कुमार साहब मशहूर हैं आप उनको लीजिए, तो दिलीप कुमार साहब महाभारत के नरेशन के लिए चुने गए थे। लेकिन फिर किसी ने कहा कि उर्दु जुबान होगी और महाभारत की कास्ट्यूम के साथ जब नरेशन होगा तो अच्छा नहीं लगेगा।"
आगे गजेंद्र कहते हैं, "इसी दौरान क्या हुआ कि डॉ राही मासूम रज़ा साहब (जिन्होंने महाभारत लिखी थी) उनको 'समय' का विचार आया। दरअसल डॉ राही मासूम रज़ा साहब का रुटीन ऐसा था कि वो सुबह चोपड़ा जी के ऑफिस आते थे और लंच के लिए घर जाते थे। उनकी पत्नी डेढ़ बजे का अलॉर्म लगाकर रखती थीं और जब दो बजे राही जी घर पहुंचते थे तो उनको खाना तैयार मिलता था। एक दिन ऐसा हुआ कि अलॉर्म गलती से दोपहर के डेढ़ बजे की जगह रात के डेढ़ बजे का भर गया और रात में ही बज पड़ा।
इस किस्से के अंत में गजेंद्र ने कहा, "अलॉर्म बजने से राही साहब की नींद टूट गई। डॉक्टर (राही) साहब की पत्नी ने कहा कि शायद मुझसे धोखे से रात का अलार्म लग गया, लेकिन डॉक्टर साहब को नींद नहीं आई। इसके बाद वो अपने उस कमरे में चले गए जहां बैठकर वो महाभारत लिखा करते थे। इसके बाद उन्होंने पहली लाइन लिखी- 'समय बड़ा बलवान है।' फिर उन्होंने सोचा कि जब समय मेरी नींद खराब कर सकता है तो कहानी क्यों नहीं बता सकता। इसके बाद उन्होंने पहली बार लिखा था, 'मैं समय हूं और आज मैं आपको हस्तिनापुर की कहानी सुनाने जा रहा हूं।' एक अलार्म के गलत समय पर लग जाने से 'समय' सही हो गया।"