साल 2020 जैसे तैसे बीता ही जा रहा है। इस कोरोना काल ने तमाम अच्छे खासे धारावाहिकों की बलि ले ली, कुछ तो इसी दौरान शुरू हुए और दो चार हफ्ते या कुछ महीने चलकर ही बंद हो गए। नवंबर दिसंबर के फेस्टिव सीजन में भी कुछ नए धारावाहिक दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहे हैं लेकिन, इस सबके बीच मुंबई मे चर्चा है नए साल के पहले ही हफ्ते में शुरू होने जा रहे एक एतिहासिक धारावाहिक की।
नए साल में बजने जा रही इस ऐतिहासिक किरदार की दुंदुभि, देखिए नए टीवी शो की रोचक तस्वीर
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टेलीविजन के कुछ नए पुराने सूरमा अगले महीने से एक नया ऐतिहासिक शो लेकर आ रहे हैं, जिसका नाम है, ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई’। जैसा कि नाम से ही मालूम होता है ये सीरियल इतिहास की एक मशहूर शख्सियत पर आधारित है और टेलीविजन के उन दर्शकों के लिए है जो छोटे परदे पर इतिहास की दंत कथाएं देखने के ज्यादा शौकीन होते हैं। काल्पनिक घटनाओं को एतिहासिक कहानी का हिस्सा बना देना भारतीय टेलीविजन की इस श्रेणी के धारावाहिकों की नई रीत बन चुकी है।
‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई’ शो 18वीं सदी का एक पीरियड ड्रामा है, जो एक साधारण लड़की अहिल्याबाई होलकर के असाधारण जीवन पर आधारित है। अपने ससुर मल्हार राव होलकर के समर्थन से अहिल्याबाई ने पुरुषवादी समाज के पहले से तय ऐसे नियमों को दरकिनार किया, जिनके कारण महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित रह जाती थीं और उनकी आवाज दबा दी जाती थी। उन्होंने समाज में अपने उल्लेखनीय एवं सकारात्मक योगदान के जरिए एक ऐसी मिसाल कायम की, जो लिंग या जन्म से नहीं बल्कि कर्मों से महान बन गई।
अहिल्याबाई होलकर की बहादुरी की गाथा भारतीय टेलीविजन पर पहली बार दिखाई जाएगी। इस शो में जानी-मानी चाइल्ड एक्ट्रेस अदिति जलतारे, अहिल्या का रोल निभाएंगी और मशहूर टीवी एक्टर राजेश श्रृंगारपुरे अहिल्या के ससुर मल्हार राव होलकर की भूमिका में नजर आएंगे। इस शो में अहिल्या और मल्हार राव का एक खास रिश्ता दिखाया जाएगा।
‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई’ में ससुर और बहू की इस कहानी में दोनों की अनूठी साझेदारी दिखेगी जिसके साथ ना सिर्फ इन्होंने नियमों को पलट दिया था, बल्कि उन्हें दोबारा परिभाषित भी किया था। यह कहानी हमें अहिल्याबाई के उल्लेखनीय सफर में ले जाएगी, जो यह बताएगी कि कैसे महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव की लड़की ने सबसे अपरंपरागत और मुश्किल परिस्थितियों में संघर्ष किया और आगे चलकर ना सिर्फ राज्य और मराठा साम्राज्य की रानी बनीं, बल्कि जनता के बीच 'मातोश्री' की उपाधि भी अर्जित की। अहिल्याबाई को भारतीय इतिहास की सबसे कुशल महिला प्रशासकों में से एक माना जाता है।
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