सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' इन दिनों विवादों में घिर गया है। इन दिनों शो का दसवां सीजन प्रसारित हो रहा है। आंखों में सपने लिए लाखों कंटेस्टेंट इस शो के ऑडीशन में हिस्सा लेने पहुंचते हैं लेकिन रियलिटी का दावा करने वाले इन शोज पर सवाल खड़े होते रहे हैं। हाल ही में एक ऑडीशन देने वाले शख्स ने एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
अमानवीय व्यवहार को लेकर विवादों में 'इंडियन आइडल', अब होस्ट रहीं मिनी माथुर ने खोली पोल
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साल 2012 में इंडियन आइडल में ऑडीशन देने पहुंचे निशांत कौशिक नाम के एक शख्स ने एक के बाद एक ट्वीट कर शो के बारे में अपने अनुभव शेयर कर बताया कि आखिर किस तरह ये रियलिटी शो लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं। निशांत के ट्वीट करने के बाद अब इस पर शो की होस्ट रहीं मिनी माथुर ने उनकी बातों का समर्थन किया है।
मिनी माथुर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि 'यह मुझे फॉर्वर्ड करने के लिए शुक्रिया। मैं साल 2012 के इंडियन आइडल का हिस्सा नहीं थी लेकिन मैं जानती हूं कि रियलिटी शो में क्या होता है। यह उन कारणों में से एक था जिस वजह से मैं ऐसे शोज से दूर हुई। यहां सब लगातार झूठी भावनाओं को व्यक्त करते हैं।'
This sucks. Thanks for forwarding me this thread. I wasn’t part of the 2012 season but I know most of what he has articulated is known to happen on reality tv. One of the reasons I bowed out. This incessant need to create false emotion.
RIP Organic, pure TV.
इससे पहले निशांत ने ट्वीट करते हुए बताया था कि 'हमसे वी लव इंडियन आइडल के नारे लगवाए जा रहे थे, इसके अलावा कुछ भी पूछने पर कुछ नहीं बताया जा रहा था। इस दौरान एक कंटेस्टेंट को गुस्सा आया और उसने वहां मौजूद क्रू से पूछा कि ऑडिशंस हो कहां रहे हैं, जजेस कहां हैं। ऐसे में एक क्रू मेंबर उस पर चिल्ला पड़ा और हजारों की भीड़ के सामने उसे थप्पड़ मार दिया।'
At this point one of the aspirants lost his shit and stood up, demanding to see where the auditions were happening, to see the judges. One of the crew members charged up to him and slapped him. In front of thousands of people. SLAPPED.A.CONTESTANT. Yes this happened.
निशांत ने आगे लिखा कि 'मैं भी सुबह 7 बजे से लाइन में लग गया लेकिन कई लोग ऐसे भी थे जो सुबह 5 बजे से ही लाइन में लगे थे। यही नहीं कुछ तो ऐसे थे जो रात भर लाइनों में ही लगे थे। तब तक किसी ने नहीं बताया था कि यहां पहले आओ पहले पाओ जैसा कुछ भी नहीं है। घंटों इंतजार करने के बावजूद दोपहर करीब एक बजे हमारे लिए दरवाजे खोले गए।'