घर चलाने में अपने पिता की मदद करने के लिए मॉडलिंग शुरू करने वाले करण टैकर ने हॉटस्टार की वेब सीरीज स्पेशल ऑप्स में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एजेंट की भूमिका निभाई है। सीरीज में उनके अभिनय की इन दिनों काफी तारीफ हो रही है।
जानिए क्यों बोले स्पेशल ऑप्स के 'फारुख अली', शाहरुख के साथ दिखने से ज्यादा मुझे काम मिलने की खुशी थी
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पिता दिल्ली से, मां पंजाब से और आपका बचपन मुंबई का, कुछ बताइए अपने पहले ब्रेक के बारे में?
जब मेरा परिवार मुंबई आया तो उनके पास कुछ भी नहीं था। घर की जरूरतें ऐसी हो गईं कि मुझे कमाना जरूरी हो गया। मैंने काफी जगह नौकरी की कोशिश की। विज्ञापनों और टीवी शोज के लिए ऑडिशन देने शुरू किए। एक विज्ञापन के लिए मैं चुना गया तो मैं पापा के पास गया और कहा कि इस क्षेत्र से मैं पैसे कमा सकता हूं। मेरी थोड़ी रुचि भी इसमें है। वहीं से मेरे अभिनय की शुरुआत हो गई। लेकिन, शुरुआत में काम के पैसे भी नहीं मिलते थे। हमें हमारे काम की ही तस्वीरें दे दी जाती थीं और कहा जाता था कि यही तुम्हारा मेहनताना है।
फिल्म रब ने बना दी जोड़ी में आप पहली बार परदे पर नजर आए, शाहरुख खान के साथ एक फ्रेम में आने की यादें क्या हैं?
उससे पहले मैंने कभी किसी फिल्म या शो के लिए कैमरे का सामना नहीं किया था। उस फिल्म में मैं हौले हौले गाने में था। उस सीक्वंस के लिए मैंने बहुत मेहनत की थी। शाहरुख खान के साथ एक फ्रेम में होना काफी खास लम्हा रहा मेरे जीवन का। लेकिन मुझे शाहरुख के साथ एक फ्रेम में दिखने से ज्यादा उस दिन काम मिलने की ज्यादा खुशी थी।
स्पेशल ऑप्स में काम करना और नीरज पांडे के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
इस सीरीज में मैंने फारुख अली नामक एक अंडरकवर रॉ एजेंट का किरदार निभाया है। इस शो के लिए जब ऑडिशन शुरू हुए, मैं मसूरी में था। मैंने वहीं से अपना वीडियो बनाकर भेजा। मुंबई लौटने के बाद मैं इस रोल के लिए सेलेक्ट हुआ। मेरा मानना है कि जितना बेहतरीन निर्देशक होता है, उतना ही अच्छा एक्टर निकलता है।
स्पेशल ऑप्स की कहानी में कई आंतकवादी घटनाओं का जिक्र है। आपकी याद में ऐसी कोई घटना जिसने आपको अंदर से हिला दिया हो?
26/11 के हमले के वक्त मैं श्रीलंका में था। मुझे याद है जब मैंने रात में टीवी चलाया और वह सब नजारा देखा तो मैं रो पड़ा था। मेरी आंखों से आंसू निकल आए थे। क्योंकि शहर हमारा है, देश हमारा है लोग हमारे हैं। ऐसी घटनाओं से बहुत दुख पहुंचता है साथ ही गुस्सा भी आता है। इस दौरान बहुत ही असहाय महसूस होता है।

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