2023 में हरियाणा और हरियाणा के बाहर कुछ घटनाएं ऐसी हुईं, जिन्हें नहीं होना चाहिए था और इन्होंने सूबे के नाम पर दाग लगाया। चाहे वह नासिर-जुनैद हत्याकांड या नूंह दंगा हो, जहरीली शराब कांड हो या जींद में छात्राओं से छेड़खानी का मामला। इन घटनाओं ने न सिर्फ लोगों का ध्यान खींचा बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और सरकार के इंतजामात पर भी सवाल उठाए। आइए एक नजर डालते हैं साल की चर्चित घटनाओं पर...
Year Ender 2023: हरियाणा के हिस्से में आए दुख, दर्द और पीड़ा, पढ़ें इस साल की चर्चित घटनाएं
हरियाणा के 2023 का साल दुख-दर्द और पीड़ा भरा रहा है। प्रदेश में कई बड़ी घटनाएं ऐसी हुई जिससे हरियाणा के दामन में दाग लगे हैं। वहीं, देश की अन्य बड़ी घटनाओं में भी हरियाणा का नाम शामिल रहा है।
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नूंह हिंसा : भाईचारा बिगाड़ा, गहरे जख्म भी मिले
राजस्थान सीमा पर स्थित नूंह जिला में 31 जुलाई की दोपहर में ऐसी हिंसा भड़की जिसकी आंच में प्रदेश का सांप्रदायिक सद्भाव बुरी तरह झुलस गया। नूंह के फिरोजपुर झिरका से शुरू हुआ बवाल कई जिलों में फैल गया और इसका तनाव काफी दिनों तक पूरे प्रदेश में बना रहा। दरअसल, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेतृत्व में 31 जुलाई को ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जानी थी।
दोपहर करीब 12.30 बजे यात्रा नल्हड़ेश्वर महादेव मंदिर से फिरोजपुर झिरका के झिर मंदिर के लिए रवाना हुई, लेकिन जैसे ही यात्रा करीब दो किलोमीटर आगे बढ़ी और मुख्य सड़क पर पहुंची, तो दूसरी तरफ से पथराव शुरू हो गया। इसकी वजह बताई गई कि यात्रा में शामिल लोग नासिर-जुनैद हत्याकांड में आरोपी मोनू मानेसर के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे और स्थानीय लोगों में मोनू मानेसर प्रति आक्रोश था, जिससे वे भड़क गए।
यात्रा में शामिल महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पथराव में फंस गए। आगजनी और फायरिंग शुरू होने पर हजारों लोगों ने नल्हड़ के शिव मंदिर में छिपकर जान बचाई। इस हिंसा में पुलिस कर्मियों समेत छह लोगों की जान चली गई। एक व्यक्ति के प्रति यह आक्रोश कुछ ही घंटों में दो संप्रदायों के बीच तनाव में बदल गया। नूंह, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल जिलों में धार्मिक स्थलों व दुकानों तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई। इसके बाद नूंह में कई दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा और हालात सामान्य होने में लंबा समय लगा।
जहरीली शराब कांड : पैसों के लालच में दांव पर जिंदगी
नवंबर महीने में यमुनानगर और अंबाला जिलों में जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि चारों ओर मातम दिखाई देना शुरू हो गया। तीन दिन में यमुनानगर में 22 और अंबाला में दो लोगों की अवैध शराब पीने से मौत हो गई। इसके अलावा एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी चली गई। इस कांड के पीछे जेल में बंद गैंगस्टर मोनू राणा को बताया जा रहा है।
मोनू राणा जेल में बैठकर अपने गुर्गों और कुछ सफेदपोश लोगों की मदद से अंबाला जिले में अवैध शराब फैक्टरी चला रहा था। यहां तैयार होने वाली शराब सरकारी शराब ठेकों पर बेची जाती थी। इस अवैध शराब की सप्लाई अंबाला, यमुनानगर के अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी होती थी। अंबाला और यमुनानगर की एसआईटी अवैध शराब के इस रैकेट की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि शराब ठेकेदारों को अवैध शराब की पेटी 545 रुपये में मिल रही थी। इसे वह आगे खुर्दे वालों को 1100 से 1200 रुपये में बेचते थे।
बाढ़ का प्रकोप : बर्बादी का दंश
मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में नदियों ने भारी तबाही मचाई। बेतहाशा बारिश और बादल फटने से पहाड़ी नदियों में क्षमता से कई गुना पानी आ गया। पहाड़ों पर तबाही मचाता हुआ यह पानी जब हरियाणा पहुंचा तो इसने घरों, फसलों, मवेशियों, दुकानों और फैक्टरियों को खासा नुकसान पहुंचाया। यमुना के साथ-साथ टांगरी, मारकंडा और घग्गर नदियों ने हरियाणा के 13 जिलों में बाढ़ ला दी। नदियों का पानी किनारे तोड़ता हुआ गांवों और शहरों में घुस गया।
रातोंरात सैकड़ों लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बाहर निकाला गया। हजारों एकड़ खेतों में पानी भरने से किसानों की फसल खराब हो गई। घरों में सामान खराब हो गया और लोगों को छतों पर शरण लेनी पड़ी। सैकड़ों मवेशियों की मौत हो गई। फैक्टरियों और दुकानों में माल खराब हो गया। बाढ़ के पानी में डूबकर कई लोगों की मौत भी हो गई।
इनमें से सात परिवारों को सरकार मुआवजा राशि दे चुकी है, जबकि अन्य के दावों की अभी जांच की जा रही है। सरकारी आकलन के अनुसार बाढ़ से 399 सड़क परियोजनाओं को नुकसान हुआ। इनकी मरम्मत पर 90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 1100 किलोमीटर सड़कों, 3369 बिजली के खंभों और 1477 ट्रांसफार्मर को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा करीब 125 मकान पूरी तरह और 600 से अधिक घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए।
भ्रष्टाचार के आरोप में कठघरे में आईएएस अफसर
साल 2023 में भ्रष्टाचार के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो ने विजय सिंह दहिया और जयबीर सिंह आर्य समेत कई आईएएस पर शिकंजा कसा। अक्तूबर में दो दिन के भीतर दो आईएएस विजय दहिया व जयबीर आर्य की गिरफ्तारी बड़ी सुर्खियां बनी। हालांकि दोनों आईएएस जमानत पर बाहर आ गए हैं और हरियाणा सरकार ने दोनों को बहाल कर दिया है। साल 2001 बैच के आईएएस विजय सिंह दहिया पर 20 अप्रैल को एक महिला की गिरफ्तारी के बाद मामला दर्ज किया गया था।
उन पर हरियाणा कौशल रोजगार निगम के महाप्रबंधक रहते वक्त पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। दहिया के गिरफ्तार होने के दो दिन बाद ही हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंध महानिदेशक जयबीर आर्य को गिरफ्तार किया। आर्य पर कुरुक्षेत्र में वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के जीएम के पद पर पोस्टिंग कराने के नाम पर तीन लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप लगे थे।
आर्य की गिरफ्तारी के दौरान यह भी आरोप लगा कि एसीबी के पास कोई ठोस सबूत नहीं थे। इस बीच एसीबी की ओर से राज्य के आईएएस पर शिकंजा कसने के मुद्दे पर आईएएस एसोसिएशन ने विरोध भी जताया था।इसके अलावा सोनीपत में तैनात रहे आईएएस धर्मेंद्र कुमार को दिल्ली के ठेकेदार की शिकायत पर एक करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत लेने के आरोप में फरीदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था।