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मिसाल: जेई की नौकरी छोड़ अपनाया मधुमक्खी पालन का व्यवसाय, बने शहद रत्न अवॉर्डी, बाजार में उतारा विभिन्न प्रकार का शहद
Mon, 13 Dec 2021 07:23 PM IST
भूपेंद्र सिंह
मुकेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
मुकेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 13 Dec 2021 07:23 PM IST
सार
विनय फौगाट को तृतीय एग्री लीडरशिप शिखर सम्मेलन मार्च 2018 में मुख्यमंत्री ने शहद रत्न अवॉर्ड से नवाजा। विनय 1150 बॉक्स से करीब 450 क्विंटल शहद का उत्पादन हर साल कर रहे हैं।
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मधुमक्खी पालन की जानकारी देता विनय फौगाट, दूसरी ओर शहद।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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बीटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद गुरुग्राम में मल्टी नेशनल कंपनी में कनिष्ठ अभियंता की नौकरी छोड़कर हरियाणा के झज्जर जिले के मलिकपुर गांव निवासी विनय फौगाट ने मधुमक्खी पालन का व्यवसाय अपनाया। इसके बाद वह इस मुकाम पर पहुंच चुके हैं कि अपना सारा शहद खुद की ब्रांड बी-हट से मार्केट में बेचते हैं। इसके लिए विनय फौगाट को तृतीय एग्री लीडरशिप शिखर सम्मेलन मार्च 2018 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शहद रत्न अवॉर्ड से नवाजा व एक लाख रुपये का इनाम दिया। वे सरसों, सफेदा, तुलसी, शीशम, अजवायन, जामुन, नीम, पहाड़ी कीकर, कश्मीरी एसकेशिया आदि शहद के अलावा रॉयल जैली, बी-पोलन, परपोलिस व मोम तैयार करते हैं। 2007 से वह शहद उत्पादन कर रहे हैं। अब मधुमक्खी के 1150 बॉक्स से करीब 450 क्विंटल शहद का उत्पादन हर साल कर रहे हैं।
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विनय फौगाट को मुख्यमंत्री ने शहद रत्न अवॉर्ड से नवाजा। -फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विनय फौगाट ने बताया कि आजकल के युवा नौकरी की तरफ ज्यादा भागते हैं, जबकि उनको खुद का रोजगार करके औरों के लिए भी अवसर उत्पन्न करना चाहिए, क्योंकि यह जिम्मेदारी आज के युवा की ही बनती है कि वह देश की प्रगति के लिए अपना सहयोग दें। मधुमक्खी पालन अच्छा व्यवसाय है। ऐसा कोई भी व्यवसाय नहीं जिसमें लागत 2 से 3 महीने में ही पूरी हो जाए। नवंबर में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना सबसे उपयुक्त रहता है और मार्च तक लगभग जो लागत है वह पूरी हो जाती है। उसके बाद बचत शुरू हो जाती है। मधुमक्खी के बॉक्स में करीब 40 से 50000 मधुमक्खियां पाई जाती है।
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शहद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पराग कणों से बढ़ता है फसल का उत्पादन
सबसे ज्यादा शहद सरसों के फूलों से मिलता है और मधुमक्खियां जहां भी रखी जाती हैं वहां आसपास की फसलों में परागण क्रिया से फसलों में पैदावार बढ़ती हैं। इसी तरह सरसों की फसल में 3 से 4 क्विंटल पर एकड़ पैदावार बढ़ाती है तो किसानों को भी मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना चाहिए। उन्हें मधुमक्खी पालकों को बॉक्स रखने के लिए जगह देनी चाहिए व उनकी हर संभव मदद करनी चाहिए, क्योंकि मधुमक्खी फसलों का बहुत बड़ा मित्र कीट है।
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मधुमक्खी पालन की जानकारी देता विनय फौगाट।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसे अपनाएं मधुमक्खी पालन
बागवानी विभाग मधुमक्खी पालन पर 85 फीसदी अनुदान राशि देता है। जिसको कोई भी आसानी से ले सकता है। इसके लिए पहले बागवानी विभाग की साइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। उसके बाद उसको फार्मर शेयर जमा कराना होता है। इसके बाद उसको बॉक्स और मधुमक्खियां मिल जाती हैं और उसका व्यवसाय शुरू हो जाता है। हरियाणा ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां पर मधुमक्खी पालन पर 85 फीसदी अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा मधुमक्खी पालन के जो अन्य उपकरण हैं उन पर 75 फीसदी अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र रामनगर कुरुक्षेत्र में स्थापित किया गया है।
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मधुमक्खी पालन की जानकारी देता विनय फौगाट, दूसरी ओर शहद।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कोरोना काल में बढ़ा शहद का उपयोग
शहद को नियमित रूप से खाने से हमें बहुत लाभ होता है। एक चम्मच शहद का हम अगर रोज सेवन करें तो बीमार होने की आशंका काफी कम हो जाती है। विनय फौगाट ने बताया कि कोरोना काल में शहद का सेवन काफी बढ़ा है, क्योंकि यह नेचुरल इम्युनिटी बुस्टर का काम करता है। एक गिलास पानी में दो चम्मच शहद डालकर लिया जा सकता है। इसे तुलसी, आंवला, दही और लस्सी के साथ भी लिया जा सकता है। एक चम्मच शहद ढाई किलो सेब जितनी ऊर्जा देता है, जिससे शरीर को करीब 3500 कैलोरी मिलती हैं। डेढ़ लीटर दूध जितनी उर्जा एक चम्मच शहद दे देता है।
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