तीन कृषि कानूनों के विरोध में उठे किसान आंदोलन की शुरुआत भले ही पंजाब से हुई थी, लेकिन आंदोलन को बल हरियाणा से मिला। हरियाणा से आंदोलन को जो मजबूती मिली वह इतिहास में दर्ज हो गई। किसान आंदोलन का केंद्र भी हरियाणा का टीकरी और कुंडली बॉर्डर ही रहा। 28 जनवरी के बाद राकेश टिकैत का आंदोलनकारी नेताओं में कद बढ़ा तो लगा कि आंदोलन का मुख्य मंच अब गाजीपुर स्थानांतरित हो जाएगा, लेकिन इसके बाद भी संयुक्त किसान मोर्चा के तमाम छोटे-बड़े फैसले हरियाणा के कुंडली बॉर्डर से ही लिए गए।
Year Ender 2021: पंजाब से उठे किसान आंदोलन को हरियाणा से मिला बल, राजनीतिक हलचल हुई तेज, कईं बार बनी टकराव की स्थिति
करनाल में आयोजन स्थल पर नहीं उतरने दिया सीएम का हेलिकॉप्टर, रद्द करना पड़ा कार्यक्रम
हरियाणा के करनाल जिले के गांव कैमला में 10 जनवरी 2021 को स्थानीय विधायक हरविंदर कल्याण ने किसान महापंचायत का आयोजन रखा। इसमें मुख्यमंत्री, भाजपा अध्यक्ष सहित कई नेताओं को शिरकत करनी थी। मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर से आने वाले थे, लेकिन आंदोलन कर रहे किसानों ने कार्यक्रम का विरोध किया। आयोजन स्थल पर पहुंचने के सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया, लेकिन किसान खेतों के रास्ते से आंदोलन स्थल पर पहुंच गए। किसानों ने सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए कार्यक्रम के लिए सजाया मंच तोड़ दिया और बैनर फाड़ने के साथ साउंड सिस्टम, झंड़े व कुर्सियां उठाकर फेंक दीं। हैलीपैड पर भी किसानों ने कब्जा कर लिया था। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां भांजी। कार्यक्रम में भाग लेने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को हेलीकॉप्टर से पहुंचना था लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर स्थिति को देखते हुए विशेष टीम ने उतरने की इजाजत नहीं दी। बवाल के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
लगभग सभी टोल करवाए फ्री, स्थानीय धरनों का रहा विशेष योगदान
किसान आंदोलन के दौरान एसकेएम के आह्वान पर पंजाब की तर्ज पर भी हरियाणा में किसानों ने टोल फ्री करवाकर सभी टोल पर स्थानीय धरने लगाए। सभी स्थानीय धरनों पर बैठे किसानों ने एसकेएम के हर फैसले को अपने-अपने क्षेत्र में मजबूती से लागू कर करवाया। चाहे वह भारत बंद का आह्वान हो, या रेल रोकने का या फिर रोड जाम करने का। स्थानीय धरने लगने से वो किसान भी आंदोलन में शामिल हो सके जो सीमाओं पर नहीं पहुंच पाए थे।
खापों का रहा विशेष सहयोग
किसान आंदोलन के दौरान हरियाणा की खाप पंचायतों का भी विशेष सहयोग रहा। खाप पंचायतें खुलकर आंदोलन के समर्थन में आई और एसकेएम के निर्णयों के अनुसार चलने का फैसला लिया। हरियाणा में आंदोनल के दौरान महापंचायतों में भी खापों का योगदान रहा।
टीकरी बॉर्डर पर दुष्कर्म और आदमी को जिंदा जलाने व कुंडली बॉर्डर पर निर्मम हत्या ने लगाया आंदोलन पर दाग
किसान आंदोलन के दौरान कुछ घटनाएं ऐसी भी हुई जिससे आंदोलन पर दाग लगा। टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन स्थल पर ही बंगाल की युवती से दुष्कर्म का मामला काफी चर्चा में आया। इसमें किसान नेताओं के कहने पर लड़की के पिता ने केस दर्ज करा दिया। वहीं आंदोलन स्थल पर ही हरियाणा के कुछ आंदोलनरत किसानों द्वारा एक स्थानीय निवासी को जिंदा जला दिया गया। यह घटना भी आंदोलन को धक्का लगाने वाली थी। इसके बाद सिंघु बॉर्डर पर बेअदबी के आरोप में निहंगों ने जिस तरह से हाथ काटकर लखबीर नामक व्यक्ति की निर्मम हत्या की और उसे बैरिकेड पर लटकाया गया, यह भी आंदोलन की छवि को धूमिल करने वाला कदम था।
कोरोना काल में बॉर्डरों से ऑक्सीजन सप्लाई हुई बाधित
किसान आंदोलन के कारण बहादुरगढ़ व सोनीपत में दिल्ली की सीमाएं बंद थी। इस कारण से आपात सेवाएं बाधित हुई। इस दौरान ऑक्सीजन सप्लाई में भी बाधा आई। रास्ते बंद रहने के कारण दिल्ली जाने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
नेताओं को झेलना पड़ा बार-बार विरोध
किसान आंदोलन के दौरान भाजना-जजपा नेताओं को बार-बार विरोध झेलना पड़ा। मई में कोविड अस्पताल का अस्पताल के उद्घाटन के बाद किसानों की पुलिस के साथ झड़प हो गई थी, जिसके बाद अनेक किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। किसान नेताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और बड़े राकेश टीकैत सहित बड़े नेता यहां पहुंचे। बाद में मुकदमे वापस लेने पर सहमति बन गई। इसी प्रकार जींद, फतेहाबाद, सिरसा, अंबाला आदि जिलों में भी निरंतर विरोध जारी रहा व कई बार टकराव की स्थिति बनी। हिसार में सांसद रामचंद्र जांगड़ा के विरोध के दौरान किसान कुलदीप सातरोड़ की तबीयत बिगड़ी तो भी काफी लंबा धरना चला। जजपा नेताओं को तो इस दौरान ज्यादा विरोध झेलना पड़ा। खासकर हिसार, फतेहाबाद, जींद, कैथल, यमुनानगर, सिरसा, अंबाला, रोहतक, चरखीदादरी, भिवानी, सहित जीटी बेल्ट के जिलों मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित जजपा एवं भाजपा नेताओं का जमकर विरोध किया गया। हालांकि दक्षिण हरियाणा और फरीदाबाद, गुरुग्राम क्षेत्र में आंदोलन का असर कम रहा।
भाजपा उपाध्यक्ष मनीष ग्रोवर को दो बार झेलना पड़ा विरोध
हरियाणा के रोहतक जिले में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर को किसान आंदोलन के दौरान दो बार बड़े स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा। पहली बार विरोध तब हुआ जब जुलाई में वह हिसार से किसी कार्यक्रम से लौट रहे थे। उनपर किसानों की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्होंने विरोध कर रही महिलाओं को अश्लील इशारा किया है। इसके विरोध में किसानों ने मनीष ग्रोवर के घर के पास धरना लगा दिया और ग्रोवर से माफी मंगवाने की बात पर अड़ गए। मनीष ग्रोवर का कहना था कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया है कि वह माफी मांगे, अगर किसी को गलतफहमी हुई है तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। कुछ दिन धरना चलने के बाद हरियाणा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने आखिरकार हिसार प्रकरण में वहां की प्रदर्शनकारी महिलाओं से माफी मांग ही ली। इसके बाद किसान व अन्य संगठनों ने धरना और महापंचायत खत्म करने का एलान कर दिया। ग्रोवर ने कहा है कि माफी न मांगना उनका निजी स्टैंड था। किसानों के आंदोलन के मामले में उन्होंने पार्टी के आदेश का पालन किया है।
उसके बाद 5 नवंबर को 2021 को एक बार फिर ग्रोवर किसानों के निशाने पर आ गए। किसान आंदोलन के बीच ग्रोवर और तमाम भाजपा नेता सुबह करीब साढ़े नौ बजे किलोई के प्राचीन शिव मंदिर में पीएम नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम देखने पहुंचे। सूचना मिलते ही किसान इकट्ठे होने लगे। सड़कें वाहन लगा कर बंद कर दीं। किसानों का कहना था कि संयुक्त किसान मोर्चा एलान कर चुका है कि आंदोलन के दौरान भाजपा, जजपा नेता गांवों में जाएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा। फिर भी ग्रोवर यहां आए। वह इसके लिए माफी मांगे और कहें कि जब तक आंदोलन चल रहा है गांव में नहीं आएंगे। उसके बाद दिन भर हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। ऐसा लग रहा था कि पुलिस भाजपाइयों को निकालने के लिए बल प्रयोग कर सकती है। इसी बीच सवा पांच बजे ग्रोवर हुड्डा खाप के नेताओं के साथ मंदिर की बालकनी पर आए और तीन बार बोले कि अब यहां नहीं आउंगा और हाथ जोड़ दिए। फिर पुलिस ने सारा ग्राउंड खाली करवाया और करीब पौने छह बजे भाजपा नेताओं को वहां से निकाला जा सका।