सेना की नई भर्ती योजना 'अग्निपथ' को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। कम से कम 14 राज्यों के युवा सड़क पर आ गए हैं। यूपी-बिहार जैसे राज्यों में विरोध हिंसक हो चुका है। यहां ट्रेनें फूंकी जा रहीं हैं। सरकारी दफ्तरों, भाजपा नेताओं और भाजपा कार्यालयों पर पथराव किया जा रहा है।
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सवाल उठता है कि आखिर यूपी-बिहार और राजस्थान में ही इसको लेकर ज्यादा बवाल क्यों हो रहा है? आइए आंकड़ों और विशेषज्ञों से समझते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी...
पहले जान लीजिए विरोध क्यों हो रहा है?
'अग्निपथ भर्ती योजना' के तहत युवाओं को चार साल की अवधि के लिए सेना में शामिल होने का मौका मिलेगा। भर्ती के लिए साढ़े 17 साल से 21 साल की आयु सीमा तय की गई है। हालांकि, इस साल उम्र सीमा में युवाओं को दो साल की छूट दी गई है। मतलब 2022 में होने वाली भर्ती में 23 साल तक के युवा भाग ले सकेंगे।
चार साल के सेवाकाल के बाद 75 फीसदी सैनिकों को ड्यूटी से मुक्त कर दिया जाएगा। अधिकतम 25 फीसदी इच्छुक जवानों को सेना में आगे भी सेवा देने का मौका मिलेगा। यह तब होगा जब रिक्तियां होंगी। जिन जवानों को सेवा से मुक्त किया जाएगा, उन्हें सशस्त्र बल व अन्य सरकारी नौकरियों में वरीयता मिलेगी। युवाओं का कहना है कि चार साल की नौकरी के बाद वह फिर बेरोजगार हो जाएंगे। इसलिए उन्हें पहले की तरह भर्ती का मौका दिया जाए। इसी को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है।
अब जानिए सबसे ज्यादा बिहार और यूपी में ही बवाल क्यों?
यूं तो अग्निपथ को लेकर कई राज्यों में बवाल हो रहा है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर यूपी और बिहार में देखने को मिल रहा है। राजस्थान में भी सड़क से लेकर रेलवे ट्रैक तक पर हजारों की संख्या में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि सेना के तीनों विंग थल, जल और वायु सेना में सबसे ज्यादा जवान यूपी और बिहार से आते हैं।
जवान देने के मामले में यूपी नंबर-1
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा यूपी के 2.14 लाख जवान उत्तर प्रदेश के हैं। इनमें 1.44 लाख युवा थल सेना में ओआर हैं, जबकि 18407 जेसीओ हैं। इस मामले में दूसरे नंबर पर राजस्थान है, जहां के 1.05 लाख युवा भारतीय सेना में अलग-अलग पदों पर तैनात हैं। तीसरे नंबर पर बिहार है। यहां के 1.02 लाख युवा सेना में हैं। चौथे नंबर पर पंजाब आता है। पंजाब के 94 हजार 723 युवा भारतीय सेना के तीनों अंगों में सेवा दे रहे हैं।
यूपी-बिहार में सबसे ज्यादा बवाल का कोई और कारण?
इसका जवाब जानने के लिए हमने बिहार के वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार झा से संपर्क किया। उनसे यही सवाल पूछा। उन्होंने कहा, 'दरअसल बिहार और यूपी के पूर्वांचल के हिस्से में नौजवान बचपन से ही सेना की तैयारी पर फोकस करते हैं। इसके लिए वह उतनी ही पढ़ाई करते हैं, जितनी सेना भर्ती के लिए जरूरी है। मतलब युवाओं का पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ सेना भर्ती पर रहता है। ऐसे में उन्हें टेंशन इस बात की है कि चार साल सेना में नौकरी करने के बाद वह बाद में क्या कर पाएंगे? क्योंकि उनकी पढ़ाई भी इस लायक नहीं होती है कि वह कुछ और कर सकें।'