2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव समेत अगले दो साल में 19 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी पार्टियों ने इन चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने भी बड़े स्तर पर रणनीति बनाई है। भाजपा इस बार उन मतदाताओं को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी जो परंपरागत रूप से उसके मतदाता नहीं माने जाते हैं। कहा जा रहा है कि अगर भाजपा की रणनीति कामयाब हुई तो आने वाले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में भाजपा को बड़ा फायदा हो सकता है।
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आइए भाजपा की रणनीति को समझते हैं। आखिर ये रणनीति क्या है? कैसे भाजपा इससे फायदे की उम्मीद कर रही है?
भाजपा की नई रणनीति क्या है?
भाजपा नए मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। खासतौर पर मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने के लिए काम किया जा रहा है। भाजपा की इस नई रणनीति को समझने के लिए हमने इसे समझने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के एक अल्पसंख्यक नेता से बात की।
उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं के लिए बनी रणनीति को दो बिंदुओं में समझाया…
1. पिछड़े मुस्लिमों को साथ लाने की कोशिश
मुस्लिम वर्ग के मतदाताओं में भाजपा पिछले मुस्लिम मतदाताओं पर फोकस कर रही है। भाजपा नेता कहते हैं कि मुस्लिम समुदाय में सैयद, शेख, पठान, मिर्जा, मुगल जैसी उच्च जातियों छोड़कर ज्यादातर जातियां पिछड़ी हुईं और गरीब हैं।
भाजपा इन्हीं पिछड़े और गरीब वर्ग के मुसलमानों को अपने साथ लाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए पार्टी ने एक सर्वे भी करवाया। इसके मुताबिक पिछड़े मुस्लिमों की राजनीति में मौजूदगी काफी कम है। भाजपा ने इस वर्ग से आने वाले मुस्लिमों को राजनीति की मुख्य धारा में शामिल करने की कोशिश कर रही है।
2. सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले मुस्लिमों को साथ लाने की कोशिश
भाजपा के सर्वे के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार की ज्यादातर योजनाओं का फायदा गरीब मुसलमानों को मिला है। अब भाजपा इसे भुनाने की कोशिश में है। भाजपा के मुस्लिम नेता घर-घर जाकर बताएंगे कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उनके लिए क्या-क्या किया है? ये बताने की कोशिश करेंगे कि जो पार्टियां आज तक आपसे वोट लेते आईं हैं, उन्होंने कुछ नहीं किया और जिन्हें आपने कभी वोट नहीं दिया, उन्होंने आपको रहने के लिए पक्का घर,
इलाज के लिए पांच लाख तक की व्यवस्था, अच्छी शिक्षा, बिजली, पानी, सिलेंडर तक की व्यवस्था कर दी।
भाजपा अपनी योजना को कैसे लागू करेगी?
यही सवाल हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से पूछा। उन्होंने कहा, 'भाजपा अपनी हर रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए भी हर तरह से कोशिश करती है। जिन मुसलमानों की कोई बात नहीं करता था, भाजपा उन्हें आगे बढ़ाने में जुटी है।'
प्रमोद आगे कहते हैं, 'भाजपा ने पसमांदा समाज के मुसलमान दानिश आजाद अंसारी को योगी कैबिनेट में जगह दिलाई। दानिश जिस जाति से आते हैं, उनकी संख्या यूपी में काफी अधिक है। ये पिछड़े वर्ग के मुसलमान होते हैं। ऐसे में भाजपा ने दानिश आजाद के जरिए पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने की उम्मीद कर रही है। इसी तरह गुलाम अली खटाना को जम्मू कश्मीर से राज्यसभा सांसद के लिए नामित किया गया है। गुलाम जिस खटाना जाति से हैं, उस जाति के लोग पहाड़ों पर भेड़-बकरी चराने का काम करते हैं। अब गुलाम अली के जरिए भाजपा ने पिछड़े मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने की उम्मीद कर रही है।'