उत्तराखंड के चमोली जिले में आज जो आपदा आई इसने एक बार फिर मनुष्य को प्रकृति के सामने बौना साबित कर दिया है। आज हम आपको उन घटनाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिन्होंने भारतीयों को हिला कर रख दिया। भारत की प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं में ओडिशा सुपर साइक्लोन (1999), गुजरात भूकंप (2001), हिंद महासागर सुनामी (2004), महाराष्ट्र सूखा (2013) और उत्तराखंड बाढ़ (2013) का नाम लिया जाता है।
ये हैं भारत में आई 10 बड़ी प्राकृतिक आपदाएं, कहीं पर भूकंप तो कहीं बाढ़ ने ढाया कहर
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उत्तराखंड के चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में रविवार को हिमखंड के टूटने से अलकनंदा और इसकी सहायक नदियों में अचानक आई विकराल बाढ़ के कारण हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी तबाही मची है। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि बाढ़ के बाद करीब 150 लोग लापता हैं। खबर लिखे जाने तक 10 शव मिले हैं तथा कुछ घायलों को बचाया गया है।
सितंबर 2014 में झेलम नदी का पानी लगातार मूसलाधार वर्षा के कारण काफी बढ़ गया था इसीलिए कश्मीर क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया था। भारतीय सेना ने इस क्षेत्र के फंसे हुए निवासियों की बहुत मदद की थी। इस बाढ़ में करीब 550 लोगों ने अपनी जान गंवाई और लगभग 5000 करोड़ से 6000 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था।
केदारनाथ आपदा, 2013
साल 2013 में उत्तराखंड में कुदरत की विनाशलीला ने कोहराम मचाया था। इस महाप्रलय को याद कर लोगों की रूह कांप जाती है। 16 व 17 जून 2013 को प्रकृति ने ऐसा कहर बरपाया कि उसमें अनेक जिंदगियां तबाह हो गई थीं। जब प्रकोप ने पहाड़ तक जाने वाली तमाम सड़कों को उखाड़ फेंका था। आलम यह था कि आपदा में बिछड़े अपनों को ढूंढने के लिए देश के कोने-कोने लोग से पहाड़ पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे और उसके कदम तीर्थनगरी में आकर ठहर जाते थे। वजह थी इससे आगे सड़कें पूरी तरह से छतिग्रस्त हो चुकी थीं।
हिंद महासागर में भूकंप से पैदा हुई सुनामी में भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह सहित तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश के तटीय क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हुए। लगभग 10 हजार लोग मारे गए और पांच हजार लापता हुए। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने व्यापक अभियान आपरेशन मदद चलाया था।
आपरेशन मदद के अलावा तीन अन्य अभियान विदेशों (श्रीलंका, मालद्वीव, इंडोनेशिया) के लिए भी चलाए गए। नौसेना के अभियान में 32 जहाज, 7 विमान, 20 हेलीकॉप्टर 15 दिन तक चलाए गए। सेना की राहत कार्य में मदद ली गई। 17 जनपदों में चले आपरेशन मदद से लगभग एक लाख लोगों को निकाला गया।