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भारत में आज भी गुलाम हैं 1 करोड़ 83 लाख लोग, ये हैं छह देशों के चौंकाने वाले आंकड़े

Tue, 04 Dec 2018 02:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Dec 2018 02:33 PM IST
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Even today there are 14.8 million people slaves in India

पूरी दुनिया में आज भी साढ़े चार करोड़ से ज्यादा लोग गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए हैं। ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स 2016 के मुताबिक दुनिया के 167 देशों में साढ़े चार करोड़ से ज्यादा लोग गुलाम हैं। चौंकाने वाले आंकड़े ये हैं कि दुनिया में हर चार गुलामों में एक बच्चा शामिल है। 


 

Even today there are 14.8 million people slaves in India

पश्चिमी अफ्रीका में आज भी गुलामी की समस्या लगातार बढ़ रही है। सेक्स तस्करी और जबरन शादी से लेकर बंधुआ मजदूरी गुलामी में आते हैं। वॉशिंग्टन पोस्ट के मुताबिक अमेरिका में 60 हजार लोग गुलाम हैं, तब जबकि कैदियों के श्रम को न गिना जाए।

वो छह देश जहां आज भी हजारों की तादाद में गुलाम हैं लोग

Even today there are 14.8 million people slaves in India

125 करोड़ की आबादी वाले भारत में सबसे ज्यादा लोग गुलाम हैं। भारत की 1.4 फीसदी आबादी यानी 1 करोड़ 83 लाख से ज्यादा लोग आधुनिक गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए हैं। यहां बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम, जबरन शादी, जिस्मफरोशी और अन्य रूपों में गुलामी की परंपरा जारी है। श्रम मंत्रालय का दावा है कि 2030 तक 1 करोड़ 80 लाख बंधक मजदूरों का छुड़ा लिया जाएगा।

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Even today there are 14.8 million people slaves in India

पश्चिमी अफ्रीका का मॉरिटैनिया देश जो कि घोषित इस्लामिक देश है, 1981 में दुनिया का वह आखिरी देश बना था जहां गुलामी को गैरकानूनी माना गया। इसके बावजूद 2007 तक यहां गुलामी के खिलाफ किसी तरह का कोई कानून पास नहीं हो सका। ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक यहां 1 फीसदी से ज्यादा आबादी गुलाम है और कई बच्चे गुलामी में पैदा हो रहे हैं। जबकि एसओएस स्लेवरी के मुताबिक यहां 20 फीसदी आबादी गुलाम है।

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Even today there are 14.8 million people slaves in India

उजबेकिस्तान की करीब 4 फीसदी आबादी गुलाम है। जीएसआई की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार ये आंकड़ा दिया गया है। यह देश कपास के उत्पादन के लिए मशहूर है और लेकिन इसी कपास में हर साल करीब 10 लाख लोग बंधुआ मजदूरों की तरह काम करने पर मजबूर हैं।

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