देश में आई आपदा हो या फिर दुश्मन की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात हो, किसी भी पथ पर इनके पैर नहीं डगमगाते। भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है और कुछ मुश्किल पड़ोसियों से घिरा हुआ है, लेकिन इन जाबांजों का सिर्फ एक ही लक्ष्य होता है, किसी भी कीमत पर देश और देश के नागिरकों की सुरक्षा करना।
ये हैं भारत की सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्सेस, जानिए इनके बारे में कुछ खास बातें
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मार्कोस मरीन कमांडो
मार्कोस इंडियन नेवी की एक स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है। मार्कोस मरीन कमांडो सबसे ट्रेंड और आधुनिक माने जाते हैं। मार्कोस (समुद्री कमांडो) जिसे 1987 में स्थापित किया गया था। मार्कोस कमांडो बनना आसान नहीं है। इसका प्रशिक्षण शायद दुनिया में सबसे मुश्किल है जिसमें कमांडो शारीरिक और मानसिक क्रूरता के लिए तैयार किए जाते हैं। इसका मकसद कांउटर टेररिज्म, डायरेक्ट एक्शन ऑन किसी जगह का खास निरीक्षण, अनकंवेंशनल वॉरफेयर, होस्टेंज रेस्यूकस, पर्सनल रिकवरी और इस तरह के खास ऑपरेशनों को पूरा करना है। देश के ये कमांडो जमीन, समुद्री और हवा में लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम होते हैं। मार्कोस को यूएस नेवी के स्पेशल फोर्स सील्स की तरह ट्रेंड किया गया है। मार्कोस ने कारगिल वार, ऑपरेशन लीच, ऑपरेशन स्वान जैसे खतरनाक मिशन को अंजाम दिया है।
गरुड़ कमांडो फोर्स
इंडियन एयरफोर्स ने 2004 में अपने एयर बेस की सुरक्षा के लिए आसमानी रक्षक गरुड़ फोर्स की स्थापना की थी। गरुड़ फोर्स हवाई युद्ध में माहिर मानी जाती है। अपने हुनर से इनको पता होता है कि कैसे दुश्मन की सीमाओं में घुसकर अपने साथियों को सफलतापूर्वक बाहर लाना है। गरुण कमांडो को युद्ध के दौरान दुश्मन की सीमा के पीछे काम करने के लिए ट्रेंड किया गया है। आर्मी फोर्सेस से अलग ये कमांडो काली टोपी पहनते हैं। बाकी फोर्स से अलग गरुड़ फोर्स सिर्फ एयरफोर्स के सैनिकों को ही गरुड़ कमांडो बनने का मौका देती है। इनकी ट्रेनिंग 72 हफ्तों की होती है, जबकि पूरी तरह से गरुड़ फोर्स में शामिल होने में लगभग 3 साल तक का समय लग जाता है। इनका लक्ष्य होता है ‘प्रहार से सुरक्षा’। यह हर तरह के प्रहार से देश की सुरक्षा करने के लिए तैयार रहते हैं।
कमांडो फोर्स कोबरा
कोबरा कमांडो भारत की सबसे बेहतरीन फोर्सेस में से एक है। कोबरा फोर्स केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की स्पेशल फोर्स है। इन्हें भेष बदलकर दुश्मन पर हमला करने की खास ट्रेनिंग दी जाती है। ये दुनिया के बेस्ट पैरामिलिट्री फोर्सेस में से एक है, इसके लिए इन्हें खास ‘गोरिल्ला ट्रेनिंग’ दी जाती है। यह घात लगाकर मारने में एक्सपर्ट होते है। इन्हें नक्सलियो से लड़ने के लिए भी भेजा जाता है। कोबरा फोर्स के कारनामे हमेशा गुप्त ही रहते हैं। दिल्ली में संसद और राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा के लिए भी इन्हें तैनात किया गया है।
घातक फोर्स
घातक फोर्स का काम है भारतीय थल सेना के साथ काम करना। यह एक 20 लोगों की पलटन होती है, जिसका काम है दुश्मन को चौकाना और फिर उस पर हमला करना है। यह थल सेना से आगे चलकर काम करते हैं, ताकि सेना को आने वाले खतरों का पहले ही पता चल जाए। यह दुश्मन के इलाके में छापा मारते हुए जाते हैं। यही नहीं, बड़े-बड़े जंगी हथियारों से यह दुश्मन पर दूर बैठे हुए भी वार कर सकते हैं। कारगिल की जंग में भी इनका सहयोग रहा था। इनकी ट्रेनिंग बहुत ही कठिन व खतरनाक होती है। इन्हें पर्वतारोहण और 50-60 किलोमीटर तेजी से चलने की ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें ट्रेनिग के दौरान हाथों में बंदूक पकड़कर और पीठ पर 20 किलो वजन लेकर मीलों दौड़ाया जाता है।