फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जानिए कहां से आते है नीलम, नीलोफर और वरदा जैसे चक्रवातों के नाम

Tue, 13 Dec 2016 12:26 PM IST
बीबीसी हिन्दी. कॉम
बीबीसी हिन्दी. कॉम Updated Tue, 13 Dec 2016 12:26 PM IST
विज्ञापन
Know from where the 'Sapphire', 'Nenuphar' and the name of Varda as cyclones
चेन्नई से नेल्लोर तक लगभग 90 किलोमीटर तक फैले वरदा के कारण तटवर्ती इलाके में तेज हवाएँ चल रही हैं। चेन्नई के कई इलाकों में बीजली गुल है और जन-जीवन ठप हो गया है। तमिलनाडु में दो लोगों के मारे जाने की खबर मिली है। वरदा अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है गुलाब। लेकिन चक्रवात के नाम रखे कैसे जाते हैं? पढ़िए बीबीसी संवाददाता सौतिक बिस्वास का ये 2014 का लेख जिसमें उन्होंने बताया है चक्रवात के नाम रखे कैसे जाते हैं- 1953 से मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएमओ) तूफानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता रहा है।

 
Know from where the 'Sapphire', 'Nenuphar' and the name of Varda as cyclones
डब्लूएमओ जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है।लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा गया था। वजह ये थी कि ऐसा करना काफी विवादास्पद काम था। भारत के चक्रवात चेतावनी केंद्र के अधिकारी डॉक्टर एम माहापात्रा के मुताबिक इसके पीछे कारण यह था कि जातीय विविधता वाले इस क्षेत्र में काफी सावधान और निष्पक्ष रहने की जरूरत थी ताकि यह लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए। साल 2004 में ये स्थिति तब बदल गई, जब डब्लूएमओ की अगुवाई वाला। अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दिया गया और संबंधित देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम खुद रखने को कहा गया।
 
Know from where the 'Sapphire', 'Nenuphar' and the name of Varda as cyclones
इसके बाद भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने एक बैठक में हिस्सा लिया। इन देशों ने 64 नामों की एक सूची सौंपी। हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए। यह सूची हर देश के वर्ण क्रम के अनुसार है। इस क्षेत्र में जून 2014 में आए चक्रवात 'नानुक' का नाम म्यांमार ने रखा था। सदस्य देशों के लोग भी नाम सुझा सकते हैं। मसलन भारत सरकार इस शर्त पर लोगों की सलाह मांगती है कि नाम छोटे, समझ आने लायक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ न हों। साल 2013 में भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर आए पायलिन चक्रवात का नाम थाईलैंड ने रखा था।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Know from where the 'Sapphire', 'Nenuphar' and the name of Varda as cyclones
इस इलाके में आए एक अन्य चक्रवात 'नीलोफर' का नाम पाकिस्तान ने रखा था। पाकिस्तान ने नवंबर 2012 में जिस चक्रवात का नाम रखा था उसे 'नीलम' कहते हैं। डॉक्टर महापात्रा के मुताबिक साल 2014 में आया चक्रवात हुदहुद इस सूची का 34वां नाम था। इस सूची में शामिल भारतीय नाम काफी आम नाम हैं, जैसे मेघ, सागर, और वायु। चक्रवात विशेषज्ञों का पैनल हर साल मिलता है और जरूरत पड़ने पर सूची फिर से भरी जाती है।ऐसा नहीं कि 64 नामों की इस सूची को लेकर कोई विवाद नहीं रहा। 2013 में श्रीलंका की ओर से रखे गए 'महासेन' नाम को लेकर श्रीलंका के राष्ट्रवादियों और अधिकारियों ने विरोध जताया था जिसे बाद में बदलकर 'वियारु' कर दिया गया। उनके मुताबिक राजा महासेन श्रीलंका में शांति और समृद्धि लाए थे। इसलिए आपदा का नाम उनके नाम पर रखना गलत है।

 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed