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Maharashtra : क्या फिर से भाजपा और उद्धव ठाकरे के बीच बढ़ रहीं नजदीकियां? दोनों तरफ से आए ये चार बड़े संकेत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 12 Jul 2022 01:20 PM IST
सार
उद्धव ठाकरे और भारतीय जनता पार्टी के बीच दूरियां घटने के संकेत हैं। पिछले एक हफ्ते के अंदर महाराष्ट्र की राजनीति तेजी से बदली है।
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उद्धव ठाकरे, देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की सरकार बनने के बाद उद्धव ठाकरे और भारतीय जनता पार्टी के बीच दूरियां घटने के संकेत हैं। पिछले एक हफ्ते के अंदर महाराष्ट्र की राजनीति तेजी से बदली है। दोनों तरफ से चार संकेत आए, जिनसे ये कयास लगना शुरू हो गया कि उद्धव ठाकरे और भाजपा की नजदीकियां फिर से बढ़ने लगीं हैं। आइए जानते हैं...
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महाराष्ट्र में सियासी घमासान
- फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए शिवसेना में अब तक क्या-क्या हुआ?
2019 में महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव हुआ था। 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। देवेंद्र फडणवीस की अगुआई में पार्टी ने 105 सीटों पर जीत हासिल की। उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 42 सीटें मिलीं थीं। बाकी अन्य पर छोटे दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर शिवसेना और भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर ठन गई। बात इतनी बढ़ी की शिवसेना ने कांग्रेस, एनसीपी के साथ मिलकर सरकार का गठन कर लिया। उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए। ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद भाजपा को विपक्ष में रहना पड़ा। ढाई साल बाद जून 2022 में एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर 40 शिवसैनिक विधायकों ने बगावत कर दिया। अंत में शिंदे ने बागी 40 विधायकों और भाजपा के समर्थन से खुद सरकार बना ली। शिंदे अब मुख्यमंत्री हैं। उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देना पड़ा।
2019 में महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव हुआ था। 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। देवेंद्र फडणवीस की अगुआई में पार्टी ने 105 सीटों पर जीत हासिल की। उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 42 सीटें मिलीं थीं। बाकी अन्य पर छोटे दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर शिवसेना और भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर ठन गई। बात इतनी बढ़ी की शिवसेना ने कांग्रेस, एनसीपी के साथ मिलकर सरकार का गठन कर लिया। उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए। ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद भाजपा को विपक्ष में रहना पड़ा। ढाई साल बाद जून 2022 में एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर 40 शिवसैनिक विधायकों ने बगावत कर दिया। अंत में शिंदे ने बागी 40 विधायकों और भाजपा के समर्थन से खुद सरकार बना ली। शिंदे अब मुख्यमंत्री हैं। उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देना पड़ा।
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देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे
- फोटो : अमर उजाला
कैसे भाजपा और उद्धव की बढ़ रही नजदीकियां?
यूं तो एकनाथ शिंदे गुट, ठाकरे गुट और भाजपा की तरफ से कई तरह की बयानबाजी हो रही है, लेकिन ये चार बिंदु इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अब धीरे-धीरे उद्धव और भाजपा की नजदीकियां बढ़ने लगीं हैं। इनमें दो इशारे उद्धव गुट की तरफ से आए तो दो भाजपा और शिंदे गुट की तरफ से। पहले जानिए उद्धव गुट ने कैसे दिया संकेत...?
यूं तो एकनाथ शिंदे गुट, ठाकरे गुट और भाजपा की तरफ से कई तरह की बयानबाजी हो रही है, लेकिन ये चार बिंदु इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अब धीरे-धीरे उद्धव और भाजपा की नजदीकियां बढ़ने लगीं हैं। इनमें दो इशारे उद्धव गुट की तरफ से आए तो दो भाजपा और शिंदे गुट की तरफ से। पहले जानिए उद्धव गुट ने कैसे दिया संकेत...?
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : अमर उजाला
1. मुर्मू को समर्थन : शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को सांसदों की बैठक बुलाई थी। इसमें राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा हुई। शिवसेना के पास 18 सांसद हैं, लेकिन बैठक में 10 ही पहुंचे। खैर, ज्यादातर सांसदों की राय लेते हुए उद्धव ठाकरे ने फैसला किया कि इस बार राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन करेगी। शिवसेना के ज्यादातर विधायक एकनाथ शिंदे के साथ हैं। शिंदे गुट पहले से ही भाजपा को सपोर्ट कर रही है। ऐसे में साफ है कि शिवसेना के विधायक और सांसद दोनों द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में ही वोट करेंगे।
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संजय राउत
- फोटो : Social media
2. संजय राउत का ट्वीट : सांसदों के साथ बैठक के बाद आज सुबह संजय राउत ने एक ट्वीट किया। ये ट्वीट उन्होंने उद्धव ठाकरे, प्रियंका गांधी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को टैग किया है। इसमें लिखा कि 'अब नहीं कोई बात खतरे की... अब सभी को सभी से खतरा है।' सियासी गलियारे में ये ट्वीट चर्चा का विषय है। माना जा रहा है कि सोमवार को सांसदों की हुई बैठक में संजय राउत इकलौते सदस्य थे जो विपक्ष के उम्मीदवार को सपोर्ट करना चाहते थे, लेकिन उद्धव नहीं मानें।
महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप रायमुलकर कहते हैं, 'बैठक में संजय ने काफी कोशिश की, लेकिन उद्धव ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने पर ही सहमति दी। ऐसे में अब संजय को ये लगने लगा है कि उद्धव भाजपा के प्रति नरम होने लगे हैं। ये बात उन्हें पच नहीं रही है। इस ट्वीट का एक ये मतलब हो सकता है।' आगे पढ़िए शिंदे गुट और भाजपा ने कैसे दिए संकेत...?
महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप रायमुलकर कहते हैं, 'बैठक में संजय ने काफी कोशिश की, लेकिन उद्धव ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने पर ही सहमति दी। ऐसे में अब संजय को ये लगने लगा है कि उद्धव भाजपा के प्रति नरम होने लगे हैं। ये बात उन्हें पच नहीं रही है। इस ट्वीट का एक ये मतलब हो सकता है।' आगे पढ़िए शिंदे गुट और भाजपा ने कैसे दिए संकेत...?