पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला कैबिनेट विस्तार आज (बुधवार) शाम हुआ। इससे पहले अब तक पुराने मंत्रियों के इस्तीफों का दौर शुरू हो गया और कुल 12 मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिनमें रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. हर्षवर्धन, रमेश पोखरियाल निशंक, थावरचंद गहलोत, बाबुल सुप्रियो और संतोष गंगवार समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि इन मंत्रियों को आखिर अपना पद क्यों छोड़ना पड़ गया?
2 of 10
डॉ. हर्षवर्धन
- फोटो : ANI
कोरोना की लहर में डूबे डॉ. हर्षवर्धन
बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने की वजह से उनका पद छीन लिया गया। गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मोदी सरकार सवालों के घेरे में आ गई, जिसका नुकसान डॉ. हर्षवर्धन को उठाना पड़ा। उनके पास विज्ञान और तकनीक मंत्रालय भी था। ऐसे में हर्षवर्धन के इस्तीफे से दो भारी-भरकम मंत्रालय खाली हो गए।
3 of 10
देबोश्री चौधरी
- फोटो : ANI
बंगाल के लिए देबोश्री का इस्तीफा?
पश्चिम बंगाल की रायगंज लोकसभा सीट से भाजपा सांसद देबोश्री चौधरी ने भी अपना पद छोड़ दिया है। वह महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री थीं। सूत्रों का दावा है कि पश्चिम बंगाल भाजपा में उन्हें अहम पद दिया जा सकता है, जिसके चलते उनसे इस्तीफा लिया गया।
4 of 10
रमेश पोखरियाल निशंक
- फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य कारणों से हटाए गए निशंक
उत्तराखंड की हरिद्वार लोकसभा सीट से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को भी इस्तीफा देने के लिए कहा गया है। उनके पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय का प्रभार था। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते निशंक को हटाया गया। दरअसल, कुछ दिन पहले उन्हें कोरोना हो गया था, जिसके चलते वह करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे। उस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में हालात इतने ज्यादा बिगड़ गए कि सीबीएसई पर फैसला लेने के लिए पीएम मोदी को खुद आगे आना पड़ गया था। गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति पीएम मोदी के दिल के काफी करीब है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय उसका श्रेय सरकार को नहीं दिला पाया, जिसका नतीजा उन्हें कुर्सी गंवाकर चुकाना पड़ा।
बाबुल सुप्रियो को भारी पड़ी नाराजगी
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद बाबुल सुप्रियो ने भी इस्तीफा दे दिया। वह पर्यावरण मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। दावा किया जा रहा है कि सुप्रियो पार्टी से नाराज चल रहे थे। इसके पीछे पश्चिम बंगाल विधानसभा को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिसमें बाबुल सुप्रियो मैदान में उतरे थे, लेकिन 50 हजार वोटों से हार गए।