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Noida Twin Towers: ट्विन टावर गिरने के बाद लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ेगा? डॉक्टर्स की टीम कर रही स्टडी
Sat, 27 Aug 2022 06:28 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sat, 27 Aug 2022 06:28 PM IST
सार
ट्विन टावर के एक से दो किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग ज्यादा परेशान हैं। डॉक्टर्स भी अब ऐसे लोगों पर स्टडी करने में जुट गए हैं। डॉक्टर्स ये पता लगाने की कोशिश करेंगे की अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों की सेहत पर कितना असर पड़ेगा? क्या-क्या दिक्कतें आएंगी?
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ट्विन टावर
- फोटो : अमर उजाला
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नोएडा में रविवार दोपहर 2:30 बजे सुपरटेक बिल्डर के ट्विन टावर गिरा दिए जाएंगे। इसमें पहली इमारत 32 तो दूसरी 29 मंजिला है। इन गगनचुंबी इमारतों के ध्वस्त होने में महज 12 सेकेंड लगेंगे, लेकिन इसके बाद धूल का जो गुबार उठेगा उसको लेकर हर कोई चिंतित है।
स्थानीय लोगों की डॉक्टर्स जांच कर रहे
- फोटो : अमर उजाला
स्टडी में क्या-क्या करेंगे डॉक्टर्स?
ये समझने के लिए हमने डॉ. आशीष जैन से बात की। उन्होंने कहा, ' ये स्टडी दो चरण में पूरी होगी। पहला चरण ट्विन टावर गिरने से पहले पूरा किया जा रहा है और दूसरा टावर के गिरने के बाद पूरा होगा।'
डॉ. जैन के अनुसार, इसके लिए शनिवार को आसपास की दो सोसायटी में रहने वाले 50 लोगों के सेहत की जांच की गई। इन सभी लोगों का पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) कराया गया है। इस टेस्ट से मालूम चलता है कि इंसान को सांस लेने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है। फेफड़े ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं? अस्थमा या किसी अन्य तरह की कोई सांस की बीमारी तो नहीं है?'
दूसरे चरण में बुधवार यानी 31 अगस्त को फिर से इन्हीं लोगों की जांच होगी। इन सभी 50 लोगों का पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) होगा। इसके बाद दोनों टेस्ट की वैल्यू रिपोर्ट की तुलना की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि टावर गिरने से पहले इन लोगों के फेफड़े कैसे काम कर रहे थे और बाद में इसपर कितना और किस तरह का असर पड़ा?
डॉ. जैन ने बताया कि इसके अलावा एक गूगल फॉर्म भी टावर के आसपास रहने वाले लोगों से भरवाया जा रहा है। इसमें कई पॉइंट्स दिए गए हैं। मसलन लोगों से पूछा जा रहा है कि अभी उनका स्वास्थ्य कैसा है? किस-किस तरह की दिक्कत है? क्या स्थिति है? सांस लेने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही? हवा और आसपास का वातावरण कैसा है? ऐसे तमाम सवाल पूछे जा रहे हैं। रविवार को जब ट्विन टावर गिर जाएगा तो फिर से एक गूगल फॉर्म इन्हीं लोगों से भरवाया जाएगा। उसमें टावर गिरने के बाद होने वाली समस्याओं और तकलीफों के बारे में पूछा जाएगा।
ये समझने के लिए हमने डॉ. आशीष जैन से बात की। उन्होंने कहा, ' ये स्टडी दो चरण में पूरी होगी। पहला चरण ट्विन टावर गिरने से पहले पूरा किया जा रहा है और दूसरा टावर के गिरने के बाद पूरा होगा।'
डॉ. जैन के अनुसार, इसके लिए शनिवार को आसपास की दो सोसायटी में रहने वाले 50 लोगों के सेहत की जांच की गई। इन सभी लोगों का पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) कराया गया है। इस टेस्ट से मालूम चलता है कि इंसान को सांस लेने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है। फेफड़े ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं? अस्थमा या किसी अन्य तरह की कोई सांस की बीमारी तो नहीं है?'
दूसरे चरण में बुधवार यानी 31 अगस्त को फिर से इन्हीं लोगों की जांच होगी। इन सभी 50 लोगों का पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) होगा। इसके बाद दोनों टेस्ट की वैल्यू रिपोर्ट की तुलना की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि टावर गिरने से पहले इन लोगों के फेफड़े कैसे काम कर रहे थे और बाद में इसपर कितना और किस तरह का असर पड़ा?
डॉ. जैन ने बताया कि इसके अलावा एक गूगल फॉर्म भी टावर के आसपास रहने वाले लोगों से भरवाया जा रहा है। इसमें कई पॉइंट्स दिए गए हैं। मसलन लोगों से पूछा जा रहा है कि अभी उनका स्वास्थ्य कैसा है? किस-किस तरह की दिक्कत है? क्या स्थिति है? सांस लेने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही? हवा और आसपास का वातावरण कैसा है? ऐसे तमाम सवाल पूछे जा रहे हैं। रविवार को जब ट्विन टावर गिर जाएगा तो फिर से एक गूगल फॉर्म इन्हीं लोगों से भरवाया जाएगा। उसमें टावर गिरने के बाद होने वाली समस्याओं और तकलीफों के बारे में पूछा जाएगा।
twin tower
- फोटो : अमर उजाला
कैसे गिराया जाएगा ट्विन टावर?
नोएडा में सुपरटेक बिल्डर के ट्विन टावर का ध्वस्तीकरण 28 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे महज 12 सेंकेंड में होगा। इससे ठीक 15 मिनट पहले एक्सप्रेसवे पर डायवर्जन व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। नोएडा एक्सप्रेसवे पर ब्लास्ट के बाद धूल हटने तक वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से बंद रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने शुक्रवार शाम इसके लिए डायवर्जन प्लान जारी कर दिया है। लोग गूगल मैप का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। इस पर ट्विन टावर व एक्सप्रेसवे पर डायवर्जन की व्यवस्था को अपडेट किया गया है। ट्विन टावर को जोड़ने वाले सभी मार्गों पर डायवर्जन लागू कर दिया गया है।
रविवार सुबह सात बजे से इन मार्गों पर और सख्ती बरती जाएगी। सात बजे के बाद ट्विन टावर की तरफ किसी को नहीं जाने दिया जाएगा। हालांकि, टावर के आसपास की दो सोसाइटी एटीएस विलेज व एमराल्ड कोर्ट में रहने वाले लोगों को बाहर आने की इजाजत होगी।
नोएडा में सुपरटेक बिल्डर के ट्विन टावर का ध्वस्तीकरण 28 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे महज 12 सेंकेंड में होगा। इससे ठीक 15 मिनट पहले एक्सप्रेसवे पर डायवर्जन व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। नोएडा एक्सप्रेसवे पर ब्लास्ट के बाद धूल हटने तक वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से बंद रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने शुक्रवार शाम इसके लिए डायवर्जन प्लान जारी कर दिया है। लोग गूगल मैप का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। इस पर ट्विन टावर व एक्सप्रेसवे पर डायवर्जन की व्यवस्था को अपडेट किया गया है। ट्विन टावर को जोड़ने वाले सभी मार्गों पर डायवर्जन लागू कर दिया गया है।
रविवार सुबह सात बजे से इन मार्गों पर और सख्ती बरती जाएगी। सात बजे के बाद ट्विन टावर की तरफ किसी को नहीं जाने दिया जाएगा। हालांकि, टावर के आसपास की दो सोसाइटी एटीएस विलेज व एमराल्ड कोर्ट में रहने वाले लोगों को बाहर आने की इजाजत होगी।
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twin tower
- फोटो : अमर उजाला
टावरों के 9600 होल में विस्फोटक सामग्री
आईआईडीसी ने बताया कि ट्विन टावर को ध्वस्त किए जाने के लिए सीएसआईआर-सीबीआरआई के सहयोग से मुंबई की मेसर्स एडिफाइस इंजीनियरिंग एजेंसी का चयन किया गया है। एजेंसी ने पूर्व में कोचीन में ऐसी ही एक इमारत के सफलतापूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है। इसे गिराने के लिए वॉटर फॉल इम्प्लोजन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जोकि डिजाइन के अनुसार मनचाही दिशा में भवन को गिराने के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है।
पिछले 10 अप्रैल को एक टेस्ट ब्लास्ट भी किया गया था, जिसके नतीजों के आधार पर सीबीआरआई ने संशोधित ब्लास्ट डिजाइन तैयार की है। टावर को ध्वस्त करने के लिए करीब 3700 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री को स्टोर किया गया है। दोनों टावर में 9600 होल किए गए हैं, जहां विस्फोटक को रखा जा चुका है और अब इन्हें चार्ज किया जा रहा है। 28 अगस्त को दोपहर में ठीक 2:30 बजे एक बटन दबाने के महज 12 सेकेंड के भीतर दोनों टावर जमींदोज हो जाएगी।
आईआईडीसी ने बताया कि ट्विन टावर को ध्वस्त किए जाने के लिए सीएसआईआर-सीबीआरआई के सहयोग से मुंबई की मेसर्स एडिफाइस इंजीनियरिंग एजेंसी का चयन किया गया है। एजेंसी ने पूर्व में कोचीन में ऐसी ही एक इमारत के सफलतापूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है। इसे गिराने के लिए वॉटर फॉल इम्प्लोजन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जोकि डिजाइन के अनुसार मनचाही दिशा में भवन को गिराने के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है।
पिछले 10 अप्रैल को एक टेस्ट ब्लास्ट भी किया गया था, जिसके नतीजों के आधार पर सीबीआरआई ने संशोधित ब्लास्ट डिजाइन तैयार की है। टावर को ध्वस्त करने के लिए करीब 3700 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री को स्टोर किया गया है। दोनों टावर में 9600 होल किए गए हैं, जहां विस्फोटक को रखा जा चुका है और अब इन्हें चार्ज किया जा रहा है। 28 अगस्त को दोपहर में ठीक 2:30 बजे एक बटन दबाने के महज 12 सेकेंड के भीतर दोनों टावर जमींदोज हो जाएगी।
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twin tower
- फोटो : अमर उजाला
50 से 70 मीटर की दूरी से दबाया जाएगा बटन
ब्लास्टर चेतन दत्ता का कहना है कि हम ट्विन टावर से लगभग 50-70 मीटर दूर होंगे। वहीं से बटन दबाया जाएगा। इसमें कोई खतरा नहीं होगा और पूरा यकीन है कि टावर सही तरीके से ढह जाएंगे। यह एक सरल प्रक्रिया है। हम डायनेमो से करंट उत्पन्न करते हैं और फिर बटन दबाते हैं, जो 9 सेकंड के भीतर सभी शॉक ट्यूबों में डेटोनेटर को प्रज्वलित कर देगा और बिल्डिंग जमींदोज हो जाएगी। लगभग 100 मीटर ऊंची इमारत को गिराने में लगे भारतीय और विदेशी ब्लास्टर की एक टीम को छोड़कर टावर के चारों ओर 500 मीटर के दायरे में किसी के भी आने की अनुमति नहीं होगी।
ब्लास्टर चेतन दत्ता का कहना है कि हम ट्विन टावर से लगभग 50-70 मीटर दूर होंगे। वहीं से बटन दबाया जाएगा। इसमें कोई खतरा नहीं होगा और पूरा यकीन है कि टावर सही तरीके से ढह जाएंगे। यह एक सरल प्रक्रिया है। हम डायनेमो से करंट उत्पन्न करते हैं और फिर बटन दबाते हैं, जो 9 सेकंड के भीतर सभी शॉक ट्यूबों में डेटोनेटर को प्रज्वलित कर देगा और बिल्डिंग जमींदोज हो जाएगी। लगभग 100 मीटर ऊंची इमारत को गिराने में लगे भारतीय और विदेशी ब्लास्टर की एक टीम को छोड़कर टावर के चारों ओर 500 मीटर के दायरे में किसी के भी आने की अनुमति नहीं होगी।