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रणभूमि दर्शन: 13000 फीट की ऊंचाई पर बेटियों का कैफे, महिला सशक्तिकरण की मिसाल; पर्यटन-आजीविका को एक साथ जोड़ा
एन. अर्जुन, अमर उजाला, गंगटोक
Published by: Pavan
Updated Mon, 11 May 2026 02:07 AM IST
सार
यह पहल भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर द्वारा सिविल प्रशासन और स्थानीय समुदाय के सहयोग से शुरू की गई है। इसे ‘रणभूमि दर्शन’ पहल के तहत विकसित किया गया है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसका संचालन पूरी तरह स्थानीय बेटियों के एक समूह द्वारा किया जा रहा है।
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13000 फीट की ऊंचाई पर बेटियों का कैफे
- फोटो : अमर उजाला
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सीमावर्ती और अत्यंत दुर्गम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण, पर्यटन और आजीविका को एक साथ जोड़ने की दिशा में भारतीय सेना ने एक उल्लेखनीय पहल की है। पूर्वी सिक्किम में करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बाबा हरभजन सिंह मंदिर के निकट स्थानीय बेटियों द्वारा संचालित एक कैफे शुरू किया गया है, जो अब न केवल पर्यटकों की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी भी लिख रहा है।
बेटियों का कैफे
- फोटो : अमर उजाला
गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टि. कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह पहल भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर द्वारा सिविल प्रशासन और स्थानीय समुदाय के सहयोग से शुरू की गई है। इसे ‘रणभूमि दर्शन’ पहल के तहत विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
स्थानीय बेटियों को मिला रोजगार
लेफ्टि. कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसका संचालन पूरी तरह स्थानीय बेटियों के एक समूह द्वारा किया जा रहा है। कैफे में काम करने वाली ये महिलाएं अब पर्यटन से सीधे जुड़कर स्थायी आय अर्जित कर रही हैं। इससे पहले इन दुर्गम इलाकों में रोजगार के सीमित अवसर थे, लेकिन इस पहल ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता दिया है।
स्थानीय बेटियों को मिला रोजगार
लेफ्टि. कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसका संचालन पूरी तरह स्थानीय बेटियों के एक समूह द्वारा किया जा रहा है। कैफे में काम करने वाली ये महिलाएं अब पर्यटन से सीधे जुड़कर स्थायी आय अर्जित कर रही हैं। इससे पहले इन दुर्गम इलाकों में रोजगार के सीमित अवसर थे, लेकिन इस पहल ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता दिया है।
बेटियों का कैफे- महिला सशक्तिकरण की मिसाल
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटन और सुविधा दोनों को बढ़ावा
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह कैफे एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में यात्रा करने वाले लोगों को अब भोजन और आराम की बेहतर सुविधा मिल रही है। इससे न केवल पर्यटकों का अनुभव बेहतर हो रहा है,बल्कि क्षेत्र में आने वाले यात्रियों की संख्या में भी वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
सेना और नागरिक प्रशासन का संयुक्त मॉडल
लेफ्टि. कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह परियोजना सेना और नागरिक प्रशासन के सफल समन्वय का उदाहरण है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी इस तरह के मॉडल यह दर्शाते हैं कि यदि योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास संभव है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह कैफे एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में यात्रा करने वाले लोगों को अब भोजन और आराम की बेहतर सुविधा मिल रही है। इससे न केवल पर्यटकों का अनुभव बेहतर हो रहा है,बल्कि क्षेत्र में आने वाले यात्रियों की संख्या में भी वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
सेना और नागरिक प्रशासन का संयुक्त मॉडल
लेफ्टि. कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह परियोजना सेना और नागरिक प्रशासन के सफल समन्वय का उदाहरण है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी इस तरह के मॉडल यह दर्शाते हैं कि यदि योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास संभव है।
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रणभूमि दर्शन: 13000 फीट की ऊंचाई पर बेटियों का कैफे
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा
यह पहल केवल एक कैफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों, संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। आसपास के गांवों के लोगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ मिलने लगा है। इस पूरी पहल को महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल माना जा रहा है, जहां कठिन मौसम, ऊंचाई और सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय बेटियां आत्मनिर्भरता और विकास की नई कहानी गढ़ रही हैं।
यह पहल केवल एक कैफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों, संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। आसपास के गांवों के लोगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ मिलने लगा है। इस पूरी पहल को महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल माना जा रहा है, जहां कठिन मौसम, ऊंचाई और सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय बेटियां आत्मनिर्भरता और विकास की नई कहानी गढ़ रही हैं।