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Rajasthan: गहलोत से नाराज हुईं सोनिया गांधी, क्यों मजबूत हुई पायलट की मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी? जानें
Tue, 27 Sep 2022 01:55 PM IST
हिमांशु मिश्रा
रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 27 Sep 2022 01:55 PM IST
सार
राजस्थान में पर्यवेक्षक बनकर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे आज अपनी रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंपेंगे। इसके पहले रविवार को दोनों नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्षा से मुलाकात कर स्थिति के बारे में बताया।
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राजस्थान कांग्रेस में घमासान
- फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की लड़ाई दिल्ली पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को अब अंतिम फैसला लेना है। अटकलें हैं कि पूरे विवाद के दौरान सचिन पायलट गुट की चुप्पी का बड़ा राजनीतिक फायदा पायलट को मिल सकता है। दूसरी ओर कहा जा रहा है कि इस पूरे विवाद के चलते अशोक गहलोत से सोनिया गांधी काफी नाराज हैं।
राजस्थान कांग्रेस में घमासान
- फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए अब तक क्या-क्या हुआ?
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस हाईकमान नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहता था। इसके लिए गहलोत की जगह किसी दूसरे को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाना था। नए नेता के चुनाव के लिए सोनिया गांधी ने वरिष्ठ नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को पर्यवेक्षक बनाकर रविवार को राजस्थान भेजा। रविवार शाम कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी थी। इसमें पर्यवेक्षक एक-एक करके सारे विधायकों से मिलने वाले थे। बैठक से पहले अशोक गहलोत खेमे के विधायकों ने बागी रूख अख्तियार कर लिया।
विधायक दल की बैठक की बजाय गहलोत समर्थक विधायक मंत्री शांति धारीवाल के घर पहुंच गए। इसके बाद सभी विधायकों ने स्पीकार से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, ये इस्तीफा अभी तक स्पीकर ने मंजूर नहीं किया है। ये विधायक सचिन पायलट या उनके खेमे से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं। इन विधायकों की संख्या 82 बताई जा रही है।
विधायकों के रुख के चलते माकन और खड़गे को बिना बैठक के ही सोमवार को वापस दिल्ली आना पड़ा। दिल्ली पहुंचकर माकन और खड़गे ने सोनिया गांधी से पूरी स्थिति के बारे में जानकारी दी और गहलोत खेमे के अनुशासनहीनता को लेकर भी नाराजगी प्रकट की।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस हाईकमान नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहता था। इसके लिए गहलोत की जगह किसी दूसरे को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाना था। नए नेता के चुनाव के लिए सोनिया गांधी ने वरिष्ठ नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को पर्यवेक्षक बनाकर रविवार को राजस्थान भेजा। रविवार शाम कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी थी। इसमें पर्यवेक्षक एक-एक करके सारे विधायकों से मिलने वाले थे। बैठक से पहले अशोक गहलोत खेमे के विधायकों ने बागी रूख अख्तियार कर लिया।
विधायक दल की बैठक की बजाय गहलोत समर्थक विधायक मंत्री शांति धारीवाल के घर पहुंच गए। इसके बाद सभी विधायकों ने स्पीकार से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, ये इस्तीफा अभी तक स्पीकर ने मंजूर नहीं किया है। ये विधायक सचिन पायलट या उनके खेमे से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं। इन विधायकों की संख्या 82 बताई जा रही है।
विधायकों के रुख के चलते माकन और खड़गे को बिना बैठक के ही सोमवार को वापस दिल्ली आना पड़ा। दिल्ली पहुंचकर माकन और खड़गे ने सोनिया गांधी से पूरी स्थिति के बारे में जानकारी दी और गहलोत खेमे के अनुशासनहीनता को लेकर भी नाराजगी प्रकट की।
अशोक गहलोत, सोनिया गांधी और सचिन पायलट
- फोटो : Amar Ujala Digital
गहलोत से क्यों नाराज हुईं सोनिया गांधी?
बताया जा रहा है कि जब अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी तो वह नाराज हो गईं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सोनिया गांधी ने इस दौरान कहा कि वह अशोक गहलोत जी से ऐसी अपेक्षा नहीं करती थीं। इसके बाद सोनिया गांधी ने माकन और खड़गे से इस पूरे मामले की विस्तृत लिखित रिपोर्ट मांगी।
कहा जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस हाईकमान ने अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के अपने फैसले पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है। चर्चा ये भी है कि अब गहलोत की बजाय दूसरे नेताओं को अध्यक्ष बनाने को लेकर कांग्रेस हाईकमान सोच रहा है। इनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह और केसी वेणुगोपाल का नाम आगे बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि जब अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी तो वह नाराज हो गईं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सोनिया गांधी ने इस दौरान कहा कि वह अशोक गहलोत जी से ऐसी अपेक्षा नहीं करती थीं। इसके बाद सोनिया गांधी ने माकन और खड़गे से इस पूरे मामले की विस्तृत लिखित रिपोर्ट मांगी।
कहा जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस हाईकमान ने अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के अपने फैसले पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है। चर्चा ये भी है कि अब गहलोत की बजाय दूसरे नेताओं को अध्यक्ष बनाने को लेकर कांग्रेस हाईकमान सोच रहा है। इनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह और केसी वेणुगोपाल का नाम आगे बताया जा रहा है।
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सचिन पायलट
- फोटो : अमर उजाला
पायलट को मिल सकता है इस कदम का फायदा?
गहलोत समर्थक विधायकों के इस्तीफे और लगातार बयानबाजी ने जहां अशोक गहलोत के खिलाफ पार्टी में माहौल बना दिया, वहीं सचिन पायलट ने चुप्पी साधे रखी। विश्लेषण कह रहे हैं कि सचिन की चुप्पी से उनका दावा मजबूत हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह कहते हैं, 'अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों ने इस्तीफे और पर्यवेक्षक के साथ बैठक न करके अपना खेल बिगाड़ लिया। वहीं, दूसरी ओर सचिन पायलट लगातार चुप रहे। तब भी चुप थे, जब अशोक गहलोत खुद उनपर निशाना साध रहे थे और उल्टा सीधा बोल रहे थे। यहां तक की गहलोत समर्थक विधायकों ने उन्हें गद्दार तक कह दिया था। इसके बावजूद सचिन पायलट ने धैर्य रखा और कांग्रेस हाईकमान तक अपनी बात पहुंचाते रहे।'
गहलोत समर्थक विधायकों के इस्तीफे और लगातार बयानबाजी ने जहां अशोक गहलोत के खिलाफ पार्टी में माहौल बना दिया, वहीं सचिन पायलट ने चुप्पी साधे रखी। विश्लेषण कह रहे हैं कि सचिन की चुप्पी से उनका दावा मजबूत हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह कहते हैं, 'अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों ने इस्तीफे और पर्यवेक्षक के साथ बैठक न करके अपना खेल बिगाड़ लिया। वहीं, दूसरी ओर सचिन पायलट लगातार चुप रहे। तब भी चुप थे, जब अशोक गहलोत खुद उनपर निशाना साध रहे थे और उल्टा सीधा बोल रहे थे। यहां तक की गहलोत समर्थक विधायकों ने उन्हें गद्दार तक कह दिया था। इसके बावजूद सचिन पायलट ने धैर्य रखा और कांग्रेस हाईकमान तक अपनी बात पहुंचाते रहे।'
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सचिन पायलट
- फोटो : अमर उजाला
प्रमोद कहते हैं, 'पायलट की चुप्पी ही उनका सबसे बड़ा हथियार बन गई है। इस चुप्पी ने गहलोत खेमे का पूरा खेल बिगाड़ दिया है। अगर पायलट और उनके समर्थक भी उल्टी सीधी बयानबाजी करते तो इसका नुकसान सचिन पायलट को उठाना पड़ सकता था।'