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SSC Scam ED Raids What happen to Rs 53 crore found from Arpita Mukherjee house and parth Chatterjee
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SSC Scam: अर्पिता के घर से मिले 53 करोड़ रुपये का क्या होगा, जानें छापेमारी में मिली रकम का ED क्या करती है?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 29 Jul 2022 11:15 PM IST
सार
पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी जिस मामले में फंसे हैं उससे एसएससी घोटाला या शिक्षा भर्ती घोटाला भी कहा जा रहा है। इसमें पैसे लेकर नियुक्ति करने का आरोप है।
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रहे पार्थ चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी सुखिर्यों में है। अब तक 53 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश और पांच किलो से ज्यादा सोना बरामद हो चुका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कैश का आंकड़ा 100 करोड़ तक जा सकता है। कमरों में फर्श पर पड़ी नोटों की गड्डियां देख हर कोई हैरान है। जो इसे देख रहा, वो यही सवाल कर रहा कि आखिर अब इन नोटों की गड्डियों का क्या होगा?
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ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि अर्पिता मुखर्जी के घर से बरामद इन रुपयों का ईडी क्या करेगी? आइए जानते हैं...
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अर्पिता मुखर्जी
- फोटो : Social Media
पहले जानिए वह घोटाला, जिसमें फंसे पार्थ चटर्जी-अर्पिता मुखर्जी
पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी जिस मामले में फंसे हैं उससे एसएससी घोटाला या शिक्षा भर्ती घोटाला भी कहा जा रहा है। 2016 में पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) को सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए 13,000 ग्रुप-डी कर्मचारियों की भर्ती की अधिसूचना जारी की। 2019 में इन नियुक्तियों को करने वाले पैनल की समय सीमा समाप्त हो गई। लेकिन इसके बावजूद, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसई) द्वारा कथित तौर पर कम से कम 25 व्यक्तियों को नियुक्त कर दिया गया।
नवंबर 2021 में दायर एक याचिका में इन ‘अवैध’ नियुक्तियों को व्यवस्था में भ्रष्टाचार बताया गया। इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने एसएससी और पश्चिम बंगाल बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसई) से हलफनामे मांगे। इन दोनों संस्थाओं ने अदालत में एक-दूसरे से उलट तथ्य पेश किए।
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टीएमसी नेता पार्थ चटर्जी
- फोटो : ANI
क्या थे दोनों संस्थाओं के हलफनामे में?
एसएससी ने अपने हलफनामे में कहा कि उसने अपनी ओर से किसी भी नियुक्ति के लिए चिट्ठी नहीं जारी की, जबकि डब्ल्यूबीएसएसई ने कहा कि उसे एक पेन ड्राइव में डेटा मिला था। इसी के तहत इन लोगों की नियमानुसार नियुक्ति हुई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि एसएससी पैनल का कार्यकाल खत्म होने के बाद बंगाल बोर्ड में 25 नहीं बल्कि 500 से ज्यादा लोगों को नियुक्त कर दिया गया। इनमें से ज्यादातर अब राज्य सरकार से वेतन ले रहे हैं। मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है।
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अर्पिता के फ्लैट से बरामद कैश व सोना।
- फोटो : ANI
कैसे हुई ईडी की एंट्री, निशाने पर क्यों आए पार्थ और अर्पिता?
ईडी ने इस मामले में मई में जांच शुरू कर दी। 22 जुलाई को ही एजेंसी ने पार्थ चटर्जी के ठिकानों समेत 14 जगहों पर छापेमारी की। पार्थ चटर्जी के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान ईडी को अर्पिता मुखर्जी की प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले थे।
इसके बाद ईडी ने जांच का दायरा बढ़ाया और अभिनेत्री अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट पर छापेमारी की।
एजेंसी को अर्पिता के फ्लैट से करीब 21 करोड़ रुपए कैश, 60 लाख की विदेशी करेंसी, 20 फोन और अन्य दस्तावेज मिले। इसके बाद ईडी ने बुधवार को अर्पिता के दूसरे ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी को अर्पिता के घर से 27.9 करोड़ रुपए कैश और सोना मिला है। इस तरह से कुल 53 करोड़ से ज्यादा की रकम मिल चुकी है।
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ईडी
- फोटो : अमर उजाला
अब जानिए ईडी के पास क्या-क्या अधिकार है?
ये समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय से संपर्क किया। उन्होंने कहा, 'ईडी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत संपत्ति जब्त करने का अधिकार है। जांच एजेंसी जिस कानून के तहत काम करती है, उसी के तहत उसे छापा मारने, जब्त करने और जब्त सामान को मालखाने या भंडारघर में जमा करने का अधिकार होता है।'
उन्होंने बताया, 'छापे में कई चीजें बरामद हो सकती हैं। इनमें दस्तावेज, कैश और गहने व अन्य कीमती सामान मिल सकते हैं। छापेमारी में जब्त की गई चीजों का पंचनामा बनाया जाता है। इसके बाद पंचनामे पर दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं। जिस व्यक्ति का सामान जब्त होता है, उसके भी हस्ताक्षर होते हैं। पंचनामा बनने के बाद जब्ती का सामान केस प्रॉपर्टी बन जाता है।
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